भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपनी डिफेंस ताकत को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देगा। डिफेंस खरीद काउंसिल के ताजा फैसले में करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के विशाल डिफेंस प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिसने पूरे डिफेंस सेक्टर में नई ऊर्जा भर दी है। इस फैसले को सिर्फ एक खरीद नहीं, बल्कि भारत की सैन्य रणनीति को मजबूत करने की बड़ी दिशा के तौर पर देखा जा रहा है।
इस मंजूरी के तहत सेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड की क्षमताओं को कई स्तर पर मजबूत किया जाएगा। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक तोपें, नए ट्रांसपोर्ट विमान और हाईटेक निगरानी सिस्टम शामिल हैं। खास बात यह है कि जहां एक तरफ कुछ उपकरण विदेशों से खरीदे जाएंगे, वहीं दूसरी तरफ सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि अधिक से अधिक उत्पादन देश के भीतर ही हो। इससे घरेलू डिफेंस कंपनियों के लिए बड़ा बाजार तैयार हो रहा है।
अगर मंजूर किए गए प्रस्तावों को देखें तो रूस के एस 400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त यूनिट्स खरीदने की योजना है, जो भारत की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करेगी। इसके अलावा 155 मिमी धनुष तोपों की खरीद से जमीनी युद्ध क्षमता में इजाफा होगा। वायुसेना के लिए करीब 60 नए परिवहन विमान खरीदने की तैयारी है, जो पुराने एएन 32 और आईएल 76 विमानों की जगह लेंगे। ये विमान सेना की रणनीतिक और सामरिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे और आपात स्थितियों में तेजी से सैनिक और उपकरण पहुंचाने में मदद करेंगे।
सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, टैंक रोधी गोला-बारूद, आधुनिक संचार प्रणाली और एडवांस निगरानी सिस्टम को मंजूरी दी गई है, इससे जमीन पर सेना की ताकत और तैयारी दोनों मजबूत होंगी। वायुसेना को ऐसे ड्रोन मिलेंगे जो दूर से हमला कर सकते हैं, साथ ही सु 30 लड़ाकू विमानों के इंजन को सुधारा जाएगा, जिससे ये विमान ज्यादा समय तक और बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे। कोस्ट गार्ड को तेज रफ्तार वाले खास वाहन मिलेंगे जो पानी और जमीन दोनों पर चल सकते हैं। इनकी मदद से समुद्र में गश्त, निगरानी और बचाव अभियान ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगे।
इस पूरे फैसले का एक बड़ा संदेश यह भी है कि भारत अब डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि कुछ महत्वपूर्ण सिस्टम अभी भी आयात करने पड़ते हैं, लेकिन सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि घरेलू कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा काम मिले। इससे न सिर्फ रोजगार और तकनीक का विकास होगा, बल्कि भविष्य में आयात पर निर्भरता भी कम होगी। हालांकि शॉर्ट टर्म में कुछ कंपनियों को विदेशी पुर्जों की उपलब्धता को लेकर चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव उन्हें और मजबूत बना सकता है।
डिफेंस कंपनियों के लिहाज से यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। पहले से मजबूत ऑर्डर बुक रखने वाली कंपनियों के लिए अब नए अवसर खुलेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय कंपनियों की पकड़ मजबूत होने की संभावना है। इसी वजह से ब्रोकरेज हाउस इस सेक्टर को लेकर मजबूत बने हुए हैं और इसे लंबी अवधि का मजबूत निवेश विकल्प मान रहे हैं।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत इलेक्ट्रॉनिक्स इस पूरे सेक्टर में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर रही है। कंपनी को नौसेना के बड़े युद्धपोत प्रोग्राम से भारी ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, जिसकी कुल लागत करीब 40,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें से कंपनी को 12,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये तक का काम मिल सकता है। इसके अलावा क्यूआरएसएएम मिसाइल सिस्टम का बड़ा ऑर्डर भी आने की संभावना है, जिससे कंपनी की आय में और तेजी आ सकती है।
ब्रोकरेज ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स पर खरीद की सलाह बरकरार रखते हुए इसका टारगेट प्राइस 520 रुपये रखा है। मौजूदा भाव 406.20 रुपये के हिसाब से इसमें करीब 28% का संभावित रिटर्न दिखता है।
एचएएल के लिए भी खरीद की सलाह दी गई है और इसका टारगेट प्राइस 5500 रुपये तय किया गया है। मौजूदा भाव 3564.95 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 54% की बढ़त की संभावना है।
भारत डायनेमिक्स पर खरीद की राय के साथ 1800 रुपये का टारगेट प्राइस दिया गया है। मौजूदा भाव 1115.65 रुपये के आधार पर इसमें करीब 61% का अपसाइड बनता है।
Astra Microwave के लिए 1150 रुपये का टारगेट प्राइस रखा गया है। मौजूदा भाव 887 रुपये के हिसाब से इसमें करीब 30% का बहुत बड़ा संभावित रिटर्न नजर आता है।
वहीं जेन टेक्नोलॉजीज पर फिलहाल न्यूट्रल रुख अपनाया गया है और इसका टारगेट प्राइस 1400 रुपये बताया गया है। मौजूदा भाव 1306.20 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 7% का ही सीमित अपसाइड दिखता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)