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Consumption Stocks: पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही कंपनियों ने बढ़ाने शुरू किए दाम, क्या अब और बढ़ेगी मुश्किल?

अब तक इस साल Nifty India Consumption Index करीब 8 प्रतिशत टूटा है, जबकि Nifty 50 में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- May 19, 2026 | 12:12 PM IST

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रह गया है। इसका दबाव धीरे-धीरे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामानों और लोगों के खर्च पर भी दिखने लगा है। पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 3.90 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। ऐसे में बाजार को डर है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो कंपनियां अपने बढ़े हुए खर्च का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर देंगी। इससे महंगाई और बढ़ेगी, लोगों का खर्च कम होगा और कंजम्प्शन सेक्टर की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।

अब तक इस साल Nifty India Consumption Index करीब 8 प्रतिशत टूटा है, जबकि Nifty 50 में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। यानी कंजम्प्शन शेयर बाजार के मुकाबले थोड़ा बेहतर टिके हुए थे, लेकिन अब बढ़ती लागत और महंगाई इस मजबूती को कमजोर कर सकती है। बाजार को चिंता है कि अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही, तो FMCG से लेकर ऑटो, होटल, एयरलाइन और पेंट कंपनियों तक की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

रोजमर्रा की चीजें पहले ही होने लगी हैं महंगी

महंगाई का असर अब लोगों की रोज की जिंदगी में भी दिखने लगा है। देश की बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। मॉडर्न ब्रेड ने अपने बेसिक पैक की कीमत 5 रुपये बढ़ाई है। वहीं खबरें हैं कि ब्रिटानिया और Wibs जैसी कंपनियां भी जल्द अपने प्रोडक्ट्स महंगे कर सकती हैं। यानी आने वाले दिनों में दूध, ब्रेड, बिस्किट और खाने-पीने की दूसरी चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर आम लोगों के महीने के बजट पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी कंपनियां बढ़ती लागत का सिर्फ एक हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही हैं। लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहा, तो कंपनियों के पास कीमतें और बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचेंगे।

एक्सपर्ट्स क्यों जता रहे हैं चिंता?

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर और हेड ऑफ रिसर्च जी चोक्कालिंगम का कहना है कि अभी महंगाई बहुत बड़ा संकट नहीं बनी है, लेकिन अगर पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता अगले कुछ महीनों तक जारी रहती है, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।

उनके मुताबिक अगर तेल सप्लाई पर असर पड़ता है और क्रूड महंगा बना रहता है, तो महंगाई अस्थायी नहीं बल्कि लंबी समस्या बन सकती है। ऐसे में कंपनियां अपने बढ़े हुए खर्च को पूरी तरह ग्राहकों पर डालेंगी। इसका असर लोगों की खरीदारी पर पड़ेगा और मांग घटने लगेगी। अगर ऐसा हुआ तो कंजम्प्शन सेक्टर के शेयरों पर दबाव और बढ़ सकता है।

मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का भी मानना है कि कंजम्प्शन सेक्टर के लिए निकट भविष्य थोड़ा मुश्किल भरा दिख रहा है। उनका कहना है कि कंपनियों ने अभी मिड और हाई सिंगल डिजिट तक कीमतें बढ़ानी शुरू की हैं, लेकिन ये बढ़ोतरी तभी तक संभाली जा सकती है जब तक कच्चे तेल की कीमतें करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक रहती हैं।

अगर तेल इससे ऊपर लंबे समय तक बना रहा, तो कंपनियों को और ज्यादा कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इससे लोगों की खरीदारी घट सकती है और कंपनियों की बिक्री व मुनाफे दोनों पर असर पड़ सकता है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंजम्प्शन सेक्टर लंबी अवधि में मजबूत जरूर माना जाता है, लेकिन फिलहाल कंपनियों के मार्जिन, कीमत बढ़ाने की क्षमता और कच्चे तेल की चाल सबसे अहम फैक्टर होंगे।

मानसून और गर्मी भी बढ़ा सकते हैं मुश्किल

साल एल नीनो की स्थिति मानसून बारिश में बदलाव (%)
1997 कमजोर (Weak) +0.2%
2002 मध्यम (Moderate) -20.9%
2004 कमजोर (Weak) -9.6%
2006 कमजोर (Weak) +3.4%
2009 मध्यम (Moderate) -18.4%
2015 मजबूत (Strong) -12.7%
2018 कमजोर (Weak) -9.0%
2023 मजबूत (Strong) -6.0%
2026 (अनुमान) मजबूत (Strong) -8.0%

सोर्स: CEIC, Reuters, NOAA, IMD और Nomura Global Economics

महंगाई की चिंता सिर्फ तेल की वजह से नहीं है। मौसम भी इस साल बड़ा खतरा बन सकता है। नोमुरा के विश्लेषकों का कहना है कि भारत इस बार दोहरी मार झेल सकता है। एक तरफ भीषण गर्मी और सुपर एल नीनो जैसी स्थिति बनने की आशंका है, वहीं दूसरी तरफ सामान्य से कम बारिश का खतरा भी बना हुआ है।

नोमुरा के मुताबिक इस साल बारिश सामान्य से सिर्फ 92 प्रतिशत रह सकती है। इसके अलावा 35 प्रतिशत संभावना ऐसी भी है कि बारिश सामान्य से 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो। अगर ऐसा हुआ, तो खेती और फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है। नोमुरा की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इकोनॉमिस्ट सोनल वर्मा और ऑरोदीप नंदी का कहना है कि अगर कमजोर मानसून और एल नीनो की वजह से फसल उत्पादन घटता है, तो खाने-पीने की चीजों की महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। उनका अनुमान है FY27 में फूड और बेवरेज महंगाई करीब 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि FY26 में यह सिर्फ 0.6 प्रतिशत थी। खासकर सब्जियां, दालें और खाने के तेल की कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिल सकती है।

किन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव?

बढ़ती महंगाई और लागत की वजह से कई बड़े कंजम्प्शन शेयरों में इस साल पहले ही कमजोरी देखने को मिल चुकी है। ITC, Maruti Suzuki, Godrej Consumer Products, Mahindra & Mahindra, IndiGo, Indian Hotels, Britannia, United Spirits, Asian Paints और HUL जैसे कई बड़े शेयर इस साल अब तक 23 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो लोगों का खर्च कम हो सकता है। ऐसे में FMCG, ऑटो, ट्रैवल, होटल और कंजम्प्शन से जुड़ी कंपनियों के लिए आने वाले कुछ तिमाहियां चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं।

First Published : May 19, 2026 | 12:12 PM IST