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मजबूत मांग और ऊंची कीमतों से बढ़ सकती है स्टील कंपनियों की कमाई, Tata Steel बनी टॉप पिक

चीन में उत्पादन घटने और घरेलू मांग मजबूत रहने से स्टील कंपनियों को मिल सकता है फायदा

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 11, 2026 | 8:56 AM IST

देश में स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है और कीमतों में भी मजबूती देखने को मिल रही है। ऐसे में स्टील कंपनियों के लिए कारोबारी माहौल पहले के मुकाबले बेहतर होता दिख रहा है। चीन में उत्पादन कम होने, भारत सरकार की ओर से आयातित स्टील पर सेफगार्ड शुल्क लगाने और घरेलू बाजार में मजबूत मांग बने रहने से कंपनियों को सहारा मिल रहा है। हालांकि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

मांग में तेजी बनी हुई है

ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में देश में स्टील की मांग 7.6 प्रतिशत बढ़कर 16.37 करोड़ टन रही। वहीं अप्रैल 2026 में मांग 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.30 करोड़ टन तक पहुंच गई। रिपोर्ट का कहना है कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी के चलते स्टील की खपत लगातार बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में भी मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद है। वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन का अनुमान है कि भारत में स्टील की मांग 2026 में 7.4 प्रतिशत और 2027 में 9.2 प्रतिशत बढ़ सकती है।

स्टील की कीमतों को मिला सहारा

हाल के महीनों में घरेलू स्टील कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। पहली तिमाही में हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) की औसत कीमत करीब 58,740 रुपये प्रति टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले 13.5 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं कोल्ड रोल्ड कॉइल (सीआरसी) की कीमत 65,805 रुपये प्रति टन रही, जिसमें भी दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरिया की कीमतों में भी बढ़त रही है, हालांकि हाल के दिनों में इसमें कुछ नरमी देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक मानसून के दौरान मांग थोड़ी धीमी पड़ सकती है, इसलिए कीमतों में बहुत तेज उछाल की संभावना फिलहाल कम दिख रही है।

चीन में उत्पादन घटने से बढ़ी उम्मीद

दुनिया के सबसे बड़े स्टील उत्पादक चीन में उत्पादन घटने के संकेत मिल रहे हैं। अप्रैल 2026 तक के 12 महीनों में चीन का कच्चा स्टील उत्पादन 6.6 प्रतिशत घट गया। इसके अलावा इस साल के पहले पांच महीनों में चीन का स्टील निर्यात भी 8.1 प्रतिशत कम रहा है। रिपोर्ट का मानना है कि अगर चीन उत्पादन में और कटौती करता है तो वैश्विक बाजार में स्टील की आपूर्ति कम होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों को सहारा मिलेगा और भारतीय स्टील कंपनियों को भी फायदा हो सकता है।

सरकार के सेफगार्ड शुल्क का असर

भारत सरकार ने हाल में स्टील आयात पर सेफगार्ड शुल्क लगाया है। इसका मकसद सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को बचाना है। रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम का असर अब बाजार में दिखने लगा है। घरेलू स्टील की कीमतें बढ़ी हैं और भारतीय कंपनियों को बेहतर दाम मिलने लगे हैं। खास बात यह है कि फिलहाल भारतीय एचआरसी की कीमतें चीन से आयात होने वाले स्टील की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं।

कच्चे माल की बढ़ती लागत बनी चुनौती

हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। स्टील कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चिंता कोकिंग कोल और लौह अयस्क की कीमतें हैं। रिपोर्ट के अनुसार पहली तिमाही में कोकिंग कोल की औसत कीमत लगभग 236.5 डॉलर प्रति टन रही, जो पिछले साल की तुलना में 28 प्रतिशत ज्यादा है। इससे स्टील बनाने की लागत बढ़ रही है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि चालू तिमाही में कंपनियों की कोयला लागत 15 से 25 डॉलर प्रति टन तक बढ़ सकती है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी ईंधन और कच्चे माल की सप्लाई पर पड़ रहा है।

किन कंपनियों को मिलेगा ज्यादा फायदा

रिपोर्ट का कहना है कि जिन कंपनियों के पास अपने कच्चे माल के स्रोत हैं, वे बढ़ती लागत के असर से काफी हद तक बच सकती हैं। उदाहरण के तौर पर टाटा स्टील अपनी लौह अयस्क की जरूरत का लगभग पूरा हिस्सा खुद पूरा करती है। वहीं जिंदल स्टील के पास भी विदेशों में कोयला खदानों के जरिए कुछ हद तक सुरक्षा है। ऐसे में इन कंपनियों पर लागत बढ़ने का असर अपेक्षाकृत कम पड़ सकता है।

नई क्षमता बढ़ाएगी प्रतिस्पर्धा

दूसरी ओर आने वाले वर्षों में देश में बड़ी मात्रा में नई स्टील उत्पादन क्षमता भी जुड़ने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2028 तक करीब 1.5 करोड़ टन नई कच्चा स्टील उत्पादन क्षमता शुरू हो सकती है। इसका मतलब है कि भविष्य में बाजार में स्टील की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में मांग मजबूत रहने के बावजूद कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की गुंजाइश सीमित हो सकती है।

टाटा स्टील बनी पसंदीदा कंपनी

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने स्टील सेक्टर में टाटा स्टील को अपनी पहली पसंद बताया है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 235 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी कलिंगनगर में 50 लाख टन क्षमता वाली नई ब्लास्ट फर्नेस और 22 लाख टन क्षमता वाले कोल्ड रोलिंग कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ा रही है। इससे बिक्री बढ़ेगी और कंपनी के उत्पादों का मिश्रण भी बेहतर होगा।

इसके अलावा यूरोप में कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) लागू होने और आयात नियम सख्त होने से वहां स्टील कीमतों को सहारा मिल सकता है, जिसका फायदा टाटा स्टील के यूरोपीय कारोबार को मिलेगा।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह

कंपनी रेटिंग CMP (रुपये) टारगेट प्राइस (TP) संभावित रिटर्न
टाटा स्टील खरीदें (BUY) 199 235 18.1%
जेएसडब्ल्यू स्टील होल्ड (HOLD) 1,269 1,151 -9.3%
सेल (SAIL) होल्ड (HOLD) 182 167 -8.2%
जिंदल स्टील खरीदें (BUY) 1,120 1,318 17.7%

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि फिलहाल टाटा स्टील और जिंदल स्टील में सबसे ज्यादा दम नजर आ रहा है। इन दोनों शेयरों में मौजूदा स्तर से करीब 18 प्रतिशत तक बढ़त की गुंजाइश है, इसलिए इन पर ‘खरीदें’ की सलाह दी गई है। वहीं जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल के शेयर पहले ही काफी ऊपर चल रहे हैं और इनमें फिलहाल ज्यादा कमाई की संभावना नहीं दिख रही, इसलिए इन पर ‘होल्ड’ की राय दी गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि देश में स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है और चीन में उत्पादन कम होने से भारतीय कंपनियों को फायदा मिल सकता है, लेकिन कोयले और दूसरे कच्चे माल की बढ़ती लागत पर नजर रखना जरूरी होगा।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : June 11, 2026 | 8:56 AM IST