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जंग के माहौल में defence stocks बन सकते हैं सुपरहिट, 7 शेयरों पर BUY रेटिंग ने बढ़ाई उम्मीद

इस बार प्राइवेट डिफेंस कंपनियां सरकारी दिग्गजों से आगे निकलती दिख रही हैं

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 07, 2026 | 8:38 AM IST

दुनिया में बारूद की गंध है, आसमान में ड्रोन हैं, और हर देश अपनी सुरक्षा पर पहले से ज्यादा खर्च कर रहा है। ऐसे माहौल में भारत की रक्षा कंपनियों के लिए कहानी सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि ऑर्डर, मुनाफे और बड़े मौके की बनती दिख रही है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की ताजा रिपोर्ट कहती है कि मार्च तिमाही में काम तो बहुत हुआ है, लेकिन कमाई का खेल सबके लिए एक जैसा नहीं रहा। और सबसे दिलचस्प बात- इस बार सरकारी कंपनियों से ज्यादा चमक निजी कंपनियों में दिख सकती है।

Q4 में मशीनें फुल स्पीड पर, लेकिन कमाई में सबकी चाल अलग-अलग

मार्च तिमाही रक्षा कंपनियों के लिए हमेशा “एक्जीक्यूशन सीजन” होती है- यानी जो ऑर्डर मिले, उन्हें तेजी से पूरा करो, डिलीवरी करो, बिल बनाओ। इस बार भी यही हुआ। फैक्ट्रियां चलीं, सप्लाई बढ़ी, प्रोजेक्ट आगे बढ़े। लेकिन जब कमाई का हिसाब किताब खुला, तो तस्वीर एकदम सीधी नहीं निकली। कुछ कंपनियों ने रफ्तार पकड़ी, तो कुछ बड़े नाम फिसलते दिखे। रिपोर्ट के मुताबिक कुल मिलाकर सेक्टर की औसत आय बढ़ सकती है, लेकिन यह बढ़त कुछ चुनिंदा कंपनियों की वजह से है, सबकी नहीं।

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सरकारी दिग्गजों पर दबाव, प्राइवेट खिलाड़ी मार रहे बाज़ी

अब आता है असली ट्विस्ट। जिन सरकारी कंपनियों को हमेशा रक्षा सेक्टर का “सुरक्षित दांव” माना जाता है, इस बार उन्हीं पर मार्जिन का दबाव दिख रहा है। एचएएल और बीईएल जैसे बड़े नामों की कमाई में बहुत बड़ी छलांग नहीं दिख रही, बल्कि कुछ जगह मुनाफे में गिरावट तक का अनुमान है। वजह? ऊंचा बेस, लागत का दबाव, और कुछ प्रोजेक्ट्स में देरी।

दूसरी तरफ निजी कंपनियों की कहानी अलग है। सोलर इंडस्ट्रीज, पीटीसी इंडस्ट्रीज और एस्ट्रा माइक्रोवेव जैसे नाम तेज रफ्तार में दिख रहे हैं। यानी जहां सरकारी कंपनियां बचाव खेल रही हैं, वहीं प्राइवेट कंपनियां आक्रामक बल्लेबाजी कर रही हैं।

ऑर्डर आने थे तूफान की तरह… लेकिन बारिश हल्की रही

रिपोर्ट का एक बड़ा पॉइंट यह है कि इस साल कई कंपनियां अपने सालाना राजस्व लक्ष्य से थोड़ा पीछे रह सकती हैं। क्यों? क्योंकि जितनी तेजी से नए ऑर्डर आने चाहिए थे, उतनी रफ्तार नहीं दिखी। ऊपर से ईरान से जुड़े तनाव का असर निर्यात पर भी पड़ा।मतलब मैदान तैयार था, खिलाड़ी भी तैयार थे, लेकिन गेंद थोड़ी देर से आई। यही वजह है कि कुछ कंपनियों की कमाई उम्मीद से कम रह सकती है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती- असल खेल अभी बाकी है।

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ऑर्डर बुक रिकॉर्ड पर, सरकार ने खोल दिया खजाना

अब सुनिए वो हिस्सा, जो पूरे सेक्टर की दिशा बदल सकता है। सरकार ने रक्षा खरीद के लिए रिकॉर्ड स्तर पर मंजूरियां दी हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इस साल करीब 6.7 लाख करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी है। इसके अलावा राफेल खरीद के लिए भी भारी-भरकम प्रस्ताव पास हुए हैं। इसका सीधा मतलब है- अगले साल ऑर्डर की बारिश हो सकती है। कंपनियों के पास पहले से बड़ी ऑर्डर बुक है, और अगर इन मंजूरियों का बड़ा हिस्सा ऑर्डर में बदलता है, तो एफवाई27 में रक्षा कंपनियों की कमाई नई ऊंचाई छू सकती है।

मिसाइल, ड्रोन, रडार… अगली कमाई का असली इंजन यही बनेगा

रिपोर्ट साफ कहती है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में सबसे ज्यादा फायदा उन कंपनियों को होगा जो मिसाइल, इंटरसेप्टर, ड्रोन, रडार और गोला-बारूद वाले सेगमेंट में काम करती हैं। वजह भी साफ है- युद्ध हो या तनाव, सबसे पहले इन्हीं चीजों की मांग बढ़ती है। सिर्फ नई खरीद नहीं, पुराने स्टॉक की भरपाई भी करनी पड़ती है। यानी मांग डबल है- नई जरूरत भी और पुरानी भरपाई भी। ऐसे में इस सेगमेंट की कंपनियों के लिए आने वाला साल “सुनहरा” साबित हो सकता है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की पसंद: ये नाम रहेंगे फोकस में

रिपोर्ट में अगले साल के लिए तीन नाम सबसे ज्यादा उभरकर आए हैं- सोलर इंडस्ट्रीज, आजाद इंजीनियरिंग और एचएएल। सोलर और आजाद को लेकर रिपोर्ट का भरोसा मजबूत है, क्योंकि इनके ऑर्डर और प्रदर्शन दोनों में दम दिख रहा है। वहीं सरकारी कंपनियों में एचएएल को लेकर उम्मीद है कि तेजस एमके-1ए की डिलीवरी बढ़ने से अगले साल ग्रोथ तेज हो सकती है। यानी अगर आप रक्षा सेक्टर की कहानी समझना चाहते हैं, तो इन नामों पर नजर टिकाकर रखिए।

कंपनी का नाम टारगेट प्राइस (रुपये) रेटिंग
सोलर इंडस्ट्रीज 17,200 BUY
हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स 5,300 BUY
आजाद इंजीनियरिंग 1,900 BUY
भारत डायनेमिक्स 1,400 BUY
मिधानी 445 BUY
एस्ट्रा माइक्रोवेव 1,200 BUY
पीटीसी इंडस्ट्रीज 21,000 BUY
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 480 ADD
ज़ेन टेक्नोलॉजीज 1,520 ADD
डायनेमैटिक टेक्नोलॉजीज 7,700 SELL

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : April 7, 2026 | 8:31 AM IST