तेल सेक्टर में सरकार के हालिया फैसलों ने बाजार की दिशा बदल दी है। एक तरफ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMC को कुछ राहत मिली है, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज की कमाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में इन फैसलों के असर को विस्तार से समझाया गया है।
27 मार्च 2026 को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की। इससे OMC कंपनियों का दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर अंडर-रिकवरी अभी भी 20 से 30 रुपये प्रति लीटर के दायरे में बनी हुई है। यानी कंपनियां अब भी ईंधन बेचने पर नुकसान झेल रही हैं।
सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर टैक्स भी लगाया है। इससे HPCL, BPCL और IOCL को करीब 4 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। साथ ही अगर वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की गुंजाइश भी बताई गई है।
जहां OMC को थोड़ी राहत मिली है, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए मामला थोड़ा मुश्किल हो सकता है। एक्सपोर्ट पर लगे टैक्स का असर कंपनी की कमाई पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे कंपनी की रिफाइनिंग कमाई में करीब 2 डॉलर प्रति बैरल की कमी आ सकती है।
ऊपर से देखने पर लग सकता है कि रिफाइनिंग बिजनेस बहुत अच्छा चल रहा है, क्योंकि GRM के आंकड़े काफी मजबूत दिख रहे हैं। लेकिन असल में कमाई उतनी ज्यादा नहीं है जितनी दिख रही है। वजह ये है कि रिफाइनरी में कुछ ईंधन का नुकसान होता है, जहाज से तेल लाने का खर्च बढ़ गया है और कच्चा तेल भी महंगा मिल रहा है। इन सबका असर मिलाकर कंपनी की असली कमाई कम हो जाती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि LPG की कमी के चलते रिलायंस को प्रोपेन का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ा है, जिससे मुनाफा थोड़ा दब सकता है। वहीं जियो-बीपी बिजनेस में भी कंपनी ने अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं, जबकि कच्चा तेल महंगा हो गया है। इससे भी कमाई पर असर पड़ सकता है।
मोतीलाल ओसवाल ने HPCL पर खरीदारी की सलाह दी है, जबकि BPCL और IOCL पर न्यूट्रल रुख रखा है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज पर ब्रोकरेज ने खरीदारी की सलाह बरकरार रखते हुए 1750 रुपये का टारगेट दिया है। कुल मिलाकर, सरकार के कदम से OMC कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। वहीं रिलायंस के लिए भी हालात पूरी तरह आसान नहीं हैं और आने वाले समय में कमाई पर नजर रखना जरूरी होगा।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)