सिंगापुर की सरकारी स्वामित्व वाली निवेशक कंपनी टेमासेक और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड उन 20 निवेशकों में शामिल हैं, जो इस साल नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
भारत के सबसे बड़े एक्सचेंज की यह शेयर बिक्री 2.75 अरब डॉलर की होगी। यह अनुमान एनएसई के कुल मूल्यांकन 55 अरब डॉलर पर आधारित है, जिसका आकलन एक ऐसे प्लेटफॉर्म ने किया है, जहां इसके असूचीबद्ध शेयरों का कारोबार होता है। यह इस साल भारत में शेयरों की दो बड़ी बिक्री में से एक होगी। इसके साथ ही अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू भी आएगा। एनएसई 2016 से सूचीबद्ध होने की कोशिश कर रहा है जबकि उसका मुख्य घरेलू प्रतिद्वंद्वी बीएसई लिमिटेड 2017 में सूचीबद्ध हो गया था।
सूत्रों ने बताया कि बेचने वालों में भारत की सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम, देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक और घरेलू प्राइवेट इक्विटी फंड क्रिसकैपिटल भी शामिल होंगे। नाम न बताने की शर्त पर सूत्रों ने जानकारी दी कि कुल मिलाकर एनएसई के मौजूदा शेयरधारक आईपीओ में अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे।
रॉयटर्स के सवालों के जवाब में एनएसई ने कहा कि उसके बोर्ड ने ऑफर फॉर सेल के जरिये शेयर बेचने के लिए आईपीओ को मंजूरी दे दी है। लेकिन फिलहाल इससे आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एलआईसी, एसबीआई और क्रिसकैपिटल ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। टेमासेक और सीपीपीआईबी ने टिप्पणी से मना कर दिया।
एनएसई दुनिया का सबसे सक्रिय इक्विटी डेरिवेटिव ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है। इस साल बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ कानूनी विवाद के कारण लंबी देरी हुई और अब इसे सूचीबद्धता के लिए मंजूरी मिल गई है। कानूनी विवाद निपटाने के लिए मौद्रिक समझौते की संभावना है, जिससे सार्वजनिक पेशकश का रास्ता खुल जाएगा।
1,77,807 शेयरधारकों के साथ एनएसई निवेशकों की संख्या के मामले में भारत की सबसे बड़ी असूचीबद्ध कंपनी है। इससे यह पेशकश प्रक्रिया और जटिल हो गई है। एलआईसी, एसबीआई, टेमासेक होल्डिंग्स, मॉर्गन स्टैनली और सीपीपीआईबी इसके संस्थागत शेयरधारक हैं।
सूत्रों ने बताया कि सोमवार बिक्री के लिए अभिरुचि पत्र जमा जमा कराने की अंतिम तारीख थी, जिसे मर्चेंट बैंकर्स ने आईपीओ प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर मांगा था। अब एनएसई अपने वित्तीय परिणाम घोषित होने के बाद अगले महीने तक सेबी के पास विवरणिका मसौदा जमा कराना होगा।
एनएसई का 31 दिसंबर को समाप्त तीसरी तिमाही में कर पश्चात मुनाफा 15 फीसदी बढ़कर 24.08 अरब रुपये पर पहुंच गया, जिसे डेरिवेटिव ट्रेडिंग में सुधार से बढ़ावा मिला। परिचालन से उसका एकीकृत राजस्व पिछली तिमाही की तुलना में लगभग 7 फीसदी बढ़ा।