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तेल बाजार में उबाल: जून तक चला युद्ध तो 200 डॉलर पहुंचेगा क्रूड ऑयल

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से यानी 27 फरवरी से ब्रेंट बेंचमार्क में 53 फीसदी की तेजी आई है

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एजेंसियां   
Last Updated- March 27, 2026 | 10:06 PM IST

मैक्वेरी ग्रुप के विश्लेषकों ने कहा कि अगर युद्ध जल्द ही खत्म हुआ तो तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी, लेकिन फिर भी वे युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर ही रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर युद्ध जून के आखिर तक खिंचता है तो कीमतें बढ़कर 200 डॉलर तक पहुंच सकती हैं।

शुक्रवार को तेल की कीमतें बढ़ीं। लेकिन 9 फरवरी के बाद पहली बार इनमें साप्ताहिक गिरावट की संभावना है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमले रोकने की समयसीमा बढ़ा दी है। लेकिन निवेशक एक महीने से चल रहे इस युद्ध में संघर्ष-विराम की संभावनाओं को लेकर अभी भी सतर्क हैं। ब्रेंट क्रूड वायदा 2.73 डॉलर यानी 2.53 फीसदी बढ़कर 110.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट वायदा 2.39 डॉलर यानी 2.53 फीसदी बढ़कर 96.87 डॉलर पर पहुंच गया।

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से यानी 27 फरवरी से ब्रेंट बेंचमार्क में 53 फीसदी की तेजी आई है, लेकिन इस हफ्ते इसमें 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। डब्ल्यूटीआई में युद्ध शुरू होने के बाद से 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इस हफ्ते यह 1.5 फीसदी नीचे रहा।

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फिलिप नोवा की विश्लेषक प्रियंका सचदेवा ने कहा, तनाव कम करने की बातचीत के बावजूद तेल की ट्रेडिंग सिर्फ सुर्खियों के आधार पर नहीं बल्कि युद्ध के लंबे समय तक चलने की संभावना पर हो रही है। तेल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को कोई भी सीधा नुकसान या लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष बाजारों को कीमतों में तेजी से उछाल लाने पर मजबूर कर सकता है।

जहां एक ओर ट्रंप ने ईरान के लिए अपनी धमकी पर अमल की समयसीमा बढ़ा दी है जिसके तहत उन्होंने कहा था कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोले अन्यथा उसके बिजली ढांचे को तहस-नहस कर दिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने पश्चिम एशिया में हजारों सैनिक भी रवाना किए हैं। साथ ही, ट्रंप इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या ईरान के रणनीतिक तेल केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए ज़मीनी सेना का इस्तेमाल किया जाए। एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि पाकिस्तान के जरिये तेहरान तक पहुंचाया गया अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव एकतरफ़ा और अनुचित था।

स्पार्टा कमोडिटीज में विश्लेषक नील क्रॉस्बी ने कहा, ईरानी ग्रिड पर अमेरिकी हमलों को टालने की चर्चा अब तेजी से फीकी पड़ती दिख रही है क्योंकि बाजार को अमेरिकी सैन्य शक्ति के जमावड़े, ईरान के अड़ियल रवैये और सप्ताहांत में (जब बाजार बंद होते हैं) घटनाओं के तेजी से बढ़ने के रुझानों के बारे में पूरी जानकारी है।

इस संघर्ष के कारण रोजाना वैश्विक तेल आपूर्ति करीब 1.1 करोड़ बैरल तेल कम हो गया है। इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी ने इस संकट को 1970 के दशक के दो तेल संकटों के संयुक्त प्रभाव से भी ज्यादा गंभीर बताया है।

First Published : March 27, 2026 | 9:56 PM IST