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Rupee at New low: डॉलर के मुकाबले रुपया 96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, तेल कीमतों ने बढ़ाया दबाव

Rupee at New low: शुक्रवार को रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया था और अंत में 95.81 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 18, 2026 | 11:36 AM IST

Indian Rupee at New low:  भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में Indian Rupee कमजोर शुरुआत के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.25 तक गिर गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और मजबूत डॉलर भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

फॉरेक्स कारोबारियों ने कहा कि महंगे कच्चे तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और जारी भू-राजनीतिक तनाव ने उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए मुश्किल हालात पैदा कर दिए हैं और रुपया अब इसका असर साफ तौर पर दिखा रहा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 96.19 प्रति डॉलर पर खुला और फिर गिरकर 96.25 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर के मुकाबले 44 पैसे की गिरावट है। शुक्रवार को रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया था और अंत में 95.81 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने कहा कि फिलहाल कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और मजबूत डॉलर रुपये के लिए सबसे बड़े जोखिम बने हुए हैं। हालांकि बाजार के लिए सकारात्मक बात यह है कि सरकार और आरबीआई दोनों ने हालात और बिगड़ने से पहले ही सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से डॉलर/रुपये के लिए 94.80-95.10 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है, जबकि 96.00-96.50 का स्तर निकट भविष्य में मजबूत रेजिस्टेंस जोन बना रहेगा।

छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला डॉलर इंडेक्स ईरान तनाव के कारण 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.32 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.83 प्रतिशत बढ़कर 111.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

तेल की कीमतें बढ़ा रहीं दबाव

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि तेल की कीमतें 111.50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने से रुपये पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि महंगे तेल से डॉलर आउटफ्लो बढ़ता है। इसके साथ ही एफपीआई निकासी का दबाव पहले से बना हुआ है।

इस बीच, सोने-चांदी पर हाई इम्पोर्ट ड्यूटी लगाने के कुछ ही दिनों बाद सरकार ने शनिवार को चांदी के आयात पर भी सख्ती करते हुए इसे लाइसेंस व्यवस्था के तहत ला दिया। सरकार ने 13 मई को सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। 3 प्रतिशत आईजीएसटी सहित प्रभावी शुल्क अब 18 प्रतिशत से अधिक हो गया है। यह कदम गैर-जरूरी आयात घटाकर विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

₹100 तक जा सकता है Indian Rupee

भंसाली ने कहा कि अगर युद्ध नहीं रुकता और होर्मुज स्ट्रेट दोबारा नहीं खुलता, तो डॉलर-रुपया जोड़ी पर दबाव कम नहीं होगा। अगर आरबीआई डॉलर प्रवाह बढ़ाने के लिए कोई नई योजना नहीं लाता, तो डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के स्तर तक भी पहुंच सकता है। एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में शुद्ध खरीदार रहे और शुक्रवार को उन्होंने 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि 8 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.295 अरब डॉलर बढ़कर 696.988 अरब डॉलर हो गया। इससे पिछले सप्ताह कुल भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया था।

एजेंसी इनपुट के साथ

First Published : May 18, 2026 | 11:36 AM IST