बाजार

पेट्रोल-डीजल 12 रुपये तक महंगा हो सकता है? रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही आगे चलकर पश्चिम एशिया में हालात सुधर जाएं, फिर भी कच्चे तेल की कीमतें जल्दी 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं गिरेंगी

Published by
पुनीत वाधवा   
Last Updated- April 24, 2026 | 8:04 AM IST

Petrol-Diesel prices: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि सरकार ने फिलहाल कीमतें न बढ़ाने की बात कही है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो राज्य चुनाव के बाद कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह बढ़ोतरी कितनी होगी और इसका असर बाजार और आम लोगों पर कितना पड़ेगा।

बाजार कितनी बढ़ोतरी के लिए तैयार है?

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार पहले से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 5 से 6 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी को ध्यान में रख चुका है। यानी अगर इतनी बढ़ोतरी होती है, तो इससे बाजार में ज्यादा घबराहट नहीं होगी। लेकिन अगर कीमतों में अचानक 10 से 12 रुपये या उससे ज्यादा की बढ़ोतरी होती है, तो इससे बाजार की धारणा कमजोर हो सकती है और निवेशकों का भरोसा भी डगमगा सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है, भले ही कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हों। सरकार की प्राथमिकता अभी आम लोगों को राहत देना है, खासकर चुनावी माहौल में, इसलिए फिलहाल कीमतों को स्थिर रखा गया है।

Petrol-Diesel prices: विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?

कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट के मनोज बाहेती का मानना है कि बड़ी कीमत बढ़ोतरी की संभावना कम है। उनका कहना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट जल्दी खत्म हो जाता है, तो कीमत बढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं, इक्विनॉमिक्स रिसर्च के जी चोक्कालिंगम का कहना है कि अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती भी है, तो उसे एक साथ लागू नहीं किया जाएगा, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। उनके अनुसार 3 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी बाजार के लिए सहज मानी जा रही है।

दूसरा नजरिया: क्या बड़ी बढ़ोतरी जरूरी है?

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि अब यह बहस नहीं रह गई है कि कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, बल्कि यह है कि कब और कितनी बढ़ेंगी। उनके अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की जरूरत बनती है। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि राजनीतिक कारणों के चलते इतनी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है और सरकार सीमित बढ़ोतरी का रास्ता ही अपनाएगी।

कच्चे तेल की कीमतों का आगे क्या रुख रहेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही आगे चलकर पश्चिम एशिया में हालात सुधर जाएं, फिर भी कच्चे तेल की कीमतें जल्दी 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं गिरेंगी। इसका कारण यह है कि बाजार में तेल का स्टॉक कम है और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें बनी हुई हैं। ऐसे में निकट भविष्य में कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं।

Petrol-Diesel prices: तेल कंपनियों की हालत क्यों खराब है?

मार्च 2026 के दौरान तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पेट्रोल पर उन्हें करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 50 रुपये प्रति लीटर का घाटा हुआ। फिलहाल भी स्थिति पूरी तरह सुधरी नहीं है और कंपनियां पेट्रोल पर 6 से 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। इससे उनकी कमाई पर काफी दबाव बना हुआ है।

सरकार ने टैक्स में कुछ कटौती करके राहत देने की कोशिश की है, साथ ही डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर ज्यादा टैक्स लगाकर घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दी है। इसके बावजूद कंपनियों का नुकसान पूरी तरह कवर नहीं हो पा रहा है। ऐसे में चुनाव के बाद सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी कि वह आम लोगों पर बोझ कम रखते हुए कंपनियों के नुकसान को कैसे संतुलित करे।

First Published : April 24, 2026 | 7:55 AM IST