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हॉर्मुज पूरी तरह बंद हुआ तो रोजाना लाखों बैरल तेल सप्लाई अटकेगी, भारत पर भी पड़ेगा असर

ऐसे हालात में मार्च 2026 के हिसाब से करीब 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल की अतिरिक्त कमी हो सकती है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- April 14, 2026 | 11:55 AM IST

Strait of Hormuz Blockade: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। अगर अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद कर देता है, तो इसका सीधा असर दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर पड़ेगा। नोमुरा की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे हालात में मार्च 2026 के हिसाब से करीब 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल की अतिरिक्त कमी हो सकती है। वहीं अगर इसकी तुलना मार्च 2025 से की जाए, तो यह कमी करीब 9.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकती है, जो सालाना आधार पर करीब 57 प्रतिशत की गिरावट को दिखाता है।

तेल सप्लाई पर क्यों है इतना असर (मिलियन बैरल में)

देश मार्च 2025 मार्च 2026 हॉर्मुज बंद होने पर क्या हो रहा है
सऊदी अरब 5.9 4.4 5.0 दूसरा रास्ता होने से थोड़ी रिकवरी
यूएई 3.0 2.1 1.5 सप्लाई और घटेगी
इराक 3.3 0.6 0.6 कोई बदलाव नहीं, पहले से कम
ईरान 1.9 1.9 अनिश्चित स्थिति
कुवैत 1.5 0.3 सप्लाई रुक सकती है
कतर 0.8 0.2 सप्लाई रुक सकती है
कुल 16.3 9.4 7.1 कुल सप्लाई घटेगी

दरअसल, हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। सऊदी अरब, यूएई, इराक, ईरान, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते के जरिए अपना तेल दुनिया तक पहुंचाते हैं। मार्च 2025 में इन देशों से कुल मिलाकर करीब 16.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल की सप्लाई हुई थी। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई का अचानक रुकना वैश्विक बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

नोमुरा के विश्लेषक बिनीत बांका के अनुसार, अगर अमेरिका पूरी तरह से इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि भारत की एलपीजी सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में भारत के लिए कम से कम आठ एलपीजी टैंकर इसी रास्ते से सुरक्षित होकर गुजरे हैं। ऐसे में अगर यह रास्ता बंद होता है, तो गैस सप्लाई में भी रुकावट आ सकती है।

अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतें

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं, लेकिन हाल ही में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत की उम्मीद बढ़ने पर कीमतें थोड़ी नरम हुईं और 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। इसके बावजूद पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 6.5 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है और यह करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।

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Strait of Hormuz Blockade: आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें

नोमुरा का मानना है कि अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में “वॉर रिस्क प्रीमियम” और बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि बाजार में डर और अनिश्चितता के कारण कीमतें सामान्य से ज्यादा ऊपर जा सकती हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज को पूरी तरह ब्लॉक करने की धमकी के बाद यह खतरा और बढ़ गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर सप्लाई में बड़ी कमी आती है, तो देशों के पास मौजूद रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार यानी एसपीआर भी लंबे समय तक स्थिति को संभाल नहीं पाएंगे। जैसे-जैसे संघर्ष लंबा चलेगा, इन भंडारों की उपयोगिता कम होती जाएगी और इसका असर सीधे बढ़ती कीमतों के रूप में दिखेगा।

किस देश को कितना फायदा या नुकसान

गल्फ देशों की तेल से कमाई (अरब डॉलर में)

देश मार्च 2025 मार्च 2026 सालाना बदलाव
सऊदी अरब 13.0 13.5 +4%
यूएई 6.8 6.6 -3%
इराक 7.3 1.7 -77%
ईरान 4.2 5.7 +36%
कुवैत 3.3 0.9 -73%
कतर 1.7 0.6 -65%
कुल 36.3 29.0 -20%

तेल की कीमतों में हालिया तेजी का असर अलग-अलग देशों पर अलग तरह से पड़ा है। सऊदी अरब की बात करें तो वहां तेल निर्यात में कमी के बावजूद उसकी कुल आय में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि कीमतें बढ़ी हैं। सऊदी अरब ने अपने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए, जो हॉर्मुज को बायपास करके रेड सी तक जाता है, करीब 7 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता हासिल कर ली है। अगर इसमें से करीब 2 मिलियन बैरल घरेलू रिफाइनरियों में इस्तेमाल होता है, तो भी आने वाले समय में वह करीब 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल निर्यात कर सकता है, जो मार्च 2026 के 4.4 मिलियन बैरल से ज्यादा है।

यूएई ने भी इस संकट के दौरान अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है और उसकी तेल आय में सिर्फ करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई है। दूसरी तरफ, ईरान इस पूरे संकट का सबसे बड़ा फायदा उठाने वाला देश बना है। उसकी तेल आय मार्च 2026 में सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 5.7 अरब डॉलर पहुंच गई है।

हालांकि, अगर अमेरिका हॉर्मुज को पूरी तरह बंद करता है, तो ईरान की स्थिति भी बदल सकती है। फिलहाल रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास करीब 140 मिलियन बैरल तेल का स्टॉक समुद्र में मौजूद है, जिसे वह कुछ समय तक इस्तेमाल कर सकता है।

सबसे ज्यादा नुकसान इराक को हुआ है। उसकी तेल आय में भारी गिरावट आई है और यह 77 प्रतिशत गिरकर 1.7 अरब डॉलर रह गई है, जबकि मार्च 2025 में यह 7.3 अरब डॉलर थी। यह दिखाता है कि कैसे सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उतार-चढ़ाव अलग-अलग देशों को अलग तरह से प्रभावित कर रहा है।

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Strait of Hormuz Blockade: दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो यह सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक स्तर पर कमोडिटी, करेंसी, शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट पर भी असर पड़ेगा। देवेरे ग्रुप के सीईओ निगेल ग्रीन का कहना है कि अगर इतनी बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई सिस्टम से बाहर हो जाती है, तो कीमतों में मामूली नहीं बल्कि बड़ा और स्थायी उछाल आ सकता है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल या उससे ज्यादा तक जा सकता है।

इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा और कई देशों के लिए आर्थिक चुनौती बढ़ जाएगी। जहां तेल कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को फायदा हो सकता है, वहीं तेल आयात पर निर्भर देशों और सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का नतीजा तय करेगा कि यह संकट और गहराएगा या कुछ राहत मिलेगी।

First Published : April 14, 2026 | 11:26 AM IST