FMCG Stocks: देश के FMCG और कंज्यूमर सेक्टर के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। साल 2026 की शुरुआत में मांग में सुधार और कच्चे माल की स्थिर कीमतों से कंपनियों को राहत मिली थी, लेकिन अब कच्चे तेल की तेजी ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल 2026 में कच्चे तेल की कीमतें सालाना आधार पर करीब 70 फीसदी बढ़ चुकी हैं। इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और मुनाफे पर दबाव बनने लगा है। अब कंपनियों के सामने मांग बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने की चुनौती है।
मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों के मुताबिक, महंगाई का असर हर दौर में अलग रहा है। 2011 से 2014 के दौरान मध्यम स्तर की महंगाई ने बड़ी FMCG कंपनियों को फायदा पहुंचाया था। मजबूत ब्रांड और वितरण नेटवर्क के दम पर उन्होंने बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई और अच्छा मुनाफा कमाया। लेकिन 2022-23 में नई कंपनियों और ब्रांड्स से प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण बाजार बंट गया। कंपनियां बाजार हिस्सेदारी बचाने में लगी रहीं, जिससे मुनाफे और ग्रोथ दोनों पर असर पड़ा।
मौजूदा हालात को विशेषज्ञ 2022-23 जैसे दौर के करीब मान रहे हैं। कंपनियां चुनिंदा प्रोडक्ट्स में कीमतें बढ़ा रही हैं, लेकिन ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ने के डर से बड़े स्तर पर कीमतें बढ़ाने से बच रही हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियों को और कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इससे बिक्री पर असर पड़ सकता है।
बहरहाल, इस सबके बीच भी कुछ स्टॉक्स हैं जिन पर ब्रोकरेज का भरोसा कायम है-
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने Marico पर सकारात्मक नजरिया रखा है और 900 रुपये का टारगेट दिया है। कंपनी के पैराशूट, हेयर ऑयल और सफोला ब्रांड्स में मजबूत मांग देखने को मिली है। वहीं नारियल की कीमतों में गिरावट से मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है। शेयर का मौजूदा भाव ₹826.70 है। इस लिहाज से इसमें 9% के रिटर्न की उम्मीद है।
ब्रोकरेज हाउस ने Radico Khaitan पर भी भरोसा जताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक की नई आबकारी नीति से प्रीमियम शराब की बिक्री को फायदा मिल सकता है। कंपनी की प्रीमियम कैटेगरी तेजी से बढ़ रही है और कर्ज लगातार घट रहा है। मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई में मजबूत वृद्धि जारी रह सकती है। इसी के चलते ब्रोकरेज ने शेयर पर ₹3,850 का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव ₹3,373.90 के लिहाज से देखें तो 14 फीसदी का अपसाइड मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)