देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने बैंकरों से कंपनी का आंरभिक सार्वजनिक निर्गम लाने के लिए आईपीओ विवरणिका (डीआरएचपी) दाखिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा है। एनएसई ने नियामक के पास आईपीओ दस्तावेज जमा कराने की समय सीमा 15 जून तक तय की है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी।
अगर कंपनी द्वारा निर्धारित समय सीमा का पालन किया जाता है तो 2026 के आखिर में एनएसई के बड़े आईपीओ लाने का रास्ता साफ हो सकता है। डीआरएचपी जमा करने के बाद एनएसई को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से अंतिम टिप्पणियों का इंतजार रहेगा, जिसमें आम तौर पर दो से तीन महीने का समय लगता है।
एक सूत्र ने बताया कि जून के अंत से पहले डीआरएचपी दाखिल करने से एक्सचेंज फाइलिंग में मदद मिलेगी क्योंकि यह जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के वित्तीय आंकड़ों पर आधारित होगी। एक्सचेंज ने इन आंकड़ों की घोषणा मंगलवार को की है।
आईपीओ को लेकर ताजा घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर एनएसई ने कहा, ‘सेबी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर बोर्ड ने 6 फरवरी, 2026 को बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये कंपनी के आईपीओ को मंजूरी दे दी है और अभी इस बारे में और कुछ बताने के लिए नहीं है।’
आईपीओ मसौदा दायर करने से पहले एक्सचेंज ने 25 मई को असाधारण आम बैठक बुलाई है ताकि अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में संशोधनों के लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जा सके। आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन कंपनी का मुख्य कानूनी दस्तावेज होता है जिसमें कंपनी के आंतरिक प्रबंधन, संचालन, नियमों और विनियमों का विवरण होता है।
यह कंपनी के दैनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए निदेशकों और शेयरधारकों के अधिकारों, जिम्मेदारियों और शक्तियों को परिभाषित करता है। एक्सचेंज नियमन संबंधित पुरानी समस्याओं को सुलझाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। इसमें सेबी द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय सलाहकार समिति की सिफारिश के अनुसार कोलोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामलों में 1,800 करोड़ रुपये से अधिक का निपटारा भी शामिल है।
यह आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस होगा और एनएसई कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी। इसमें मौजूदा निवेशक मांग के आधार पर अपनी 5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचेंगे। टेमासेक, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और क्रिसकैपिटल जैसे शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं।
एनएसई 4 लाख करोड़ से 6 लाख करोड़ रुपये के दायरे में मूल्यांकन की उम्मीद कर रही जिससे यह भारत की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में से एक बन सकती है। एक्सचेंज ने आईपीओ का जिम्मा संभालने के लिए करीब 20 मर्चेंट बैंकर और 8 कानूनी फर्मों को नियुक्त किया है।
इसके अलावा एक्सचेंज ने हाल ही में कुछ नियुक्तियों के साथ अपने बोर्ड को और मजबूत किया है। इनमें राजीव वासुदेव को जनहित निदेशक और दिनेश पंत को एलआईसी की ओर से नामित निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया है। साथ ही कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति के लिए एक्सचेंज नियामक की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
एनएसई ने सबसे पहले 2016 में आईपीओ का मसौदा जमा कराया था लेकिन कोलोकेशन मामले में नियामकीय जांच की वजह से यह प्रक्रिया रुक गई थी।