देश की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFC सेक्टर के लिए मार्च तिमाही काफी मजबूत रही। ज्यादातर कंपनियों ने अच्छी कमाई दर्ज की, लोन बुक तेजी से बढ़ी और नए कर्ज बांटने की रफ्तार भी मजबूत रही। इससे यह संकेत मिला कि पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहा सेक्टर अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। कंपनियां अभी भी कई बड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई और कमजोर मानसून की आशंका ने NBFC कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।
अगर आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल महंगा होता है और ग्रामीण इलाकों में बारिश कम रहती है, तो इसका असर ग्राहकों की कमाई और उनकी लोन चुकाने की क्षमता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद कंपनियां आने वाले समय को लेकर थोड़ा संभलकर चल रही हैं।
एंटीक की रिपोर्ट के मुताबिक, NBFC सेक्टर की कंपनियों का मुनाफा यानी PAT चौथी तिमाही में सालाना आधार पर करीब 30 प्रतिशत बढ़ा। वहीं तिमाही आधार पर इसमें करीब 24 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनियों की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM में भी मजबूत बढ़त देखने को मिली। पूरे सेक्टर का AUM सालाना आधार पर करीब 19.5 प्रतिशत और तिमाही आधार पर करीब 5 प्रतिशत बढ़ा। इसका मतलब साफ है कि लोगों की लोन डिमांड अभी भी बनी हुई है और कंपनियों ने तेजी से नए कर्ज बांटे हैं।
हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों यानी AHFCs की ग्रोथ सबसे मजबूत सेगमेंट्स में रही। इन कंपनियों का AUM सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़ा। वहीं डायवर्सिफाइड फाइनेंस कंपनियों में करीब 23 प्रतिशत और वाहन फाइनेंस कंपनियों में करीब 18 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। एंटीक की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल व्हीकल यानी CV सेगमेंट में रिकवरी के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं। ट्रक और दूसरे व्यावसायिक वाहनों की मांग में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। हालांकि ईंधन की बढ़ती कीमतें इस रिकवरी की रफ्तार को कुछ समय के लिए धीमा कर सकती हैं।
NBFC सेक्टर की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल पश्चिम एशिया संकट और महंगाई को लेकर है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो ट्रांसपोर्ट, LPG और दूसरे ईंधन आधारित कारोबारों पर असर पड़ेगा। इसका सीधा असर उन लोगों पर होगा जो पहले से लोन चुका रहे हैं। कंपनियों को डर है कि ऐसे हालात में कुछ ग्राहक EMI चुकाने में दिक्कत महसूस कर सकते हैं। इसी वजह से कई कंपनियों ने अतिरिक्त प्रावधान यानी अतिरिक्त सुरक्षा रकम अलग रखनी शुरू कर दी है।
कुछ बड़ी कंपनियों ने संभावित जोखिम को देखते हुए करीब 550 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मैनेजमेंट ओवरले बनाया है। आसान भाषा में समझें तो कंपनियां पहले से ही कुछ रकम अलग रख रही हैं, ताकि अगर भविष्य में खराब कर्ज बढ़ते हैं तो उससे निपटा जा सके। यह कदम दिखाता है कि कंपनियां फिलहाल बहुत ज्यादा आक्रामक रुख नहीं अपनाना चाहतीं और जोखिम को लेकर सतर्क हैं।
इस तिमाही में कंपनियों को एक बड़ी राहत फंड जुटाने की लागत में कमी से मिली। ज्यादातर NBFC कंपनियों की लागत में 16 से 46 बेसिस पॉइंट तक की गिरावट देखने को मिली। इससे कंपनियों के मार्जिन बेहतर हुए और मुनाफे को सहारा मिला। हालांकि एंटीक की रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे लागत में बहुत ज्यादा राहत मिलने की संभावना कम है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने और ब्याज दरों के असर के कारण FY27 में फंडिंग लागत स्थिर रह सकती है या थोड़ा बढ़ सकती है।
अच्छी बात यह रही कि सेक्टर की एसेट क्वालिटी फिलहाल मजबूत बनी हुई है। ज्यादातर कंपनियों के खराब कर्ज यानी GS3 में सुधार देखने को मिला। शुरुआती डिफॉल्ट यानी early delinquencies भी कम हुए हैं। क्रेडिट कॉस्ट चौथी तिमाही में घटकर करीब 1.7 प्रतिशत रह गया, जो पिछली तिमाही में करीब 2.3 प्रतिशत था। कंपनियों का कहना है कि अप्रैल 2026 तक पश्चिम एशिया संकट का कोई बड़ा असर ग्राहकों की भुगतान क्षमता पर नहीं दिखा है।
एंटीक की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा माहौल में गोल्ड फाइनेंस कंपनियां बेहतर स्थिति में रह सकती हैं। जब आर्थिक माहौल अनिश्चित होता है और दूसरे लोन सेगमेंट में मांग धीमी पड़ती है, तब लोग गोल्ड लोन की तरफ ज्यादा जाते हैं। इसी वजह से गोल्ड लोन कारोबार तेजी से बढ़ाने वाली कंपनियों को आने वाले समय में फायदा मिल सकता है। सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने को भी इन कंपनियों के लिए सकारात्मक माना गया है।
NBFC सेक्टर के लिए आने वाले समय में मानसून काफी अहम रहने वाला है। अगर बारिश सामान्य रहती है, तो ग्रामीण इलाकों में मांग मजबूत रह सकती है और वाहन व हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को फायदा मिलेगा। लेकिन अगर मानसून कमजोर रहता है, तो ग्रामीण आय प्रभावित हो सकती है और इससे लोन ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
एंटीक की रिपोर्ट में Cholamandalam, Shriram Finance और India Shelter को पसंदीदा कंपनियों में शामिल किया गया है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल के बावजूद इन कंपनियों की ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और बिजनेस मॉडल मजबूत बने हुए हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)