Stock Markets Rally: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले की योजना को फिलहाल रोकने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में राहत की लहर देखने को मिली। इस खबर से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और भारतीय शेयर बाजार में भी जोरदार तेजी आई। मंगलवार को सेंसेक्स 1,516 अंकों की बढ़त के साथ खुला और बाद में करीब 950 अंक यानी 1.3 प्रतिशत ऊपर 73,650 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी 50 भी 320 अंक यानी 1.4 प्रतिशत बढ़कर 22,830 के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि बाजार में आई यह तेजी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही है। ईरान की तरफ से किसी भी तरह की बातचीत या समझौते से साफ इनकार किया गया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ समेत कई नेताओं ने इन खबरों को भ्रामक बताया है। इसका मतलब यह है कि जमीन पर तनाव अभी भी बना हुआ है और स्थिति कभी भी बदल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार ने अभी इन घटनाओं को पूरी तरह समझा नहीं है और फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ के मूड में है। आगे बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि 5 दिन के सीजफायर के बाद ट्रंप क्या कदम उठाते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात किस दिशा में जाते हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें और बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
पिछले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें बाजार को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर रही हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव आता है। इसी वजह से हाल के दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा रहा है।
deVere Group के सीईओ नाइजेल ग्रीन का कहना है कि अगर तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो यह बाजार के लिए बड़ा पॉजिटिव संकेत होगा और तेजी को बल मिल सकता है। लेकिन अगर स्थिति फिर बिगड़ती है, तो बाजार पर दबाव दोबारा बढ़ सकता है।
नाइजेल ग्रीन के अनुसार, इस समय निवेशक खबरों के आधार पर तेजी से फैसले ले रहे हैं, जिससे बाजार में दोनों तरफ तेज मूवमेंट देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर तेल की कीमतें रुकती हैं या गिरती हैं, तो जिन सेक्टरों पर इसका ज्यादा असर होता है, वे तेजी से उछल सकते हैं और बाजार में मजबूत रिकवरी आ सकती है।
घरेलू बाजार में भी अस्थिरता एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है। इंडिया VIX, जो बाजार की अस्थिरता को मापता है, हाल ही में 26.7 के स्तर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा सकारात्मक माहौल बना रहता है, तो यह घटकर 22 के आसपास आ सकता है, जिससे ऑप्शन मार्केट में प्रीमियम भी कम हो सकते हैं और बाजार में थोड़ी स्थिरता आ सकती है।
टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर देखें तो बाजार की स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है। Livelong Wealth के संस्थापक और सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के मुताबिक, निफ्टी हाल ही में 23,000 के अहम स्तर के नीचे गिरा है, जो बाजार में कमजोरी का संकेत देता है।
उनके अनुसार, फिलहाल 22,500 का स्तर बहुत महत्वपूर्ण है। अगर निफ्टी इसके ऊपर बना रहता है, तो थोड़ी स्थिरता रह सकती है। लेकिन अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार 22,300 और उसके बाद 22,000 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 22,700 पर तुरंत रुकावट है, जबकि 23,000 अब मजबूत सप्लाई जोन बन चुका है, जहां से हर उछाल पर बिकवाली आ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि RSI और CCI जैसे संकेतक अभी भी कमजोरी दिखा रहे हैं।
Enrich Money के सीईओ पोनमुदी आर का कहना है कि बाजार में असली मजबूती तभी आएगी जब निफ्टी 23,500 के ऊपर टिकेगा। अगर ऐसा होता है, तो बाजार 23,800 से 24,000 तक जा सकता है।
वहीं नीचे की तरफ 22,500 से 22,400 का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। अगर बाजार यहां तक गिरता है, तो वहां से खरीदारी देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, फिलहाल बाजार में छोटी अवधि के लिए राहत की तेजी आ सकती है, लेकिन बड़ी तस्वीर अभी भी सतर्क रहने की ही है।