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बढ़ते दामों के बीच अल्ट्राटेक, जेके सीमेंट पर भरोसा बरकरार, लेकिन सेक्टर को लेकर सतर्क ब्रोकरेज

पिछले कुछ महीनों में आयातित कोयले और दूसरे ईंधनों की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। हाल में इनमें कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन कंपनियों का खर्च अभी भी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 05, 2026 | 3:26 PM IST

देश में सीमेंट की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन सीमेंट कंपनियों के लिए हालात अभी भी पूरी तरह आसान नहीं हैं। एक तरफ बिक्री बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ ईंधन और पैकेजिंग जैसी लागतें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में कंपनियां कीमतें बढ़ाकर इसकी भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।

अप्रैल और मई के दौरान सीमेंट की मांग में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि, कई इलाकों में मजदूरों की कमी, तेज गर्मी और कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की वजह से मांग की रफ्तार पर असर पड़ा। इसके बावजूद उत्तर और पश्चिम भारत में सड़क, पुल और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से मांग मजबूत बनी रही।

सीमेंट के दाम बढ़े, अब एक और बढ़ोतरी की तैयारी

ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली तिमाही के मुकाबले सीमेंट के दाम औसतन 8-10 रुपये प्रति बैग बढ़े हैं। अब कंपनियां जून में भी 10-15 रुपये प्रति बैग तक कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि बाजार इन बढ़ी हुई कीमतों को कितना स्वीकार करता है। अगर कीमतें टिकती हैं तो कंपनियों को राहत मिल सकती है, वरना बढ़ती लागत का सीधा असर मुनाफे पर पड़ेगा।

ईंधन ने बढ़ाई चिंता

सीमेंट बनाने में सबसे ज्यादा खर्च ईंधन पर आता है। पिछले कुछ महीनों में आयातित कोयले और दूसरे ईंधनों की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। हाल में इनमें कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन कंपनियों का खर्च अभी भी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ईंधन लागत 200-250 रुपये प्रति टन तक बढ़ सकती है। इसके अलावा सीमेंट की बोरियों की लागत भी बढ़ रही है।

मुनाफा घट सकता है

कीमतों में हुई बढ़ोतरी अभी लागत बढ़ने की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही। यही वजह है कि इस तिमाही में कंपनियों का प्रति टन मुनाफा 50-100 रुपये तक घट सकता है। यानी बिक्री बढ़ने के बावजूद मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है।

नई फैक्ट्रियों से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

सीमेंट कंपनियों के सामने एक और चुनौती है। अगले कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में नई उत्पादन क्षमता जुड़ने वाली है। अनुमान है कि 2026 से 2028 के बीच हर साल 5 करोड़ टन से ज्यादा नई क्षमता बाजार में आएगी। इसका मतलब है कि कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी। ऐसे में कीमतों और मुनाफे में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

मांग को लेकर उम्मीद कायम

उद्योग को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष 2027 में सीमेंट की मांग 6-7 फीसदी तक बढ़ सकती है। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सड़क निर्माण और हाउसिंग सेक्टर से मांग को सहारा मिलने की उम्मीद है।

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की क्या राय है?

ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि निकट अवधि में सीमेंट कंपनियों की कमाई में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बढ़ती लागत और बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसकी बड़ी वजह हैं। हालांकि, लंबी अवधि में मांग मजबूत रहने और लागत नियंत्रण के प्रयासों से स्थिति बेहतर हो सकती है। ब्रोकरेज की पसंदीदा कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट और जेके सीमेंट शामिल हैं, जबकि श्री सीमेंट को लेकर भी उसका रुख सकारात्मक बना हुआ है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : June 5, 2026 | 3:26 PM IST