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HDFC Bank के शेयर दो दिन में 4 फीसदी फिसले, विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली से बढ़ा दबाव

मंगलवार की गिरावट के साथ एचडीएफसी बैंक का शेयर लगभग 10 महीनों में पहली बार अपने दीर्घकालिक 200-दिन के मूविंग एवरेज (200 डीएमए) 965 रुपये से नीचे आ गया है

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निकिता वशिष्ठ   
रेक्स कैनो   
Last Updated- January 06, 2026 | 9:45 PM IST

पिछले दो दिनों से एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई भारी गिरावट का असर शेयर बाजार पर दिख रहा है। मंगलवार को एचडीएफसी बैंक के शेयर में 1.6 फीसदी की गिरावट आई। इससे बीएसई पर दो दिन में कुल गिरावट 3.9 फीसदी पर पहुंच गई। 23 अक्टूबर, 2025 के अपने उच्चतम स्तर 1,020 रुपये से शेयर 5.7 फीसदी नीचे आया है। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स में पिछले दो दिन में 0.8 फीसदी की नरमी आई है।

मंगलवार की गिरावट के साथ एचडीएफसी बैंक का शेयर लगभग 10 महीनों में पहली बार अपने दीर्घकालिक 200-दिन के मूविंग एवरेज (200 डीएमए) 965 रुपये से नीचे आ गया है यानी 11 मार्च, 2025 के बाद यह निचला स्तर है। सामान्यतः, 200 डीएमए को एक महत्त्वपूर्ण दीर्घकालिक संकेतक माना जाता है, जिसके ऊपर कारोबार करने वाले शेयरों में तेजी  का संकेत मिलता है और नीचे कारोबार करने पर गिरावट का।  

गिरावट की वजह

विश्लेषकों का मानना ​​है कि तीसरी तिमाही के कारोबार संबंधी अपडेट के बाद मूल रूप से विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली और घरेलू निवेशकों की घबराहट में बिकवाली बैंक के शेयर पर दबाव डाल रही है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी निदेशक क्रांति बाथिनी ने कहा, एचडीएफसी बैंक के तीसरी तिमाही के कारोबारी अपडेट के बाद निवेशकों ने इसके शेयर में बिकवाली की है। हालांकि, मेरे विचार से आंकड़े चिंताजनक नहीं हैं। एचडीएफसी जैसी दिग्गज कंपनी के लिए ऋण और जमा में वृद्धि अच्छी रही है। शेयर पर दबाव विदेशी पोर्टफोलियो और संस्थागत निवेशकों (एफआईआई /एफपीआई) की भारी बिकवाली से है, जिनकी बैंक में अच्छी खासी हिस्सेदारी है। 

देश के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता के ऋण में अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही) के दौरान सालाना आधार पर 11.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 28.44 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं, एचडीएफसी बैंक के जमा आधार में तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 11.5 फीसदी की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 28.59 लाख करोड़ रुपये हो गई।

इसके परिणामस्वरूप, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के अंत में बैंक का ऋण-जमा (सीडी) अनुपात बढ़कर 98.5 फीसदी पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में यह 98 फीसदी और पहली तिमाही में 95 फीसदी था। उच्च सीडी अनुपात आमतौर पर बैंक की ऋण देने की क्षमता सीमित करता है, जिससे उसकी वृद्धि बाधित होती है। यह चिंता ऐसे समय सामने आई है जब प्रबंधन का लक्ष्य अगले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2027) तक प्रणाली की ऋण वृद्धि से आगे निकलना है।

हालांकि, बाथिनी ने कहा कि एचडीएफसी बैंक के लिए 99 फीसदी का सीडीआर चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा, निवेशकों को घबराहट में एचडीएफसी बैंक का शेयर बेचने से बचना चाहिए क्योंकि बैंक की बैलेंस शीट मजबूत है। इसके अलावा, हम क्रेडिट में बढ़त के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। एचडीएफसी जैसे बैंक अंततः मौद्रिक नीति में नरमी से लाभ उठाएंगे।

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने भी कहा कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सीडीआर में भारी उछाल आई है, जिससे यह आंकड़ा सर्वकालिक उच्च स्तर करीब 81 फीसदी पर पहुंच गया है। मैक्वेरी ने कहा कि अगर ऋण वृद्धि को प्राथमिकता दी जाती है तो सीडीआर की सीमित आकांक्षाओं को पीछे छोड़ना होगा।

निवेश रणनीति

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज में खुदरा शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का सुझाव है कि निवेशक गिरावट आने पर धीरे-धीरे इस स्टॉक को खरीद सकते हैं। जब तक एफपीआई/एफआईआई भारतीय इक्विटी में शुद्ध बिकवाल बने रहेंगे, तब तक यह ऋणदाता बाजार के मुकाबले खराब प्रदर्शन करता रहेगा।

एफपीआई ने जनवरी 2026 में 6,224 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। कैलेंडर वर्ष 2025 में उन्होंने रिकॉर्ड 1.7 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। सितंबर तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही) के अंत में एचडीएफसी बैंक में उनकी हिस्सेदारी करीब 48.37 फीसदी थी।

बाथिनी की सलाह है कि तीसरी तिमाही के शानदार कारोबारी अपडेट को देखते हुए निवेशकों को शेयर को अपने पास रखना चाहिए या गिरावट पर इसे खरीदना चाहिए। तकनीकी चार्ट के अनुसार शेयर अपने 20 डीएमए, 50 डीएमए और 100 डीएमए से नीचे गिर गया है, जो क्रमशः 990 रुपये, 994 रुपये और 983 रुपये पर है।

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक आकाश शाह ने कहा, 20, 50 और 100 डीएमए 985 रुपये– 990 रुपये के दायरे में केंद्रित हैं और एक मजबूत ऊपरी प्रतिरोध के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो उच्च स्तरों पर आपूर्ति का संकेत है।

जब तक शेयर 980 रुपये– 990 रुपये से नीचे कारोबार करता है, तकनीकी दृष्टिकोण सतर्कतापूर्ण रहेगा और समग्र संरचना में सुधार के लिए इस प्रतिरोध क्षेत्र से ऊपर लगातार बढ़त आवश्यक होगी। शाह ने चेतावनी दी कि 950 रुपये से नीचे आने पर शेयर 930–920 रुपये के स्तर तक फिसल सकता है।

First Published : January 6, 2026 | 9:45 PM IST