देश की बड़ी लिस्टेड कंपनियों के लिए जनवरी-मार्च 2026 तिमाही अच्छी रही। वैश्विक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद निफ्टी-500 कंपनियों का कुल मुनाफा 16 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बिक्री में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह बिक्री वृद्धि पिछले 13 तिमाहियों में सबसे तेज रही।
तिमाही के दौरान मेटल कंपनियों का मुनाफा 55 प्रतिशत बढ़ा, जबकि तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) का लाभ 61 प्रतिशत बढ़ गया। निजी बैंक, एनबीएफसी, आईटी और ऑटो कंपनियों ने भी कमाई में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की। टेलीकॉम सेक्टर का मुनाफा भी पिछले साल के कमजोर आधार की तुलना में कई गुना बढ़ गया।
कमाई के मामले में मिडकैप कंपनियां सबसे आगे रहीं। निफ्टी मिडकैप-150 कंपनियों की आय 34 प्रतिशत बढ़ी, जो पिछले नौ तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि है। इसके मुकाबले निफ्टी-100 कंपनियों की कमाई 12 प्रतिशत और स्मॉलकैप-250 कंपनियों की कमाई 13 प्रतिशत बढ़ी।
बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं (बीएफएसआई) क्षेत्र का मुनाफा 14 प्रतिशत बढ़ा। निजी बैंकों का लाभ 17 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सरकारी बैंकों का मुनाफा 7 प्रतिशत बढ़ा। कर्ज की मांग मजबूत रहने से पूरे बैंकिंग सिस्टम में ऋण वृद्धि दर 16 प्रतिशत तक पहुंच गई।
आईटी कंपनियों का मुनाफा 14 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले 11 तिमाहियों का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। हालांकि कंपनियों ने आगे के लिए सतर्क रुख अपनाया है। उनका कहना है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल और वैश्विक अनिश्चितताओं से आने वाले समय में दबाव बढ़ सकता है।
ऑटो सेक्टर में सभी प्रमुख श्रेणियों में दोहरे अंकों की बिक्री वृद्धि दर्ज की गई। वहीं उपभोक्ता कंपनियों को ग्रामीण मांग में मजबूती और शहरी बाजार में सुधार का फायदा मिला, जिससे बिक्री और मुनाफा दोनों बढ़े।
निफ्टी-500 के 23 प्रमुख सेक्टरों में से 14 ने दोहरे अंकों की लाभ वृद्धि दर्ज की। करीब 250 कंपनियों ने 15 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा बढ़ाया, जबकि 164 कंपनियों का मुनाफा घटा या उन्हें नुकसान हुआ।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में निफ्टी-500 कंपनियों का कुल मुनाफा 15 प्रतिशत बढ़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडकैप कंपनियों ने पूरे साल बड़ी कंपनियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और कॉरपोरेट कमाई का आधार पहले के मुकाबले अधिक व्यापक हुआ।