बाजार

एफएआर बॉन्ड्स में FPI का भरोसा डगमगाया, 11 करोड़ की निकासी से टूटा निवेश का ट्रेंड

एफएआर प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश जेपी मॉर्गन इंडेक्स समावेशन के बाद घटा और भू-राजनीतिक तनाव व टैरिफ चिंताओं के चलते निकासी बढ़ गई।

Published by
अंजलि कुमारी   
Last Updated- April 01, 2026 | 8:08 AM IST

वित्त वर्ष 2025-26 में फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की रकम की आवक सपाट बनी रही। वैश्विक जोखिम उठाने की क्षमता घटने से साल के दौरान 11 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में 2.3 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध पूंजी निवेश हुआ था। क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।

वित्त वर्ष 2024-25 में एफपीआई के पूंजी निवेश को जेपीमॉर्गन के गवर्नमेंट बॉन्ड-इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स (जीबीओ-ईएम) में चरणबद्ध प्रवेश से समर्थन मिला। जून 2024 और मार्च 2025 के बीच एफएआर रूट के तहत कुल विदेशी खरीद 1.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, जो लगभग 14 अरब डॉलर है। जेपीमॉर्गन ने सितंबर 2023 में घोषणा की थी कि भारतीय बॉन्डों को 28 जून, 2024 से इस इंडेक्स में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा और 31 मार्च, 2025 तक 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से यह वेटेज पूरा 10 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

मार्च 2025 के बाद समावेशन प्रक्रिया के पूरी होने पर बड़े बदलाव देखे गए। सीसीआईएल के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 में 11,145 करोड़ रुपये, मई में 12,317 करोड़ रुपये और जून में 7,800 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। इस तरह वित्त वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में विदेशी निवेश में कुल मिलाकर 31,000 करोड़ रुपये (लगभग 3.7 अरब डॉलर) की कमी आई।

यह बिकवाली मुख्य रूप से मुनाफावसूली की वजह से हुई थी। साथ ही 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और घरेलू बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड के बीच यील्ड अंतर का कम होना भी इसके कारण थे, जो अप्रैल 2025 में 200 आधार अंक से नीचे आ गया। यह घरेलू मांग के कारण हुआ। दूसरी ओर, व्यापार शुल्कों के कारण मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ने से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हुई, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा अल्पावधि में दरों में कटौती करने की उम्मीदें घट गईं।

एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2024 का कुछ महीनों में जेपी मॉर्गन इंडेक्स शामिल किए जाने से मदद मिली। समावेशन पूरा होने के बाद निवेश प्रवाह जारी रहने की उम्मीद थी, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों और व्यापार टैरिफ संबंधी चिंताओं ने जोखिम से दूर रहने की धारणा को बढ़ावा दिया, लिहाजा बिकवाली हुई।’

एफएआर सेगमेंट ने बाद के महीनों में मामूली पूंजी प्रवाह बनाए रखने में कामयाबी हासिल की। लेकिन मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष छिड़ने के बाद यह नकारात्मक हो गया।

First Published : April 1, 2026 | 8:08 AM IST