Metal Sector: लंबे समय की सुस्ती और दबाव के बाद अब मेटल सेक्टर में जबरदस्त वापसी के संकेत मिल रहे हैं। चौथी तिमाही (Q4FY26) स्टील कंपनियों के लिए खास तौर पर मजबूत साबित हो सकती है। कीमतों में तेजी, मजबूत मांग और बेहतर बिक्री के कारण कंपनियों की आय और मुनाफे में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि एल्युमिनियम सेक्टर की तस्वीर अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है और वहां कंपनी-विशेष चुनौतियां बनी हुई हैं।
इस तिमाही में स्टील की कीमतों ने बाजार का पूरा माहौल बदल दिया है। दिसंबर 2025 में जहां कीमतें करीब 46,500 रुपये प्रति टन तक गिर गई थीं, वहीं अब वे बढ़कर लगभग 57,500 रुपये प्रति टन तक पहुंच चुकी हैं। घरेलू बाजार में हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतों में साल-दर-साल और तिमाही-दर-तिमाही करीब 11 से 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Axis Direct के विश्लेषकों के मुताबिक, “स्टील कंपनियों का Ebitda साल-दर-साल और तिमाही-दर-तिमाही दोनों आधार पर बढ़ेगा, जिसकी वजह बेहतर कीमत (रियलाइजेशन) और ज्यादा बिक्री वॉल्यूम है, हालांकि कोकिंग कोल की लागत इसका कुछ असर कम कर सकती है।”
इसके अलावा Anand Rathi Share and Stock Brokers का कहना है कि दिसंबर 2025 के बाद से HRC कीमतों में करीब 30 प्रतिशत और सरिया (rebar) की कीमतों में लगभग 29.5 प्रतिशत की तेजी आई है, जिसने कंपनियों की कमाई को मजबूत आधार दिया है।
स्टील की मांग में लगातार मजबूती बनी हुई है, जो इस सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में भारत की स्टील खपत 7 प्रतिशत बढ़कर 148 मिलियन टन तक पहुंच गई है। वहीं उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़कर 147 मिलियन टन हो गया है।
निर्यात में 37 प्रतिशत की तेज वृद्धि के कारण भारत अब स्टील का नेट एक्सपोर्टर बन चुका है। World Steel Association के अनुसार, फरवरी 2026 में चीन का स्टील उत्पादन 3.6 प्रतिशत घटा, जबकि भारत का उत्पादन 9.7 प्रतिशत बढ़ा, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।
बढ़ती कीमतों और मजबूत मांग का सीधा असर कंपनियों के नतीजों में दिखने की उम्मीद है। टाटा स्टील और सेल (SAIL) जैसी बड़ी कंपनियों के Ebitda में अच्छी बढ़ोतरी का अनुमान है। Axis Direct का कहना है कि इन कंपनियों को बेहतर बिक्री कीमत (NSR) और वॉल्यूम ग्रोथ का फायदा मिलेगा। Anand Rathi के अनुसार, बड़ी स्टील कंपनियों का कुल वॉल्यूम करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 22 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जबकि पूरे सेक्टर का Ebitda करीब 26.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
कंपनी स्तर पर भी तेजी दिख रही है। जिंदल स्टील एंड पावर का वॉल्यूम 17 से 18 प्रतिशत बढ़कर करीब 2.5 मिलियन टन हो सकता है। APL Apollo Tubes का वॉल्यूम 925 किलो टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो सालाना आधार पर 9 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं JTL Industries में 51 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी संभव है।
हालांकि, इस मजबूती के बीच लागत का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कोकिंग कोल की कीमत करीब 251 डॉलर प्रति टन बनी हुई है, जबकि आयरन ओर और ढुलाई खर्च भी बढ़े हैं। Anand Rathi के विश्लेषकों का कहना है, “ऊंची कच्चे माल की लागत मार्जिन पर दबाव डाल सकती है, लेकिन बेहतर रियलाइजेशन इस असर को काफी हद तक संतुलित कर देगा।” यानी कंपनियों के मुनाफे बढ़ेंगे, लेकिन लागत पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।
स्टील के मुकाबले एल्युमिनियम सेक्टर की स्थिति थोड़ी अलग है। एल्युमिनियम की कीमतों में साल-दर-साल करीब 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और फरवरी 2026 के बाद से इसमें करीब 430 डॉलर प्रति टन की तेजी आई है। यह तेजी मिडिल ईस्ट में सप्लाई में आई रुकावटों के कारण है, जिससे वैश्विक सप्लाई का लगभग 9 प्रतिशत प्रभावित हुआ है।
Axis Direct के अनुसार, एल्युमिनियम कंपनियों का Ebitda तिमाही आधार पर बेहतर हो सकता है, लेकिन सालाना आधार पर दबाव बना रह सकता है।
Hindalco Industries को Novelis प्लांट में आग लगने की घटना से नुकसान हुआ है, जिससे उसके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। हालांकि वॉल्यूम धीरे-धीरे सुधरकर करीब 0.84 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है।
साथ ही, कंपनी की हेजिंग लगभग 2,807 डॉलर प्रति टन पर होने के कारण उसे ऊंची बाजार कीमतों का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
वहीं National Aluminium Company (NALCO) पर एलुमिना की कीमतों में 41 प्रतिशत की गिरावट का असर पड़ा है, हालांकि हाल के समय में कीमतों में स्थिरता आई है।
जिंदल स्टेनलेस को मार्च 2026 में गैस की कमी के कारण उत्पादन में दिक्कत आई, जिससे उसका वॉल्यूम करीब 3 प्रतिशत घट सकता है। हालांकि प्रति टन Ebitda करीब 21,500 रुपये रहने की उम्मीद है। दूसरी ओर Lloyds Metals and Energy ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है, जिसके चलते उसका Ebitda साल-दर-साल करीब 7 गुना बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)