प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
बर्नस्टीन के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया की लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय उद्योग जगत की कमाई पर ज्यादा पड़ने की आशंका है। हाल में जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि कमाई के अनुमानों में कटौती का सिलसिला फिर शुरू हो गया है और वित्त वर्ष 2027 के अनुमानों में अभी तक लगभग 3 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है।
ब्रोकरेज के अनुसार सबसे अहम कारक कच्चा तेल है। ब्रोकरेज ने कहा कि अमेरिकी-ईरान युद्ध में कमी आने और कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे जाने से कमाई पर दबाव काफी कम हो जाएगा। इससे बाजारों और राजकोषीय गणित दोनों को सहारा मिलेगा और पूंजीगत खर्च की योजनाएं भी बनी रहेंगी।
इसके विपरीत कच्चे तेल की कीमतें अगर लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो राजकोषीय और चालू खाता दोनों को ही जोखिम होगा और इसका असर आगे चलकर कमाई में बढ़ोतरी पर भी पड़ेगा। बर्नस्टीन ने कहा कि कोई भू-राजनीतिक झटका नहीं भी लगे तो भी कमाई से जुड़े जोखिम गिरावट वाले ही हैं।
बर्नस्टीन के प्रबंध निदेशक वेणुगोपाल गैरे ने निखिल अरेला के साथ मिलकर लिखे नोट में कहा, ‘हम निफ्टी के लिए अपना साल के आखिर का लक्ष्य 26,000 (मौजूदा स्तर से करीब 11 फीसदी ऊपर) पर कायम रख रहे हैं और अपना तटस्थ रुख बनाए हुए हैं।’
गैरे और अरेला ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए आय की रफ्तार उनके कवरेज वाले एनएसई-200 शेयरों के लिए पहले ही धीमी हो गई है। पिछले दो साल में हासिल 14 प्रतिशत की सीएजीआर के मुकाबले अब इसमें लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
इस पृष्ठभूमि में बर्नस्टीन ने खपत में अपना निवेश कम कर दिया है। महंगाई की चुनौतियों, सीमित नीतिगत समर्थन और ऑटोमोबाइल की मांग के चरम पर पहुंचने के संकेतों के मद्देनजर उन्होंने रोजमर्रा की चीजों (स्टैपल्स) और ऑटो सेक्टर की रेटिंग घटाकर ‘अंडरवेट’ कर दी है। घरेलू वृद्धि के कारकों में कमी को देखते हुए उन्होंने वित्तीय क्षेत्र को ‘इक्वल वेट’ श्रेणी में डाल दिया है, वहीं रियल एस्टेट सेक्टर पर वह ‘ओवरवेट’ हैं।