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’21 से 19 PE गिर भी जाए तो डरने की जरूरत नहीं’ DSP MF CIO ने बताया कहां से बनेगा असली पैसा

IT सेक्टर पर सतर्क लेकिन ऑटो और बैंकिंग पर बुलिश! DSP MF CIO का बड़ा पोर्टफोलियो प्लान

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 25, 2026 | 8:43 AM IST

डीएसपी एमएफ के मुख्य निवेश अधिकारी अनीश तवाकले का कहना है कि अगर तीन साल की अवधि में कमाई में बढ़ोतरी मजबूत बनी रहती है, तो भी निवेशक ठीक-ठाक रिटर्न कमा सकते हैं, भले ही मूल्यांकन में थोड़ी नरमी आ जाए। मुंबई में अभिषेक कुमार के साथ एक इंटरव्यू में तवाकले ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से पैदा हुई समस्याएं अस्थायी हैं। मुख्य अंश:

क्या बाजार पश्चिम एशिया के जोखिमों को पूरी तरह से दर्शाते हैं, खासकर तब जब तेल की कीमतें ऊची बनी रहती हैं?

हमारा मानना है कि ये व्यवधान अस्थायी हैं। निवेशकों को घबराने से बचना चाहिए और किसी भी अल्पावधि उतार-चढ़ाव का उपयोग अपनी खरीदारी बढ़ाने के लिए करना चाहिए। इस अस्थायी भू-राजनीतिक मुद्दे को छोड़कर, भारत की अर्थव्यवस्था बुनियादी तौर पर अच्छी स्थिति में है। मांग में सुधार हो रहा है और अर्थव्यवस्था में अभी भी कुछ अतिरिक्त क्षमता मौजूद है। इसलिए, एक बार जब यह बाहरी झटका पीछे छूट जाएगा, तो अर्थव्यवस्था फिर से अपनी गति पकड़ सकती है। भले ही तेल की कीमतें ऊंची बनी रहें, भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जो बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ अर्थव्यवस्था पर डालने के बजाय उसके असर को कम करने में मददगार हो सकता है।

आप इस समय लार्जकैप के मूल्यांकन को किस नजर से देखते हैं?

लार्जकैप के मूल्यांकन सस्ते तो नहीं हैं, लेकिन बहुत ज्यादा महंगे भी नहीं हैं। इन स्तरों पर, अगर अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती है, तो कोई भी ठीक-ठाक रिटर्न कमा सकता है। लंबे समय के लिहाज से निवेश करने वालों के लिए, पीई मल्टीपल का 21 गुना से 19 गुना पर जाना उतना मायने नहीं रखता, जितना कि कमाई में बढ़ोतरी। अगर तीन साल की अवधि में कमाई में बढ़ोतरी अच्छी बनी रहती है, तो निवेशक तब भी ठीक-ठाक रिटर्न कमा सकते हैं, भले ही मूल्यांकन में थोड़ी कमी आ जाए।

स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में जोरदार तेजी आई है। क्या आपको लगता है कि यह रुझान जारी रह सकता है?

कोविड के बाद के दौर में इक्विटी बाजार में बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने का दौर देखने को मिला। ऐसे दौर के बाद अक्सर निराशा का लंबा दौर आता है, क्योंकि उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं। इस दौरान प्रमोटरों और निजी इक्विटी निवेशकों ने भी बड़े पैमाने पर बिकवाली की है, जबकि कुछ मामलों में बाजार कॉरपोरेट गवर्नेंस और आय गुणवत्ता से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा हो सकता है। आय की खराब गुणवत्ता से मेरा मतलब ऐसे मुनाफे से है, जिनका आधार कैश फ्लो नहीं होता। कई कंपनियां अकाउंटिंग मुनाफा दिखाती हैं, जबकि उनकी बैलेंस शीट पर इन्वेंट्री, रिसीवेबल्स या अमूर्त संपत्तियों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही होती है। यह बात खास तौर पर छोटी और मिडकैप कंपनियों केमामले में अधिक प्रासंगिक है।

इस वित्त वर्ष में कमाई में वृद्धि को लेकर आपकी क्या उम्मीदें हैं?

यह साल चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है, क्योंकि कंपनियां भू-राजनीतिक माहौल से पैदा हुई अनिश्चितता का इस्तेमाल पुरानी समस्याओं को एक साथ निपटाने और अपनी बैलेंस शीट को दुरुस्त करने के लिए कर सकती हैं। इसलिए, मैं इस साल आय वृद्धि को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं रखूंगा। हालांकि, अगर अर्थव्यवस्था बुनियादी आधार पर मजबूत रहती है, तो निवेशकों को एक साल की मामूली आय वृद्धि से संतोष करने के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर हम इस तरह के साल में भी दो अंक की आय वृद्धि हासिल करते हैं, तो यह काफी संतोषजनक होगा।

क्या भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण पोर्टफोलियो की स्थिति में कोई बदलाव आया है?

चक्रीय नजरिये से अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है। अर्थव्यवस्था में अभी भी कुछ गुंजाइश बाकी है और यह चक्र अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है। ऐसे माहौल में, मैं घरेलू चक्रीय क्षेत्रों को प्राथमिकता देता हूं। जिन क्षेत्रों को मैं पसंद करता हूं, उनमें ऑटोमोबाइल, बैंक और बीमा कंपनियों सहित वित्तीय क्षेत्र और सीमेंट शामिल हैं। हमें पूंजीगत वस्तु कंपनियां भी पसंद हैं, भले ही उनके मार्जिन अपने चरम पर पहुंच चुके हों।

मूल्यांकन में गिरावट के बावजूद आप आईटी क्षेत्र पर सतर्क क्यों हैं?

भारत में मौजूद आईटी सेवाओं का व्यापक इकोसिस्टम (जिसमें जीसीसी और वैश्विक कंपनियों के भारतीय परिचालन शामिल हैं) अभी भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, सूचीबद्ध भारतीय आईटी कंपनियों को अब बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

First Published : May 25, 2026 | 8:43 AM IST