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विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत देने की तैयारी, सरकारी बॉन्ड पर टैक्स खत्म कर सकती है सरकार

विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत! सरकारी बॉन्ड पर टैक्स खत्म कर सकती है सरकार

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एजेंसियां   
Last Updated- June 04, 2026 | 8:42 AM IST

सरकार विदेशी निवेशकों को बड़ी टैक्स राहत देने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को अब कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिल सकती है। सरकार का मानना है कि इससे देश में विदेशी निवेश बढ़ेगा और रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार आयकर नियमों में बदलाव कर अध्यादेश के जरिए इस फैसले को लागू कर सकती है।

अभी कितना टैक्स देना पड़ता है?

फिलहाल विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए शेयरों और बॉन्ड पर होने वाले मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। यानी अगर किसी विदेशी निवेशक ने सरकारी बॉन्ड खरीदकर मुनाफा कमाया, तो उस कमाई पर टैक्स देना होता है। सरकार अब इसी टैक्स को हटाने पर विचार कर रही है।

ब्याज पर लगने वाला टैक्स भी हट सकता है

सिर्फ कैपिटल गेन टैक्स ही नहीं, बल्कि सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर लगने वाला 20 प्रतिशत विदहोल्डिंग टैक्स भी खत्म किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड और ज्यादा आकर्षक बन जाएंगे।

बॉन्ड में पैसा आ रहा, शेयर बाजार से निकल रहा

इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश जारी रखा है। अब तक करीब 1.4 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश सरकारी कर्ज बाजार में आया है। वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं। इस साल अब तक करीब 28 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी है।

रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश

हाल के महीनों में रुपये पर दबाव बढ़ा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से सरकार पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उपाय तलाश रही है। माना जा रहा है कि टैक्स में राहत मिलने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और सरकारी बॉन्ड बाजार में ज्यादा पैसा आएगा।

हालांकि इस रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। वित्त मंत्रालय की तरफ से भी अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published : June 4, 2026 | 8:42 AM IST