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शेयर बाजार की गिरावट में फार्मा सेक्टर बना निवेशकों का ढाल, क्या अब निवेश का सही मौका है?

शेयर बाजार के विश्लेषकों ने कहा कि इस क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन रक्षात्मक ​स्थिति, रुपये में गिरावट और कमाई की बेहतर संभावनाओं के मेल की वजह से देखा गया है

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निकिता वशिष्ठ   
Last Updated- April 12, 2026 | 9:07 PM IST

कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक दवा कंपनियों के शेयर निवेशकों के लिए सुरक्षित दांव के रूप में उभरे हैं। उनमें बेंचमार्क निफ्टी50 इंडेक्स की तुलना में कम गिरावट आई है। इससे निवेशकों के पोर्टफोलियो का बचाव हुआ है। एसीई इ​क्विटी के आंकड़ों के अनुसार निफ्टी में 12 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले निफ्टी फार्मा सूचकांक इस साल जनवरी से अब तक सिर्फ करीब 3 प्रतिशत कमजोर हुआ है।

विश्लेषकों ने कहा कि इस सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन रक्षात्मक ​स्थिति, रुपये में गिरावट और कमाई की बेहतर संभावनाओं के मेल की वजह से देखा गया है। अमेरिकी टैरिफ प्रस्तावों के बीच विश्लेषकों का मानना ​​है कि फायदा चुनिंदा कंपनियों को होंगे और उन्हें ज्यादा होगें जिनका कारोबार  घरेलू बाजार में अधिक है।

इनक्रेड कैपिटल की शोध विश्लेषक निहारिका अग्रवाल ने कहा, ‘फार्मा सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन कुछ हद तक वृहद आ​र्थिक कारणों से है, लेकिन ज्यादा बड़ी वजह कमाई में दिख रही बेहतर स्पष्टता है।’ उन्होंने कहा कि जहां रुपये में गिरावट निर्यात कमाई को लगातार सहारा दे रही है, वहीं उनके मुख्य बाजार मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल से काफी हद तक सुरक्षित हैं।’  अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उन देशों में बनी ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिनके साथ अमेरिका का कोई टैरिफ समझौता नहीं है।

पेटेंट से जुड़ी अनुकूल स्थिति मजबूत

इसके अलावा, विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में इस समय पेटेंट खत्म होने का चक्र चल रहा है जो भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए जटिल जेनेरिक और स्पेशलिटी दवाओं के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा।

ओजे​म्पिक का पेटेंट खत्म होने के बाद लगभग 10 भारतीय कंपनियां पहले ही भारत में सेमाग्लूटाइड दवा उतार चुकी हैं। इनमें डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, जाइडस लाइफ, टॉरंट फार्मा, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स, एरिस लाइफसाइंसेज और ल्यूपिन शामिल हैं।

नोमूरा ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि समय के साथ आक्रामक मूल्य निर्धारण से बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे अगले पांच साल में भारत में सेमाग्लूटाइड का बाजार डायबिटीज और वजन घटाने के क्षेत्र में 12,000 करोड़ रुपये से अ​धिक का हो जाएगा। जाइडस लाइफसाइंसेज को अपने अलग तरह के उत्पादों और करारों से फायदा होगा, जबकि एल्केम को आक्रामक मूल्य नीति और दोबारा इस्तेमाल होने वाले पेन को लॉन्च करने से औसत से ज्यादा बिक्री हिस्सेदारी मिल सकती है।’ उन्होंने कहा कि डॉ. रेड्डीज, टॉरंट फार्मा और सन फार्मास्यूटिकल्स को भी औसत से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी मिल सकती है।

ईरान युद्ध से अल्पाव​धि जोखिम

विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि भारतीय फार्मा क्षेत्र अपने कुल उत्पादन का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया को निर्यात करता है। निर्यात में कमी और माल ढुलाई की लागत में वृद्धि के कारण निकट भविष्य में राजस्व का नुकसान हो सकता है और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

निवेश की रणनीति

बदलते हालात को देखते हुए, इनक्रेड कैपिटल की निहारिका अग्रवाल फार्मा सेक्टर को अपेक्षाकृत सुरक्षित दांव मानती हैं। लेकिन इसे निवेश के लिए व्यापक विकल्प नहीं मानतीं। उन्होंने कहा, ‘आसानी से मिलने वाली री-रेटिंग का दौर अब बीत चुका है। अब अतिरिक्त रिटर्न पूरे सेक्टर में निवेश करने के बजाय उन कंपनियों में निवेश से मिलेगा जहां कमाई में गिरावट से उबरने की स्पष्ट संभावनाएं नजर आती हों।’

First Published : April 12, 2026 | 9:07 PM IST