प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वैश्विक बाजार पूंजीकरण के मामले में भारत सातवें स्थान पर खिसक गया है। दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ दिया है और यह बदलाव ताइवान के आगे निकलने के ठीक एक सप्ताह बाद हुआ है। इन दोनों एशियाई चिप निर्माण देशों के बाजारों के मूल्य में आई तेजी ने भारत को उस चौथे स्थान से नीचे धकेल दिया है, जिसे उसने 2024 में हासिल किया था।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार ताइवान और दक्षिण कोरिया में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 5 लाख कोड़ डॉलर से थोड़ा ज्यादा है, जबकि भारत का बाजार पूंजीकरण 4.84 लाख करोड़ डॉलर है।
तुलनात्मक रूप से भारत का कमजोर प्रदर्शन न केवल एआई आपूर्ति श्रृंखला में उसकी सीमित भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि घरेलू वृहद आर्थिक चुनौतियों भी दिखाता है। इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर होता रुपया, कमाई में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी शामिल है।
मॉर्गन स्टेनली के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य इक्विटी रणनीतिकार (भारत) रिधम देसाई ने कहा, ‘अभी वैश्विक विकास को जो चीज आगे बढ़ा रही है, वह है एआई के बल पर भारी निवेश का चक्र, खास तौर पर डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, मेमरी चिप, ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण के क्षेत्र में। भारत अभी तक इस एआई आपूर्ति श्रृंखला में पूरी तरह से शामिल नहीं हुआ है, जिसका मतलब है कि वह विकास की इस गति में उतना भागीदार नहीं है।’
लाइटहाउस कैंटन के प्रबंध निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी (भारत) अभय लाइजावाला ने कहा, ‘उभरते देशों में सेमीकंडक्टर पर ताइवान और कोरिया का दबदबा है। भारत के पास इनमें से कुछ भी नहीं है। इसलिए इंटरनेट बूम के बाद आए सबसे बड़े बदलाव के इस दौर में भारत की कोई खास भूमिका नहीं है। निफ्टी 50 सूचकांक के नजरिये से देखने पर भारत का इक्विटी बाजार भी इसी कमी को दिखाता है।’