भारतीय आईटी सेक्टर पिछले कुछ समय से दबाव में है। दुनिया भर में आर्थिक सुस्ती, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, पश्चिम एशिया तनाव और AI की वजह से बदलती टेक्नोलॉजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से पिछले कुछ महीनों में कई आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट भी देखने को मिली।
लेकिन अब तिमाही नतीजों के बाद तस्वीर थोड़ी अलग नजर आ रही है। कंपनियों के नतीजों से संकेत मिला है कि कारोबार पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। कमाई की रफ्तार भले बहुत तेज नहीं हो, लेकिन कंपनियां अब भी स्थिर प्रदर्शन कर रही हैं। बड़े सौदे मिल रहे हैं, मार्जिन संभला हुआ है और AI से जुड़े नए मौके भी सामने आने लगे हैं। नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय आईटी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे ज्यादातर अनुमान के मुताबिक रहे। बड़ी कंपनियों में कमाई और मार्जिन स्थिर रहे, जबकि मिडकैप आईटी कंपनियों ने एक बार फिर बड़े प्लेयस् से बेहतर प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों को अभी भी AI, क्लाउड, डेटा, ऑटोमेशन और लागत कम करने वाले प्रोजेक्ट्स से लगातार काम मिल रहा है। दुनिया भर की कंपनियां खर्च कम करने और काम को ज्यादा तेज और स्मार्ट बनाने पर फोकस कर रही हैं। ऐसे में भारतीय आईटी कंपनियों को ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स का फायदा मिल रहा है।
कई बड़ी और मध्यम आकार की कंपनियों को नए सौदे भी मिले हैं। हालांकि ग्राहक अब फैसले लेने में पहले से ज्यादा समय ले रहे हैं। यानी डील्स पाइपलाइन मजबूत है, लेकिन प्रोजेक्ट्स शुरू होने में देरी हो रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI की वजह से कंपनियों की उत्पादकता बढ़ी है, जिसका फायदा मार्जिन पर भी दिख रहा है। यही वजह है कि सेक्टर में मुनाफे का दबाव अभी बहुत ज्यादा नहीं दिखा।
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नुवामा के मुताबिक Tier-1 यानी बड़ी आईटी कंपनियों ने अगले वित्त वर्ष के लिए बहुत मजबूत अनुमान नहीं दिए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। कंपनियों को डर है कि कमजोर वैश्विक मांग, टैरिफ, AI से जुड़ा बदलाव और पश्चिम एशिया युद्ध आने वाले समय में कारोबार की रफ्तार पर असर डाल सकते हैं।
हालांकि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ा कारोबार अभी भी मजबूत बना हुआ है। कुछ कंपनियों ने छुट्टियों और कम कामकाजी दिनों का असर जरूर बताया, लेकिन कुल मिलाकर BFSI सेक्टर से मांग ठीक रही। रिटेल सेक्टर में भी स्थिरता बनी रही, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अब भी दबाव देखने को मिला। टैरिफ और सप्लाई चेन से जुड़ी अनिश्चितता की वजह से कंपनियां नए खर्च को लेकर सतर्क बनी हुई हैं। दूसरी तरफ हेल्थकेयर सेक्टर में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक मिडकैप आईटी कंपनियां लगातार बड़ी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इन कंपनियों ने न सिर्फ बेहतर ग्रोथ दिखाई है, बल्कि अगले वित्त वर्ष के लिए भी ज्यादा मजबूत अनुमान दिए हैं। जानकारों का कहना है कि मिडकैप कंपनियां नई टेक्नोलॉजी और AI से जुड़े बदलावों को तेजी से अपनाने में सफल रही हैं। इसके अलावा इन कंपनियों का फोकस कुछ खास सेक्टर्स और स्पेशलाइज्ड सेवाओं पर ज्यादा है, जिससे इन्हें फायदा मिल रहा है।
पिछले कुछ महीनों में बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि क्या AI भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार छीन लेगा? नुवामा की रिपोर्ट का कहना है कि फिलहाल बाजार में AI को लेकर जरूरत से ज्यादा डर बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती समय में AI की वजह से कुछ पुराने कारोबार पर असर जरूर पड़ सकता है। कई काम अब पहले से कम लोगों में और तेजी से हो पा रहे हैं। लेकिन लंबी अवधि में AI भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बड़ा मौका बन सकता है।
कंपनियों को अब भी ऐसे टेक्नोलॉजी पार्टनर की जरूरत होगी जो AI टूल्स को उनकी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने में मदद करें। यानी सिर्फ AI टूल बना देना काफी नहीं है, उसे कंपनी के सिस्टम और कामकाज के हिसाब से ढालना भी जरूरी होगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में AI की वजह से आईटी सेवाओं का कुल बाजार और बड़ा हो सकता है।
हाल की गिरावट के बाद कई आईटी शेयर अब आकर्षक स्तर पर पहुंच गए हैं। नुवामा का कहना है कि बाजार फिलहाल सेक्टर को लेकर जरूरत से ज्यादा निराश नजर आ रहा है। रिपोर्ट में 2016-17 के टेक्नोलॉजी दौर का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि उस समय भी इसी तरह की चिंता थी, लेकिन बाद में सेक्टर ने मजबूत वापसी की थी। फिलहाल आने वाले महीनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन अगर AI से जुड़े खर्च और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग बढ़ती रही, तो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए फिर से मजबूत ग्रोथ का दौर शुरू हो सकता है।