बाजार

मजबूत रीस्टॉकिंग और ऊंची पीवीसी कीमतों से पाइप सेक्टर को Q4 में बूस्ट, लेकिन अगली तिमाही में दबाव बढ़ा

मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने बताया कि जनवरी और फरवरी में प्लंबिंग की मांग, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियों और चैनल रीस्टॉकिंग में धीरे-धीरे सुधार देखा गया

Published by
राम प्रसाद साहू   
Last Updated- June 12, 2026 | 10:54 PM IST

वित्त वर्ष 2025–26 की चौथी तिमाही में प्लास्टिक पाइप बनाने वाली कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा और इस दौरान बिक्री की मात्रा और राजस्व कई तिमाहियों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। मज़बूत मौसमी मांग और निचले आधार के साथ-साथ कीमतें बढ़ने से पहले ट्रेड चैनलों द्वारा स्टॉक फिर से भरने (रीस्टॉकिंग) से भी राजस्व वृद्धि को सहारा मिला।

सूचीबद्ध पाइप बनाने वाली प्रमुख कंपनियों ने न केवल बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई बल्कि बेहतर बिक्री आय से अच्छा मार्जिन भी हासिल किया। हालांकि चौथी तिमाही में प्रदर्शन शानदार रहा। लेकिन पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कम मांग के कारण 2026–27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में कुछ फायदे कम हो गए।

इस सेक्टर की कंपनियों (प्रिंस पाइप्स ऐंड फिटिंग्स को छोड़कर) ने पिछले तीन महीनों में रिटर्न में घाटा दिया है। हालांकि ब्रोकरेज फर्मों को मांग और मार्जिन दोनों मोर्चों पर निकट भविष्य में चुनौतियों की आशंका दिखती है। लेकिन उनका मानना ​​है कि हाउसिंग, एग्रीकल्चर और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से बढ़ती मांग के कारण मध्यम अवधि में वॉल्यूम में सुधार होगा।

प्लास्टिक पाइप सेक्टर में रिकवरी मुख्य रूप से पीवीसी रेजिन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच मजबूत मांग और डीलरों के स्टॉक जमा करने की वजह से हुई। वैश्विक आपूर्ति में रुकावट, पश्चिम एशिया में भूराजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पेट्रोकेमिकल आपूर्ति के तंग हालात के कारण इस तिमाही में पीवीसी रेजिन की कीमतों में सालाना आधार पर 64 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कीमतों में भारी इजाफे के कारण कई तिमाहियों तक इन्वेंट्री स्तर कम रहने के बाद डीलरों और वितरकों ने अग्रिम खरीदारी की और भंडार में माल फिर से जमा कर लिया।

मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने बताया कि जनवरी और फरवरी में प्लंबिंग की मांग, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियों और चैनल रीस्टॉकिंग में धीरे-धीरे सुधार देखा गया। मगर मार्च  में रिकवरी में तेजी आई, क्योंकि पीवीसी रेजिन की कीमतें बढ़कर 1,150 डॉलर प्रति टन हो गईं। वैश्विक आपूर्ति में बाधा और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कीमतों में 85 फीसदी का इजाफा हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर अग्रिम खरीदारी और इन्वेंट्री-बेस्ड स्टॉकिंग शुरू हो गई।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषक अरुण बेद और निकुंज शाह के अनुसार, चौथी तिमाही में इस सेक्टर में अच्छा वॉल्यूम और मुनाफा देखा गया। इसकी वजहें थीं – मांग का पीक सीज़न, संगठित कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में इजाफा और तिमाही के दौरान पीवीसी की कीमतें बढ़ने पर चैनल पार्टनर्स द्वारा स्टॉक फिर से भरना। फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज को छोड़कर, पाइप वॉल्यूम में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 18.3 फीसदी से 24.2 फीसदी की अच्छी बढ़ोतरी हुई।

बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, बिक्री से ज्यादा रकम मिलने, इन्वेंट्री से फायदे और वॉल्यूम में अच्छी बढ़ोतरी से चौथी तिमाही में परिचालन लाभ और मार्जिन मजबूत बने रहे, जिससे परिचालन फायदा मिला। बड़ी कंपनियों के मार्जिन में सालाना आधार पर 2 से 10 फीसदी तक की वृद्धि हुई।

हालांकि चौथी तिमाही अच्छी रही थी, लेकिन उसके बाद से मांग की स्थिति खराब हो गई है। 360 वन कैपिटल रिसर्च के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही की शुरुआत धीमी रही। इसकी वजह पीवीसी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुख्य बाजारों में निर्माण गतिविधियों का कमजोर होना था, जिसके कारण वितरण चैनलों में स्टॉक में कमी आई। प्लंबिंग की मांग कमजोर रही, खासकर मई में।

First Published : June 12, 2026 | 10:54 PM IST