मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज़ में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज) रजत राजगढ़िया
पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के बीच शेयर बाजार के निवेशकों के लिए मार्च भूलने लायक रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज़ में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज) रजत राजगढ़िया ने ईमेल इंटरव्यू में पुनीत वाधवा को बताया कि निवेशकों को ऐसे समय में इक्विटी में निवेश करना चाहिए। संपादित अंश…
एक परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर इक्विटी से मिलने वाला रिटर्न हाल के समय में बहुत अच्छा नहीं रहा है। तो फिर किसी को इस परिसंपत्ति वर्ग में क्यों बने रहना चाहिए?
एक परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर इक्विटी समय के साथ रिटर्न देती है। यह हर साल एक जैसा रिटर्न नहीं देती, लेकिन अगर आप इसे लंबे समय तक इसे अपने पास रखते हैं तो यह मज़बूत रिटर्न जरूर देती है। अगर कोई निवेशक आज के समय में इक्विटी पोर्टफोलियो बनाता है तो अनुकूल कीमतों के माहौल की वजह से एक समय बाद रिटर्न और भी बेहतर हो जाता है। ऐतिहासिक रूप से इस तरह के समय में इक्विटी में निवेश करने पर हमेशा मजबूत रिटर्न मिला है।
क्या आपको लगता है कि भारतीय बाजार वापसी करने से पहले धीरे-धीरे मंदी के दौर में जा सकते हैं?
पिछले कुछ महीनों में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस गिरावट के पीछे के कई कारण वैश्विक हैं। हाल की गिरावट से पहले भी हमारे बाजार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण इनमें और गिरावट आई है। पहले भी, जब भी बाजार ऐसे कारणों से गिरे हैं तो जैसे ही वे कारण खत्म हुए हैं, बाज़ार ने तेजी से वापसी की है। हम कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। भाव भी उचित हैं। ऐसे समय में, निवेशकों को इक्विटी में निवेश पर विचार करना चाहिए।
अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों मसलन इक्विटी, कमोडिटी, डेट और रियल एस्टेट में से अगले 12 महीने के नजरिये से भारतीय निवेशकों के लिए मुनाफा देने वाला अगला वर्ग कौन सा हो सकता है?
डेट से मिलने वाला रिटर्न स्थिर और अनुमानित होता है। लेकिन यह उस रिटर्न की बराबरी नहीं कर पाता जो इक्विटी लंबे समय में देती है। कमोडिटीज, खासकर सोने और चांदी ने पिछले 18 महीनों में बहुत शानदार रिटर्न दिया है और उनके इस प्रदर्शन को दोहराने की संभावना कम है। आज हम जिस स्तर पर खड़े हैं, वहां से इक्विटी ही पसंदीदा परिसंपत्ति वर्ग होनी चाहिए। जैसे-जैसे कमाई में बढ़ोतरी होगी और वैश्विक घटनाएं शांत होंगी, भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का अच्छा निवेश आने की उम्मीद है, साथ ही घरेलू निवेश भी जारी रहेगा। इससे प्रदर्शन को और भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
क्या निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप को प्राथमिकता देनी चाहिए?
भारतीय बाजारों में समय और कीमत दोनों में सुधार देखने को मिला है। 2025 में जिन सेक्टर/शेयर का मूल्यांकन बहुत ज्यादा था, उनमें भी अब तेज गिरावट आई है। जैसे-जैसे भारत की प्रगति की कहानी आगे बढ़ रही है, हमें उन सेक्टर या कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जहां वृद्धि की संभावनाएं ज्यादा हैं। बिजनेस में कई बदलाव हो रहे हैं और हर सेक्टर में मुनाफा हो रहा है। जरूरी यह है कि हम वृद्धि वाले सेक्टरों में अग्रणी कंपनियों के साथ बने रहें। कई मिडकैप शेयर शुरुआती निवेश का अच्छा मौका मुहैया करा रहे हैं, जहां ऐसे बिजनेस आकार ले रहे हैं जो अगले पांच साल तक दो अंकों में मजबूत वृद्धि बनाए रख सकते हैं।
2026 की बाकी अवधि के लिए भारत समेत उभरते बाजारों में एफआईआई निवेश को लेकर क्या नज़रिया है?
2026 में अब तक एफआईआई निवेश बहुत ज्यादा नकारात्मक रहा है। पिछले कुछ सालों से भारत में निवेश का हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है। तुरंत तो इसमें कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है, क्योंकि वैश्विक चिंताओं ने उभरते बाजारों के शेयरों पर और ज्यादा दबाव डाल दिया है। पश्चिम एशिया में इस युद्ध से पहले मुख्य चिंता धीमी वृद्धि और ऊंचा मूल्यांकन थी, जो धीरे-धीरे कम हो रही हैं। हालांकि हमारा मानना है कि मध्यम से लंबी अवधि में जैसे-जैसे बाज़ार बढ़ेगा, कमाई में सुधार होगा और कई नए अवसर सामने आएंगे तो हमें एफआईआई का भरपूर निवेश देखने को मिलेगा। प्राइमरी मार्केट भी आवंटन का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। अग्रणी कारोबारी कंपनियों के आगामी आईपीओ से और अधिक पूंजी आकर्षित होने की उम्मीद है।
क्या आपने भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बीच वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनियों की आय में बढ़ोतरी के अनुमानों को कम करना शुरू कर दिया है?
हालांकि वैश्विक कमोडिटीज में उतार-चढ़ाव रहा है। लेकिन इस युद्ध को अभी सिर्फ तीन हफ्ते ही हुए हैं। वृद्धि से जुड़े अनुमानों को बदलना अभी थोड़ा जल्दबाजी हो सकती है। अगर ये रुझान एक महीने या उससे ज्यादा रहते हैं तो आर्थिक अनुमानों में गिरावट आएगी, जिससे कंपनियों की आय में बढ़ोतरी भी कम हो जाएगी। हालांकि, हमारा आय प्रोफाइल काफी विविध है और घरेलू बाजार पर निर्भर है। तेल और उससे जुड़े उत्पादों को छोड़कर हमें बाजारों की आज की आशंकाओं की तुलना में थोड़ी ज्यादा मजबूती दिखनी चाहिए।
आप किन सेक्टर पर ओवरवेट और अंडरवेट हैं?
हम वित्त सेक्टर मसलन बैंक, एनबीएफसी और कैपिटल मार्केट को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। क्रेडिट ग्रोथ में सुधार हो रहा है और लेनदारों को उच्च गुणवत्ता वाले क्रेडिट माहौल में अच्छे से आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इससे इस सेक्टर की दोबारा रेटिंग को बढ़ावा मिलेगा। कैपिटल मार्केट से जुड़े निवेश, बड़ी बचत का फायदा उठाने के लिए कई सालों तक चलने वाली थीम हैं।
जीएसटी की दरों में कटौती और ज्यादा खपत के कारण ऑटो सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करेगा। खपत की कुछ खास श्रेणियों को ज्यादा पसंद किया जाएगा, जैसे होटल, क्विक कॉमर्स और एयरलाइंस आदि। हमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पसंद है क्योंकि इसमें अवसर और वृद्धि की दर अभी भी बहुत ऊंची बनी हुई है। एग्जिक्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम एक और ऐसा क्षेत्र है, जहां हालिया सुधार के बाद शेयर आकर्षक नजर आ रहे हैं।
हमारी कम निवेश वाली अहम श्रेणियां अभी भी रोजमर्रा की जरूरत की चीज़ें (स्टेपल्स) हैं क्योंकि इनमें वृद्धि बहुत कम है और बड़ी आईटी कंपनियां भी इसी श्रेणी में हैं क्योंकि इस सेक्टर की वृद्धि दर लगातार धीमी पड़ रही हैं। खास नजर रखे जाने वाले कुछ अन्य सेक्टर में सीमेंट शामिल है।