बाजार

डॉलर में कमजोरी, तेल की कीमतों में गिरावट- बाजार में राहत के संकेत

डॉलर इंडेक्स 6 हफ्ते के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है, जबकि अमेरिका-ईरान बातचीत की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 14, 2026 | 8:10 AM IST

वैश्विक बाजार में मंगलवार को डॉलर और कच्चे तेल दोनों में हलचल देखने को मिली। निवेशकों के रुख में बदलाव और अमेरिका-ईरान बातचीत की उम्मीदों ने बाजार की दिशा प्रभावित की। डॉलर इंडेक्स करीब 98.3 के स्तर पर बना रहा, जो पिछले छह हफ्तों के निचले स्तर के आसपास है। निवेशक अब सुरक्षित निवेश से निकलकर जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे डॉलर पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीद बढ़ने से बाजार का माहौल बेहतर हुआ है। हालांकि वीकेंड पर लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने के संकेत मिले हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे महंगाई को लेकर चिंता कम हुई है और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना भी थोड़ी कमजोर पड़ी है। फेड के एक अधिकारी के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र के झटके का लंबी अवधि की महंगाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और अगले एक साल में महंगाई फिर से लक्ष्य के करीब आ सकती है।

तेल की कीमतों में गिरावट

दूसरी ओर, WTI कच्चे तेल की कीमत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह 97 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की नई संभावना से तेल की कीमतों पर दबाव बना है। वीकेंड पर करीब 21 घंटे की बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका, लेकिन दोनों पक्ष आगे बातचीत जारी रखने को तैयार हैं।

सप्लाई में कमी, नजर रिपोर्ट पर

ओपेक प्लस की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में उत्पादन में करीब 7.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। इसका मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई बाधाएं हैं, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई है। अब बाजार की नजर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की आने वाली मासिक रिपोर्ट पर है, जिससे यह संकेत मिल सकता है कि आगे सप्लाई और मांग का संतुलन कैसा रहेगा और कीमतों की दिशा क्या होगी।

First Published : April 14, 2026 | 8:10 AM IST