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3 दिन में 15% टूटा शेयर, Rajesh Exports को लेकर क्यों बढ़ी निवेशकों की चिंता?

Rajesh Exports के शेयर में लगातार तीसरे दिन गिरावट, PLI योजना से बाहर होने की आशंका बढ़ी

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- June 08, 2026 | 1:58 PM IST

राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में सोमवार को भी भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी का शेयर बीएसई पर 5 फीसदी के लोअर सर्किट के साथ 94.50 रुपये पर पहुंच गया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 15 फीसदी टूट चुका है। कंपनी के शेयर पर दबाव उस खबर के बाद बढ़ गया, जिसमें कहा गया कि भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज से जुड़ी PLI योजना के लाभार्थियों की लिस्ट से राजेश एक्सपोर्ट्स का नाम हटा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय के भीतर इस बात पर सहमति बनती दिख रही है कि कंपनी को इस योजना से बाहर किया जाए। इस मामले पर अंतिम फैसला आने वाले दिनों में लिया जा सकता है।

Sebi की कार्रवाई के बाद बढ़ी मुश्किलें

यह पूरा मामला Sebi के 3 जून को जारी अंतरिम आदेश के बाद सामने आया है। Sebi ने अपने आदेश में आरोप लगाया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने FY21 से FY25 के बीच अपनी सहायक कंपनियों के जरिए करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। नियामक ने कंपनी पर फंड डायवर्जन, संबंधित पक्षों के साथ पारदर्शिता की कमी और जरूरी खुलासे नहीं करने जैसे आरोप भी लगाए हैं। ये आरोप खास तौर पर कंपनी के लिथियम-आयन बैटरी कारोबार से जुड़ी दो कंपनियों – Elest Private Limited और ACC Energy Storage Private Limited – से जुड़े हैं।

कंपनी के प्रमोटर पर भी कार्रवाई

Sebi ने कंपनी के चेयरमैन और प्रमोटर राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री करने से रोक दिया है। इसके साथ ही Sebi ने कंपनी के खातों की दोबारा फॉरेंसिक जांच कराने का भी आदेश दिया है।

PLI योजना पर क्या असर पड़ सकता है?

भारी उद्योग मंत्रालय अब Sebi के आदेश का अध्ययन कर रहा है। मंत्रालय यह तय करेगा कि ACC बैटरी स्टोरेज PLI योजना में कंपनी की पात्रता जारी रखी जाए या नहीं। अगर कंपनी को इस योजना से बाहर किया जाता है, तो यह उसके बैटरी कारोबार के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

कंपनी ने आरोपों को नकारा

राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके चेयरमैन राजेश मेहता ने Sebi के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया है कि अगर कोई सूचीबद्ध कंपनी सिर्फ राजस्व बढ़ाकर दिखाए और मुनाफा न बढ़ाए, तो इससे उसके मार्जिन कम दिखाई देंगे। ऐसे में ऐसा करने का कोई खास फायदा नहीं होता।

निवेशकों की नजर किस पर?

फिलहाल निवेशकों की नजर दो बातों पर टिकी है। पहली, Sebi की जांच आगे क्या मोड़ लेती है। दूसरी, भारी उद्योग मंत्रालय PLI योजना को लेकर क्या फैसला करता है। इन दोनों मामलों का असर आने वाले दिनों में कंपनी के शेयर और कारोबार पर देखने को मिल सकता है।

First Published : June 8, 2026 | 1:58 PM IST