भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी साप्ताहिक नीलामी में 182 दिन और 364 दिन के ट्रेजरी बिलों के लिए बोलियों को नामंजूर कर दिया। इन प्रतिभूतियों के लिए बोलियां ऊंची यील्ड पर आई थीं। डीलरों के अनुसार घरेलू वित्तीय बाजारों में बड़े पैमाने पर हुई बिकवाली के बीच इन बोलियों को रद्द किया गया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊपर चढ़ा दिया जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नवीनतम टैरिफ प्रस्तावों ने चिंता बढ़ा दी जिससे निवेशकों के मनोबल पर असर पड़ा। 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 7.03 फीसदी पर बंद हुई जबकि पिछले सत्र में यह 7.01 फीसदी पर थी। रुपया लगातार दूसरे सत्र में कमजोर हुआ और पिछले सत्र के 95.27 के मुकाबले 95.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, भारतीय रुपया लगातार दूसरे सत्र में भी कमजोर हुआ। इसकी मुख्य वजह पूंजी का बाहर जाना और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नए टैरिफ प्रस्तावों को लेकर बढ़ती चिंताएं थीं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाया, जिससे निवेशकों का भरोसा और कमजोर हुआ। इसके अलावा, एक मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने भी क्षेत्रीय मुद्राओं पर दबाव बनाए रखा क्योंकि केंद्रीय बैंकों के सख़्त रुख़ अपनाने की उम्मीदें बनी हुई थीं।
ट्रेजरी बिलों की नीलामी में केंद्रीय बैंक ने 91 दिन के ट्रेजरी बिलों के लिए 12,000 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार कीं। सरकार ने 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन के ट्रेजरी बिलों की बिक्री के जरिये 24,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। इससे पहले, 25 मार्च को आरबीआई ने ट्रेजरी बिलों की साप्ताहिक नीलामी रद्द कर दी थी।
एक निजी बैंक के डीलर ने कहा, रद्द करने का यह मामला असल में यील्ड का कोई संकेत नहीं था बल्कि इससे कम मांग का पता चलता था। बोलियों की कमी साफ तौर पर थी, खासकर 182 दिन और 364 दिन वाले सेगमेंट में। बाजार प्रतिभागी अनिश्चितता के माहौल में जोखिम लेने से हिचकिचा रहे थे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और दरों को लेकर सख्त होता नजरिया निवेशकों को परेशान कर रहा है, जो अल्पावधि की यील्ड और एक साल की ओआईएस दरों में इजाफे से भी साफ जाहिर होता है।
एक अन्य डीलर ने कहा कि 364 दिन के ट्रेजरी बिलों के लिए बोलियां शायद 6.08 फीसदी से 6.12 फीसदी के आसपास आई होंगी जबकि सेकंडरी बाजार में इसका मौजूदा स्तर लगभग 6.02 फीसदी था। ऐसी बोलियों को स्वीकार करने से कट ऑफ यील्ड बढ़ जाती। लिहाजा, आरबीआई को नीलामी रद्द करनी पड़ी। डीलर ने कहा कि केंद्रीय बैंक को शायद उम्मीद थी कि मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद यील्ड में गिरावट आएगी।
इस बीच, 91-दिन के ट्रेजरी बिलों की मांग बाजार की उम्मीदों के मुताबिक ही रही। पिछली नीलामी में 5.61 फीसदी रही कट ऑफ यील्ड घटकर 5.56 फीसदी रह गई। डीलरों ने बताया कि 91 दिन के ट्रेजरी बिलों की मांग को म्युचुअल फंडों का समर्थन मिला और नीलामी में 12,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले लगभग 32,000 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।
बाज़ार के प्रतिभागी अब आरबीआई की मौद्रिक नीति के नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्हें रुपये के लिए प्रतिरोध का तात्कालिक स्तर 96.50 प्रति डॉलर और समर्थन 95.10 प्रति डॉलर पर दिख रहा है।