पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारतीय कंपनियों की कमाई पर भी पड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। हालात ऐसे हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनियों की कमाई के अनुमान में अब तक करीब 3 फीसदी की कटौती हो चुकी है।
बर्नस्टीन के प्रबंध निदेशक वेणुगोपाल गारे और निखिल अरेला का कहना है कि इस समय सबसे बड़ा सवाल कच्चे तेल की कीमतों का है। उनके मुताबिक अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और तेल 90 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे आता है, तो कंपनियों को राहत मिल सकती है। इससे बाजार का माहौल सुधरेगा, सरकार पर दबाव कम होगा और कंपनियां अपने निवेश की योजनाएं भी आसानी से आगे बढ़ा सकेंगी। लेकिन अगर तेल लंबे समय तक महंगा बना रहा, तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे सरकार के खर्च और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर आखिरकार कंपनियों की कमाई पर भी पड़ेगा।
वेणुगोपाल गारे और निखिल अरेला का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो शेयर बाजार में राहत के साथ तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि उनका कहना है कि यह तेजी ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी क्योंकि अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेत अभी बहुत मजबूत नहीं हैं और बाजार में नए शेयरों की सप्लाई भी बढ़ सकती है।
बर्नस्टीन के मुताबिक उनके कवरेज वाले NSE200 शेयरों की कमाई FY27 में करीब 10 फीसदी बढ़ सकती है। यह पिछले दो साल की 14 फीसदी सालाना औसत वृद्धि से काफी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटो, आईटी, यूटिलिटी, बिल्डिंग मटेरियल और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर में अभी भी अच्छी कमाई की उम्मीद लगाई जा रही है। ऐसे में अगर आने वाले समय में इन सेक्टरों के आय अनुमान और घटते हैं तो इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक हेल्थकेयर और रियल एस्टेट ऐसे सेक्टर हैं जहां कमाई में अच्छी तेजी आने की उम्मीद है। खासकर हेल्थकेयर सेक्टर को फायदा मिल सकता है क्योंकि पिछले साल इस सेक्टर की कमाई की रफ्तार काफी कमजोर रही थी।
वेणुगोपाल गारे और निखिल अरेला ने कहा, “रिजल्ट सीजन शुरू होने के बाद से NSE200 कंपनियों के FY27 कमाई अनुमान करीब 3 फीसदी घट चुके हैं। यह चिंता की बात है क्योंकि पिछली दो तिमाहियों में अनुमान लगभग स्थिर थे। ज्यादातर सेक्टरों में कटौती हुई है और सिर्फ मेटल, आईटी और टेलीकॉम सेक्टर ही बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं।”
बर्नस्टीन ने महंगाई और कमजोर मांग की आशंका को देखते हुए एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर पर अपना नजरिया कमजोर किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि ऑटो सेक्टर में मांग शायद अपने हाई पर पहुंच चुकी है।
वहीं बैंकों और वित्तीय कंपनियों को लेकर उसने संतुलित रुख अपनाया है। दूसरी तरफ रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर भरोसा बरकरार रखा गया है।
बर्नस्टीन अब हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल सेक्टर को लेकर पहले से ज्यादा सकारात्मक है। ब्रोकरेज का कहना है कि हेल्थकेयर कंपनियों को अमेरिका में कीमतों के दबाव में कमी, टैरिफ से जुड़ी चिंताओं में राहत और कमजोर रुपये का फायदा मिल सकता है।
वहीं इंडस्ट्रियल कंपनियों को AI और डेटा सेंटर से जुड़ी बढ़ती मांग का लाभ मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया, “ऊर्जा क्षेत्र में हमने समग्र तौर पर ‘इक्वल वेट’ रुख अपनाया है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को ‘ओवरवेट’ किया है। हमें लगता है कि कच्चे तेल से जुड़ा सबसे बड़ा झटका अब पीछे छूट चुका है और हाल में बढ़ी ईंधन कीमतें कंपनियों को सहारा देंगी। आईटी सेक्टर पर हमारा ‘ओवरवेट’ नजरिया बरकरार है।”
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)