प्रतीकात्मक फोटो
मानसून सीजन शुरू होने से पहले ट्रैक्टर सेक्टर को लेकर बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस साल बारिश सामान्य से कम रही और एल नीनो का असर बढ़ा, तो ग्रामीण मांग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसी वजह से महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), एस्कॉर्ट्स कुबोटा, वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स, एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और आयशर मोटर्स जैसी ग्रामीण बाजार से जुड़ी कंपनियों के शेयर निवेशकों की नजर में रहेंगे।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान दीर्घकालिक औसत (LPA) के 92 प्रतिशत पर लगाया है। इसे सामान्य से कम बारिश माना जाता है। मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि मानसून के दौरान एल नीनो बनने की संभावना है। आमतौर पर एल नीनो की स्थिति में बारिश कमजोर होती है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण खर्च पर दबाव आता है।
मौसम को लेकर चिंता के बावजूद फिलहाल ट्रैक्टर बिक्री मजबूत बनी हुई है। JM Financial के अनुसार अप्रैल 2026 में ट्रैक्टर उद्योग की बिक्री सालाना आधार पर करीब 21 प्रतिशत बढ़ी। महिंद्रा एंड महिंद्रा की घरेलू ट्रैक्टर बिक्री लगभग 46,400 यूनिट रही, जो पिछले साल से 20 प्रतिशत ज्यादा है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा की घरेलू बिक्री करीब 10,400 यूनिट रही, जिसमें 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। ब्रोकरेज कंपनियों का कहना है कि अच्छे जलाशय स्तर, GST कटौती के बाद ग्रामीण इलाकों में बढ़ी नकदी और किसानों के मजबूत भरोसे ने मांग को सहारा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि एल नीनो की वजह से ट्रैक्टर बिक्री की रफ्तार कम हो सकती है, लेकिन इससे पूरी मांग खत्म होने की संभावना नहीं है। SMC Global Securities के रिसर्च हेड सौरभ जैन ने कहा कि इतिहास बताता है कि सिर्फ एक कमजोर मानसून ट्रैक्टर बाजार को पूरी तरह नहीं तोड़ता। आमतौर पर लगातार दो खराब मानसून या 85 प्रतिशत से कम बारिश की स्थिति में ही बड़ी गिरावट देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान फिलहाल चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसे ट्रैक्टर मांग खत्म करने वाला बड़ा खतरा नहीं माना जा सकता। मई के आखिर में आने वाला IMD का अगला मानसून अनुमान बाजार के लिए अहम रहेगा।
Choice Institutional Equities के विश्लेषकों का कहना है कि FY26 में ट्रैक्टर उद्योग ने करीब 22 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ देखी, लेकिन आने वाले वर्षों में यह रफ्तार कम हो सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक FY26 से FY28 के बीच ट्रैक्टर उद्योग की वृद्धि दर केवल 1 से 5 प्रतिशत CAGR रह सकती है। FY26 में ट्रैक्टर उद्योग में पहले ही करीब 22 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में अगले कुछ वर्षों में उसी रफ्तार से ग्रोथ बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही मौसम को लेकर अनिश्चितता भी मांग पर असर डाल सकती है। हालांकि, रिप्लेसमेंट डिमांड सेक्टर को सहारा देती रहेगी। FY09 से FY14 के बीच बिके ट्रैक्टर अब बदलने के दौर में पहुंच रहे हैं। फिलहाल कुल ट्रैक्टर बिक्री में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा रिप्लेसमेंट डिमांड का है।
विश्लेषकों का कहना है कि ग्रामीण परिवारों की कुल आय में खेती का हिस्सा अब केवल एक-तिहाई रह गया है। बाकी आय मजदूरी, छोटे कारोबार और सरकारी-निजी नौकरियों से आती है। इसलिए कमजोर मानसून का असर ग्रामीण खपत पर पहले जितना गंभीर नहीं हो सकता।
विश्लेषकों के अनुसार कुछ ट्रैक्टर कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन अभी भी काफी ऊंची है और उनमें एल नीनो से जुड़ा पूरा जोखिम शामिल नहीं दिखता। उनका कहना है कि अगर एल नीनो का असर बढ़ा और किसानों की आय में तेज गिरावट आई, तो इन शेयरों में दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, गांवों में ट्रैक्टरों का बढ़ता इस्तेमाल और पुराने ट्रैक्टरों को बदलने की लगातार बनी मांग सेक्टर को बड़ी गिरावट से बचा सकती है।
विश्लेषकों की पहली पसंद अभी भी महिंद्रा एंड महिंद्रा बनी हुई है। इसकी वजह कंपनी का मजबूत और विविध कारोबार है। सौरभ जैन के मुताबिक M&M का ट्रैक्टर बाजार में मजबूत हिस्सा है। इसके अलावा SUV, EV और एक्सपोर्ट कारोबार कंपनी को ग्रामीण कमजोरी से काफी हद तक बचाव देता है। Choice Institutional Equities ने भी M&M को सेक्टर में अपनी टॉप पसंद बताया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)