देश का Banking Sector इस समय जबरदस्त रफ्तार में नजर आ रहा है। कर्ज देने की गति तेज हो चुकी है और 15 मार्च 2026 तक क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 13.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह साफ संकेत है कि अर्थव्यवस्था में मांग मजबूत हो रही है। जीएसटी में कटौती के बाद खपत बढ़ी है और इसी ने बैंकों के लोन ग्रोथ को नई ताकत दी है। आरबीआई के सपोर्ट और सिस्टम में मौजूद पर्याप्त नकदी के कारण बैंक अभी भी खुलकर कर्ज देने की स्थिति में हैं।
लेकिन इस चमक के पीछे एक चिंता भी छिपी है। जहां कर्ज तेजी से बढ़ रहा है, वहीं डिपॉजिट की रफ्तार 10.8 प्रतिशत पर ठहरी हुई है। इसका असर साफ दिख रहा है, क्योंकि बैंकों का सीडी रेशियो बढ़कर 83 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बैंक ज्यादा कर्ज दे रहे हैं, लेकिन उनके पास उतनी तेजी से जमा नहीं आ रहा। सस्ते डिपॉजिट जुटाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसी वजह से फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें नीचे आने के संकेत नहीं दे रही हैं।
दिसंबर 2025 में रेपो रेट कटौती का असर अब धीरे धीरे सामने आ रहा है, लेकिन बैंकों की फंडिंग लागत अभी भी ऊंची बनी हुई है। इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ रहा है। बड़े निजी बैंकों के मार्जिन स्थिर रहने या थोड़ा घटने की उम्मीद है। वहीं मिड साइज बैंक इस माहौल में बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं और उनके मार्जिन बढ़ सकते हैं। सरकारी बैंकों के लिए तस्वीर ज्यादा स्थिर है, जहां बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
बैंकिंग सिस्टम की एसेट क्वालिटी अभी तक संभली हुई है, लेकिन खतरे के संकेत साफ दिखने लगे हैं। खासकर एमएसएमई सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है। युद्ध के कारण लागत बढ़ रही है और नकदी का फ्लो प्रभावित हो रहा है। निर्यात से जुड़े छोटे कारोबार अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। यही वजह है कि बैंक इस सेक्टर को कर्ज देने में अब ज्यादा सतर्क हो रहे हैं।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर की कमाई आने वाले सालों में मजबूत रह सकती है। 2026 से 2028 के बीच मुनाफा करीब 16 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ने का अनुमान है। निजी बैंक इस रफ्तार को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रह सकते हैं, जबकि सरकारी बैंकों की ग्रोथ थोड़ी धीमी रहने की संभावना है।
चौथी तिमाही में निजी बैंकों का मुनाफा करीब 11.9 प्रतिशत बढ़ सकता है। दूसरी तरफ सरकारी बैंकों का मुनाफा सालाना आधार पर हल्का बढ़ेगा, लेकिन तिमाही आधार पर दबाव में रह सकता है। छोटे फाइनेंस बैंक इस दौर में सरप्राइज दे सकते हैं, जहां मुनाफा और मार्जिन दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।
फिनटेक और कार्ड कंपनियों की तस्वीर मिली जुली है। एसबीआई कार्ड्स का मुनाफा बढ़ सकता है, लेकिन मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। वहीं पेटीएम की आय ज्यादा नहीं बढ़ेगी, लेकिन उसका मुनाफा स्थिर रहने की उम्मीद है।
पूरी तस्वीर एक दिलचस्प कहानी बयां कर रही है। बैंकिंग सेक्टर मजबूत दिख रहा है, कर्ज की मांग तेज है, लेकिन अंदर ही अंदर दबाव भी बढ़ रहा है। डिपॉजिट की चुनौती, बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता यह बता रही है कि यह रफ्तार कब तक कायम रहेगी, इस पर अभी सवाल बाकी है। आने वाले महीनों में असली तस्वीर सामने आएगी।