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वैश्विक तनाव के बीच भी मजबूत खाद सेक्टर! इन दो कंपनियों पर BUY की सलाह

गैस महंगी और सप्लाई जोखिम के बावजूद सरकारी सब्सिडी से खाद कंपनियों के मुनाफे सुरक्षित, खरीफ सीजन में मजबूत मांग की उम्मीद

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- March 23, 2026 | 9:58 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव ने वैश्विक कमोडिटी बाजारों में हलचल तेज कर दी है। इसका असर अब भारत के खाद सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। यूरिया और अमोनिया जैसी अहम खादों की कीमतों में तेजी आई है, गैस महंगी हुई है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में चिंता स्वाभाविक है, लेकिन एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की ताजा रिपोर्ट संकेत देती है कि यह दबाव फिलहाल सीमित है और सेक्टर की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

गैस की कीमतों में उछाल, सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी बोझ

रिपोर्ट के मुताबिक यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस सबसे अहम कच्चा माल है। ऐसे में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ता है। आयातित यूरिया भी महंगा हो रहा है, जिससे सरकार को किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए ज्यादा सब्सिडी देनी पड़ सकती है। अनुमान है कि गैस की कीमत में हर 1 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की बढ़ोतरी सरकार के सब्सिडी बिल में करीब 4,500 से 5,000 करोड़ रुपये का इजाफा कर सकती है। यानी युद्ध का असर केवल कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी वित्त पर भी दबाव बढ़ा रहा है।

गैर-यूरिया खाद में फिलहाल स्थिरता, लेकिन जोखिम बरकरार

जहां यूरिया और अमोनिया की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं गैर-यूरिया खाद, खासकर फॉस्फेट आधारित उर्वरकों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि इनके प्रमुख कच्चे माल जैसे रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड की सप्लाई अफ्रीका और चीन से होती है, जहां फिलहाल कोई बड़ी बाधा नहीं है। हालांकि अमोनिया और सल्फर जैसे अन्य कच्चे माल पर जोखिम बना हुआ है, क्योंकि इनकी सप्लाई का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में इनकी कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।

पश्चिम एशिया पर निर्भरता से बढ़ा जोखिम, लेकिन विकल्प मौजूद

भारत की खाद इंडस्ट्री अमोनिया की लगभग 70 प्रतिशत और सल्फर की करीब 90 प्रतिशत जरूरत पश्चिम एशिया से पूरी करती है। ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं या सप्लाई बाधित होती है, तो कच्चे माल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां पूरी तरह असहाय नहीं हैं। वे रूस और चीन जैसे देशों से वैकल्पिक सप्लाई की व्यवस्था कर सकती हैं। इससे लागत जरूर बढ़ सकती है, लेकिन उत्पादन पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका कम है।

निकट अवधि में उत्पादन पर असर की संभावना कम

एंटीक ब्रोकिंग का मानना है कि फिलहाल उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, अगले दो महीने ऑफ-सीजन माने जाते हैं, जब मांग अपेक्षाकृत कम होती है। दूसरा, कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में करीब 71 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है, जो पिछले साल के 60 दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि भले ही सप्लाई में थोड़ी बाधा आए, तब भी तुरंत उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।

सरकार दे सकती है राहत, NBS सब्सिडी बढ़ने की उम्मीद

अगर कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये में कमजोरी जारी रहती है, तो सरकार न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी यानी NBS दरों में बढ़ोतरी कर सकती है। रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया था। उस समय सरकार ने सब्सिडी दरों में बड़ी बढ़ोतरी कर कंपनियों को राहत दी थी। इस बार भी वैसा ही कदम उठाया जा सकता है, जिससे कंपनियों के मार्जिन सुरक्षित रहेंगे और उनके मुनाफे पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

महंगे आयात से घरेलू कंपनियों को मिलेगा फायदा

रिपोर्ट के अनुसार हालिया कीमतों में तेजी के कारण आयात महंगा हो सकता है, जिससे कंपनियां आयात कम कर सकती हैं। साथ ही बाजार में मौजूद चैनल इन्वेंट्री तेजी से खत्म हो सकती है। फरवरी 2026 तक गैर-यूरिया खाद का स्टॉक लगभग 8.9 मिलियन टन रहा, जो सालाना आधार पर 37 प्रतिशत ज्यादा है। अब कीमतें बढ़ने के बाद यह स्टॉक तेजी से बिक सकता है। इससे घरेलू उत्पादकों की मांग बढ़ेगी और उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।

खरीफ सीजन में दिखेगा मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ

आने वाले खरीफ सीजन को लेकर भी रिपोर्ट काफी पॉजिटिव है। कम आयात और घटती इन्वेंट्री के चलते घरेलू स्तर पर उत्पादित खाद की मांग में तेजी आने की उम्मीद है। इससे कंपनियों की बिक्री और वॉल्यूम ग्रोथ मजबूत रह सकती है। यानी निकट अवधि के दबाव के बावजूद आगे की तस्वीर बेहतर दिखाई दे रही है।

फॉस्फेट कंपनियों पर खास नजर, निवेश का मौका

एंटीक ब्रोकिंग ने पूरे खाद सेक्टर, खासकर फॉस्फेट आधारित कंपनियों के प्रति मजबूत रुख बनाए रखा है। रिपोर्ट का मानना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने के बावजूद सरकार की सब्सिडी से मार्जिन सुरक्षित रहेंगे। साथ ही हालिया बाजार गिरावट के बाद इन शेयरों में निवेश के अच्छे मौके बने हैं। ब्रोकिंग हाउस ने कोरामंडल इंटरनेशनल और परादीप फॉस्फेट्स जैसे शेयरों पर खरीद की सलाह दी है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : March 23, 2026 | 9:32 AM IST