आईपीओ

ओपनएआई, एन्थ्रोपिक और स्पेसएक्स IPO की चर्चा तेज, भारतीय निवेशकों में भारी उत्साह लेकिन पहुंच सीमित

उद्योग से जुड़े लोगों ने आगाह किया है कि इन निर्गमों तक पहुंच उतनी आसान नहीं होगी जितना कि किसी घरेलू कंपनियों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए आवेदन करना होता है

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खुशबू तिवारी   
समी मोडक   
Last Updated- June 04, 2026 | 10:44 PM IST

दिग्गज कंपनियों ओपनएआई, एन्थ्रोपिक और स्पेसएक्स की संभावित लिस्टिंग में भारतीय निवेशकों की भी खूब दिलचस्पी दिख रही है। ये निवेशक तेजी से बढ़ते आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र में निवेश करने के इच्छुक हैं और कई प्लेटफॉर्मों को अपने ग्राहकों से इन कंपनियों के निर्गम को खरीदने की आवेदन प्रक्रिया के बारे में पूछताछ मिल रही है। हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों ने आगाह किया है कि इन निर्गमों तक पहुंच उतनी आसान नहीं होगी जितना कि किसी घरेलू कंपनियों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए आवेदन करना होता है।

एआई क्षेत्र की ये तीनों कंपनियां दुनिया की सबसे मूल्यवान प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में से हैं। ऐसे में उम्मीद है कि जब ये कंपनियां शेयर बाजार में उतरेंगी तो उनका कुल बाजार पूंजीकरण 4 लाख करोड़ डॉलर से भी अधिक हो सकता है। इन संभावित लिस्टिंग की अमीरों, फैमिली ऑफिस और दुनिया भर के उन खुदरा निवेशकों के बीच खूब चर्चा है जो एआई ट्रेड के अगले चरण में हिस्सा लेना चाहते हैं।

भारत में खुदरा निवेशक आईपीओ के तहत अपने लिए आरक्षित कोटे के शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं मगर अमेरिका के बड़े आईपीओ तक पहुंच मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों और निवेश बैंकों के चुनिंदा ग्राहकों तक ही सीमित होती है।

एप्री​​शिएट के संस्थापक और सीईओ शुभ मौलिक ने कहा, ‘इसमें कोई रिटेल लॉटरी नहीं है, न ही आवंटन की गारंटी है और न ही आईपीओ बुक में एंट्री के लिए कोई भारतीय ब्रोकरेज का रास्ता है।’ उन्होंने कहा भारतीय निवेशक लिस्टिंग के बाद सेकंडरी मार्केट में दांव लगाते हैं, जब शेयर की कीमत बढ़ चुकी होती है और पहले दिन की तेजी के पीछे भागना सही रणनीति नहीं है।’

निवेशकों में यह उत्साह वैश्विक स्तर पर निवेश थीम के तौर पर एआई के दबदबे को दिखाता है। ओपनएआई और एन्थ्रोपिक, जनरेटिव एआई इकोसिस्टम के केंद्र में हैं जबकि ईलॉन मस्क के नेतृत्व वाली स्पेसएक्स वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग में निवेश का मौका देती है।

ओटो मनी के सह-संस्थापक और सीईओ अपूर्व गुप्ता ने कहा, ‘ज्यादातर वैल्यू आईपीओ से पहले ही प्राइवेट तौर पर हासिल कर ली जाती है और लिस्टिंग का समय तब तय किया जाता है जब कंपनी का प्रदर्शन सबसे अच्छा होता है।’ उन्होंने कहा कि निवेशकों को सावधान रहना चाहिए और अगर वे निवेश करना चाहते हैं तो उन्हें ऐसे अलग-अलग तरीकों से निवेश करना चाहिए जो उनके जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से हों।

गुप्ता के अनुसार एआई के अवसर ओपनएआई और एन्थ्रोपिक जैसे मॉडल डेवलपर से कहीं आगे तक फैले हुए हैं। एआई मूल्य श्रृंखला में ऐप्लिकेशन, फ्रंटियर मॉडल और इन्फ्रास्ट्रक्चर लेयर शामिल हैं, जिसमें डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर विनिर्माता आते हैं।

ओटो मनी के सह-संस्थापक और सीईओ अपूर्व गुप्ता ने कहा, ‘नैसडैक 100 रिकॉर्ड ऊंचाई पर है क्योंकि सबसे पक्का धन हार्डवेयर में ही आता है।’ गुप्ता ने एनवीडिया और माइक्रोन जैसी कंपनियों का जिक्र किया जो एआई पर होने वाले खर्च के दौर से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कंपनियों के तौर पर उभरी हैं। इसके अलावा एशिया की चिप विनिर्माता कंपनियां एसके हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए निवेश का मुख्य जरिया उदार धनप्रेषण योजना है जिसके तहत भारत में रहने वाले लोग तय सीमा के अंदर विदेश में निवेश कर सकते हैं। कई फिनटेक प्लेटफॉर्म और ब्रोकरेज कंपनियां गिफ्टी सिटी और उदार धनप्रेषण योजना से जुड़े तरीकों के माध्यम से अमेरिका में सूचीबद्ध शेयरों और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में निवेश करने की सुविधा देती हैं।

कुछ निवेशक ऐसे फंड पर भी विचार कर रहे हैं, जिनकी पहले से ही प्राइवेट टेक्नॉलजी कंपनियों में हिस्सेदारी है। मौलिक ने क्रेनशेयर्स एजीआईएक्स ईटीएफ और आर्क वेंचर फंड जैसे माध्यमों की ओर इशारा किया, जिनकी एन्थ्रोपिक, ओपनएआई और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक लोकप्रिय एमएससीआई ईएम सूचकांक पर आधारित ईटीएफ में भी निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। इस सूचकांक में ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, हाइनिक्स और सैमसंग का हिस्सा लगभग एक-तिहाई है और 700 अरब डॉलर से ज्यादा की परिसंपत्ति का प्रबंधन करने वाले पैसिव फंडों द्वारा इस सूचकांक पर नजर रखी जाती है। हालांकि बाजार के जानकारों का कहना है कि आईपीओ से पहले हिस्सेदारी पाने की कोशिश करने के बजाय सूचीबद्धता के बाद खरीदारी करना ज्यादा व्यावहारिक रणनीति साबित हो सकती है।

कुछ परिसंपत्ति प्रबंधक इस पर भी सवाल उठाते हैं कि क्या आने वाली लिस्टिंग ऐसे समय पर हो सकती हैं जब एआई से जुड़े मूल्यांकन पहले से ही काफी ज्यादा हैं। एक जाने-माने परिसंपत्ति प्रबंधक ने कहा, ‘अभी अमेरिकी बाजार में आम राय यह है कि इनमें से कई बड़ी कंपनियां बहुत ज्यादा मूल्यांकन पर सूचीबद्ध हो सकती हैं।’ उन्होंने कहा कि सूचीबद्धता के कुछ तिमाही बाद असलियत सामने आ सकती है और तब निवेशकों को इन शेयरों को लंबे समय के नजरिये से खरीदने के बारे में सोचना चाहिए।

अमेरिका के बड़े आईपीओ के प्रति आकर्षण कोई नई बात नहीं है। बीते समय में फेसबुक, उबर, एयरबीएनबी और स्नोफ्लेक की सूचीबद्धता ने भारतीय निवेशकों के बीच काफी दिलचस्पी जगाई थी मगर उनकी भागीदारी लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदने तक ही सीमित रही।

First Published : June 4, 2026 | 10:43 PM IST