Crude Oil Outlook: मार्च में दुनिया भर के कच्चे तेल बाजार में काफी हलचल देखने को मिली। सप्लाई में दिक्कत और अलग-अलग देशों के बीच बढ़ते तनाव के चलते तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट मोहम्मद इमरान के मुताबिक, इस दौरान अमेरिका का डब्ल्यूटीआई तेल 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 60 प्रतिशत चढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ा और अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार चली गई।
मोहम्मद इमरान का कहना है कि तेल की कीमतें इसलिए तेजी से बढ़ीं क्योंकि एक साथ कई जगहों पर सप्लाई में रुकावट आ गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस के तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इससे रूस की करीब 10 से 15 प्रतिशत रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है और कुछ बड़े बंदरगाह भी प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर तेल की सप्लाई पर पड़ा है।
इमरान के अनुसार, इन सबके बावजूद रूस ने अपना तेल बेचना बंद नहीं किया है। भारत और चीन जैसे देश उससे लगातार तेल खरीद रहे हैं। भारत करीब 1.75 मिलियन बैरल रोज तेल खरीद रहा है और चीन ने भी खरीद बढ़ाई है। इससे रूस को कुछ सहारा मिला है, लेकिन उसे पहले जितनी कमाई नहीं हो रही।
उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों ने भी उत्पादन कम कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरा बढ़ने के कारण सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक ने तेल निकालना घटाया है। इससे बाजार में 4 से 6 मिलियन बैरल तक सप्लाई कम हो गई है, जिससे कीमतों पर और दबाव बना है।
तेल महंगा होने का असर मांग पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने 2026 में तेल की मांग बढ़ने का अनुमान घटा दिया है। अब मांग में बढ़ोतरी सिर्फ 640 हजार बैरल रोज रहने की उम्मीद है। इमरान के मुताबिक, महंगाई और अनिश्चितता के कारण खपत पर असर पड़ा है। हालांकि चीन से थोड़ी उम्मीद जरूर है, जहां फैक्ट्री गतिविधियां सुधर रही हैं।
मोहम्मद इमरान के मुताबिक, अब बाजार का रुख नीचे की ओर झुकता दिख रहा है क्योंकि तनाव कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। ऐसे में कीमतों में 20 से 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिरावट आ सकती है, क्योंकि अभी जो अतिरिक्त जोखिम के कारण दाम बढ़े हुए हैं, वह धीरे-धीरे खत्म हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आगे कुछ अहम घटनाएं होने वाली हैं, खासकर 6 अप्रैल की समयसीमा और इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत का नतीजा काफी महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे में जब तक स्थिति साफ नहीं होती, निवेशकों को बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए।
इमरान का मानना है कि अगर ब्रेंट की कीमत 95 डॉलर से नीचे टिकती है और साथ ही युद्धविराम की पक्की खबर आती है, तो यह संकेत होगा कि बाजार में गिरावट का ट्रेंड मजबूत हो गया है और उस समय निवेशक गिरावट की दिशा में रणनीति बना सकते हैं।