Aviation Sector: देश में अप्रैल के दौरान घरेलू हवाई यात्रा की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई। एक तरफ एयरलाइंस ने ईंधन फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू किया, जिससे टिकट महंगे हुए, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव का भी असर देखने को मिला। इसका नतीजा यह रहा कि अप्रैल में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या घटकर 1.38 करोड़ रह गई। हालांकि राहत की बात यह है कि मई में तस्वीर बदलती दिख रही है। गर्मी की छुट्टियों के मौसम में यात्रा की मांग बढ़ने से हवाई यातायात में फिर तेजी आई है और शुरुआती आंकड़े करीब 11 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी का संकेत दे रहे हैं।
घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो की बादशाहत लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 65 फीसदी पर पहुंच गई, जो एक महीने पहले के मुकाबले 1.7 प्रतिशत अंक ज्यादा है। अकासा एयर ने भी अपनी स्थिति मजबूत की और उसकी हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 5.8 फीसदी हो गई।
वहीं एयर इंडिया समूह के लिए अप्रैल का महीना कुछ कमजोर रहा। उसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 24.7 फीसदी रह गई। स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 3.4 फीसदी पर आ गई।
अप्रैल में ज्यादातर एयरलाइंस की उड़ानों में सीटें भरने का अनुपात यानी पैसेंजर लोड फैक्टर (PLF) कमजोर पड़ा। एयर इंडिया समूह का PLF सबसे ज्यादा गिरकर 78.5 फीसदी पर पहुंच गया। इंडिगो का PLF 82.7 फीसदी और स्पाइसजेट का 80.7 फीसदी रहा। हालांकि अकासा एयर इस मामले में सबसे आगे रही और उसका PLF बढ़कर 91.8 फीसदी हो गया, यानी उसकी अधिकांश उड़ानें लगभग पूरी तरह भरी रहीं।
समय पर उड़ानों के संचालन यानी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) के मामले में भी अधिकांश एयरलाइंस का प्रदर्शन कमजोर रहा। इंडिगो 88.5 फीसदी OTP के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली एयरलाइन रही। एयर इंडिया समूह ने भी सुधार दिखाया और उसका OTP बढ़कर 82.4 फीसदी हो गया। दूसरी ओर स्पाइसजेट का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जहां OTP घटकर केवल 31.2 फीसदी रह गया। अकासा एयर का OTP भी मामूली गिरावट के साथ 81.4 फीसदी पर आ गया।
यात्रियों के लिए एक और चिंता की बात यह रही कि अप्रैल में उड़ान रद्द होने की घटनाएं बढ़ गईं। इंडिगो की कैंसिलेशन दर मार्च के 0.27 फीसदी से बढ़कर 0.39 फीसदी हो गई। स्पाइसजेट में यह सबसे ज्यादा 2.67 फीसदी रही। एयर इंडिया समूह की कैंसिलेशन दर 0.82 फीसदी दर्ज की गई, जबकि अकासा एयर सबसे बेहतर स्थिति में रही और उसकी कैंसिलेशन दर केवल 0.17 फीसदी रही।
लागत के मोर्चे पर एयरलाइंस को कुछ राहत जरूर मिली है। सरकारी तेल कंपनियों ने जून के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में 27 फीसदी की बड़ी कटौती की है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय ATF की कीमत घटकर करीब 1.1 डॉलर प्रति लीटर रह गई है और यह अब घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमत के करीब पहुंच गई है।
वहीं घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत लगातार दूसरे महीने 104.9 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखी गई है। इसके अलावा दिल्ली और महाराष्ट्र में ATF पर वैट की दर घटाकर 7 फीसदी किए जाने से भी तेल कंपनियों और विमानन क्षेत्र को कुछ राहत मिली है। ईंधन खपत के लिहाज से इन दोनों राज्यों की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी है।
ब्रोकरेज फर्म Emkay का मानना है कि अप्रैल में महंगे हवाई किरायों और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से यात्रियों की संख्या पर दबाव रहा। हालांकि मई के आंकड़े बताते हैं कि छुट्टियों के मौसम में मांग फिर मजबूत हुई है। साथ ही विमान ईंधन की कीमतों में राहत मिलने से आने वाले महीनों में एयरलाइंस की लागत पर दबाव कुछ कम हो सकता है।