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जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड के अनुसार दुनिया भर के शेयर बाजारों में पश्चिम एशिया के युद्ध का असर अभी पूरी तरह से नहीं दिखा है। उन्होंने निवेशकों को भेजे अपने साप्ताहिक नोट ‘ग्रीड ऐंड फियर’ में लिखा है, ‘ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले को अब करीब दो सप्ताह हो चुके हैं और ‘ग्रीड ऐंड फियर’ हैरान है कि बाजारों में अभी तक बहुत व्यापक नुकसान देखने को नहीं मिला है। शेयरों में ज्यादा भारी बिकवाली न होने की वजह बाजारों की लगातार यह सोच है कि डॉनल्ड ट्रंप किसी भी समय एक और ‘पलटी’ मार सकते हैं।’
उन्होंने कहा है, ‘यह युद्ध तभी जल्दी खत्म होगा, जब ट्रंप कोई ‘पलटी’ मार लें और तब भी यह सवाल बना रहेगा कि ईरान और इजरायल का रुख क्या होगा। मुख्य फायदा पाने वालों की बात करें तो रूस उनमें से एक जरूर होगा, खासकर तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए और इस बात को देखते हुए कि अब भारत के लिए रूस से दोबारा तेल खरीदना कोई समस्या नहीं रह गई है। फायदे में रहने वाला दूसरा देश स्पष्ट तौर पर चीन है।’
पिछले चार दशकों में बाजारों ने छह बड़े भू-राजनीतिक तनाव देखे हैं, जिनके दौरान सूचकांक में औसतन चार सप्ताह की अवधि में लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट आई।
28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और निफ्टी 50 सूचकांक अब तक लगभग 8 प्रतिशत नीचे गिर गया है। विभिन्न सेक्टरों की बात करें तो एनएसई पर ऑटो, बैंक (सरकारी और निजी दोनों), रियल एस्टेट और कंजम्पशन इंडेक्स सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले सेक्टर रहे हैं।
मुख्य स्तर
होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया भर में तेल और गैस के परिवहन की जीवनरेखा माना जाता है। अभी यह बंद है। इस कारण पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है और इसी वजह से बाजार धराशायी हो रहे हैं।
मार्च की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं, लेकिन अब उनमें कुछ गिरावट आई है और वे 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी हाल के निचले स्तरों से 14 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोकालिंगम ने कहा, ‘हाल के घटनाओं को देखते हुए शेयरों में और गिरावट की आशंका है और कम समय में 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत की और गिरावट हो सकती है। जो निवेशक ज्यादा जोखिम नहीं उठा सकते, वे अपनी इक्विटी परिसंपत्तियों का कुछ हिस्सा बेचकर नकदी रख सकते हैं। लेकिन जो लोग जोखिम उठा सकते हैं, उनके लिए यह मध्यम से लंबी अवधि तक निवेश रखने का समय है, न कि घबराकर बेचने का।’
टेक्निकल विश्लेषणों के अनुसार गिरावट की स्थिति में निफ्टी को 23,100 पर समर्थन मिलेगा। इसके नीचे फिसलने पर सूचकांक 22,800 की ओर जा सकता है, जिसके बाद 22,400 तक भी गिर सकता है, जो मौजूदा स्तरों से 3.25 फीसदी की गिरावट है।