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धोखाधड़ी के मामलों में भुगतान रोकने पर ब्रोकरों ने मांगा सेबी से स्पष्टीकरण

अनधिकृत ट्रेडिंग और कथित धोखाधड़ी वाले मामलों में भुगतान रोके जाने के बाद कई ब्रोकरों ने SEBI से स्पष्ट प्रक्रिया और तय समय-सीमा की मांग की है

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- May 14, 2026 | 10:53 AM IST

कई ब्रोकरों ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से संपर्क किया है और भुगतान रोकने की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने खासतौर पर कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन या अनधिकृत ट्रेडिंग से जुड़े मामलों को लेकर अपनी बात रखी है। यह मामला हाल में हुई एक घटना के बाद सामने आया है। इस घटना में एनएसई सहित मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस ने जोखिम प्रबंधन प्रोटोकॉल के उल्लंघन और एक क्लाइंट के खाते में अनधिकृत ट्रेडिंग की शिकायत से संबंधित पुलिस अलर्ट मिलने के बाद लगभग 78 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया था।

सूत्रों के अनुसार पुलिस को 5 मई को शिकायत मिली। इसके बाद उन्होंने उस दिन किए गए सौदों के निपटान को तुरंत रोकने का निर्देश दिया गया। मामले के जानकार एक व्यक्ति ने कहा, ‘चूंकि इसका असर काफी व्यापक है और यह 160 से ज्यादा ब्रोकरों और 3,000 से अधिक ग्राहकों तक फैला हुआ है। इसलिए इस बारे में नियामकों समेत संबंधित अधिकारियों से बात की गई है। अब इस बात पर चर्चा चल रही है कि सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड (एसएमसी) बिल में ऐसे मामलों से निपटने के लिए कुछ प्रावधान किए जाएं।

एसएमसी बिल को संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति के पास भेजा गया है। 6 मई के एक नोटिस में एनएसई ने कहा कि इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन में शामिल कुछ ग्राहकों को किए जाने वाले भुगतान रोक दिए गए हैं और इस मामले की जांच प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा की जा रही है। एक्सचेंज ने कहा कि ये भुगतान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपी) के अनुसार रोके गए थे।

ब्रोकर ऐसे मामलों के समाधान के लिए स्पष्ट समय-सीमा की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एमआईआई को ऐसे मामलों का स्वतंत्र रूप से आकलन करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए अधिक अधिकार दिए जाएं, ताकि उन्हें बाहरी प्रवर्तन एजेंसियों की जांच की रफ्तार पर न निर्भर रहना पड़े।

एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘मामले के आधार पर फंड को ब्लॉक रखना है या रिलीज करना है, इसके लिए एक समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें निवेशकों की शिकायतों से जुड़े मामलों में पुलिस में शिकायतें लंबित होने की वजह से करोड़ों रुपये दशकों तक फंसे रहे हैं। एमआईआई के पास ऐसी स्थितियों में ज्यादा सोच-समझकर फैसले लेने के लिए जरूरी डेटा और बाजार की समझ दोनों हैं।’सेबी ने इस संबंध में बिजनेस स्टैंडर्ड के ईमेल का जवाब नहीं दिया।

First Published : May 14, 2026 | 10:53 AM IST