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रिकॉर्ड गर्मी से AC और कोल्ड ड्रिंक कंपनियों की चांदी, सीमेंट सेक्टर पर दबाव

पश्चिम एशिया तनाव, महंगे कच्चे तेल और रिकॉर्ड गर्मी के बीच भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- May 18, 2026 | 9:41 AM IST

Sectors to Watch: भारत के सामने इस समय एक साथ कई चुनौतियां खड़ी होती दिख रही हैं। एक तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, तो दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में पड़ रही रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने चिंता बढ़ा दी है। इसका असर अब शेयर बाजार, महंगाई, खेती और आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है।

पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी करीब 2.5 फीसदी टूट गया। हालांकि इस गिरावट के बीच फार्मा और FMCG सेक्टर ने कुछ हद तक बाजार को सहारा दिया। निवेशकों में डर का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया का तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता है।

तेल की कीमतें ऊंची, भारत पर बढ़ा दबाव

ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं। बाजार को डर है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं या Strait of Hormuz में रुकावट आती है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा तेल सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। इससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। इसी वजह से विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। लगातार हो रही बिकवाली की वजह से बाजार में कमजोरी बनी हुई है।

पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं

हाल ही में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। लेकिन इसके बावजूद तेल कंपनियों को अभी भी प्रति लीटर 17-18 रुपये का नुकसान हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर महंगाई और आम लोगों के खर्च पर पड़ेगा।

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Gulf संकट खत्म होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव संभव

ब्रोकरेज फर्म Emkay का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और Strait of Hormuz पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना रह सकता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर आने वाले हफ्तों में हालात सामान्य होते हैं तो बाजार में आई गिरावट निवेश का अच्छा मौका बन सकती है। ब्रोकरेज ने डिस्क्रेशनरी और इंडस्ट्रियल सेक्टर को लेकर अच्छा नजरिया रखा है।

रिकॉर्ड गर्मी से खेती और निर्माण कार्य प्रभावित

इस साल देश में भीषण गर्मी ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। तापमान सामान्य से करीब 1.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है। उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लगातार हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। 27 अप्रैल 2026 को दुनिया के 50 सबसे गर्म शहरों में सभी भारत के थे, जहां तापमान 44-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। तेज गर्मी का असर खेती पर पड़ सकता है। फसलों, मिट्टी की नमी और जलाशयों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा सड़क, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है क्योंकि ज्यादा गर्मी में काम करना मुश्किल हो जाता है।

El Nino से कमजोर मानसून का डर

रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2026 तक El Nino की संभावना 82 फीसदी तक पहुंच सकती है। El Nino आमतौर पर कमजोर मानसून और ज्यादा गर्मी से जुड़ा होता है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल ‘Super El Nino’ की आशंका बेस केस नहीं है क्योंकि Indian Ocean Dipole (IOD) कुछ राहत दे सकता है।

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Sectors to Watch: कौन से सेक्टर को फायदा, कौन दबाव में?

ब्रोकरेज की रिपोर्ट कहती है, तेज गर्मी से कुछ सेक्टरों को फायदा भी हो सकता है। AC, कूलिंग प्रोडक्ट्स और कोल्ड ड्रिंक्स की मांग बढ़ने से Consumer Durables और Beverage कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। Blue Star और Varun Beverages जैसे शेयरों को इससे फायदा हो सकता है।

वहीं दूसरी तरफ Infra, Cement और QSR सेक्टर दबाव में रह सकते हैं। ज्यादा गर्मी की वजह से निर्माण कार्य और लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। Ambuja Cements और Devyani International जैसी कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।

Sectors to Watch: महंगाई बढ़ने के संकेत

अप्रैल 2026 में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 8.3 फीसदी पहुंच गई। Fuel और Power महंगाई 24.7 फीसदी तक पहुंच चुकी है। Retail Inflation भी बढ़कर 3.5 फीसदी हो गई है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।

हालांकि कुछ आर्थिक संकेत अभी भी मजबूत बने हुए हैं। अप्रैल 2026 में पैसेंजर व्हीकल बिक्री 25.4 फीसदी और दोपहिया बिक्री 28.4 फीसदी बढ़ी। बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी 16 फीसदी रही, जो मजबूत मांग का संकेत है। इसके अलावा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर की वजह से निर्यात में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : May 18, 2026 | 9:31 AM IST