प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
अप्रैल में देश में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 51 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 463.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बढ़ोतरी है। इसने मार्च 2025 में दर्ज बढ़ोतरी के पिछले सबसे ऊंचे स्तर 28.9 लाख करोड़ रुपये को भी पार कर लिया है। यह तेज उछाल मार्च में मार्केट वैल्यू में हुई 51.1 लाख करोड़ रुपये की भारी गिरावट के बाद आई है। यह गिरावट पश्चिम एशिया संकट की वजह से हुई थी, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई और घरेलू शेयरों के लिए बाजार का नजरिया कमजोर पड़ गया था।
अप्रैल में बेंचमार्क इंडेक्स में जबरदस्त बढ़त देखने को मिली। सेंसेक्स 6.9 फीसदी और निफ्टी 7.5 फीसदी ऊपर चढ़ा। इन दोनों का दिसंबर 2023 के बाद से यह सबसे अच्छा मासिक प्रदर्शन था। देसी बाजार पूंजीकरण ने मार्च में हुई बिकवाली के कारण हुए नुकसान की भरपाई कर ली है और व्यापक बाजार लड़ाई शुरू होने से पहले के स्तरों पर वापस आ गए हैं। हालांकि 2 जनवरी को दर्ज 481 लाख करोड़ रुपये के अपने शिखर से कुल बाजार पूंजीकरण अभी भी करीब 18 लाख करोड़ रुपये कम है।
हालिया सुधार के बावजूद सेंसेक्स अपने रिकॉर्ड बंद स्तर 85,836 से करीब 11 फीसदी नीचे बना हुआ है जबकि निफ्टी अपने शिखर से लगभग 9 फीसदी नीचे है। मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स भी अपने उच्चस्तरों से नीचे हैं, जिनमें क्रमशः 2.7 फीसदी और 8.4 फीसदी की गिरावट है।
विश्लेषकों ने आगाह किया है कि हालिया सुधार के बाद भी गिरावट का जोखिम बना हुआ है जबकि मूल्यांकन में बढ़त की गुंजाइश सीमित दिख रही है क्योंकि निफ्टी अपनी 12 महीने की आगे की अनुमानित आय के करीब 19 गुना के दीर्घकालिक औसत के करीब कारोबार कर रहा है। उन्होंने कहा, इस समय जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की ऊंची कीमतें, औसत से कम मॉनसून की संभावना और कमाई के आंकड़ों में जोखिम प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं।