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बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 583 अंक टूटा, क्रूड ऑयल और ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशन

ब्रेंट क्रूड वायदा 126 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ने के बाद थोड़ा नरम होकर देर शाम 113 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा था

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सुन्दर सेतुरामन   
Last Updated- April 30, 2026 | 10:09 PM IST

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच शेयर बाजार में आज खूब उठापटक देखी गई। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने के कोई संकेत नहीं मिलने से बाजार में घबराहट का माहौल है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्प के बारे में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को जानकारी देने की तैयारी वाली खबरों से माहौल और भी ज्यादा अस्थिर हो गया है।  

कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,238 अंक या 1.6 फीसदी तक लुढ़क गया था। बाद में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की खबर से गिरावट की कुछ भरपाई हुई और कारोबार की समा​प्ति पर यह 583 अंक के नुकसान के साथ 76,914 पर बंद हुआ। निफ्टी 180 अंक गिरकर 23,998 पर बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड वायदा 126 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ने के बाद थोड़ा नरम होकर देर शाम 113 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा था।

बाजार में भले ही गिरावट आई हो मगर कुल मिलाकर उसने पिछले महीने प​श्चिम एशिया में संघर्ष के चरम पर हुए भारी नुकसान की भरपाई कर ली है। अमेरिका और ईरान के बीच तीन हफ्ते के संघर्ष विराम और नतीजों के सीजन के दौरान किसी भी नकारात्मक खबर नहीं होने से बाजार मजबूती मिली है।

आज की गिरावट के बावजूद बेंचमार्क सूचकांकों में इस महीने अच्छी तेजी देखी गई। अप्रैल में सेंसेक्स 6.9 फीसदी और निफ्टी 7.5 फीसदी बढ़त पर बंद हुआ, जो दिसंबर 2023 के बाद इसका सबसे अच्छा मासिक प्रदर्शन है। मार्च में सेंसेक्स 11.5 फीसदी और निफ्टी 11.3 फीसदी टूट गया था।    

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले आवागमन को बाधित कर दिया है जबकि इस समुद्री मार्ग से दुनिया भर के 20 फीसदी तेल की आवाजाही होती है। इस विवाद के समाधान की दिशा में कोई स्पष्ट प्रगति न होने और अमेरिका द्वारा संभावित हमलों की खबरों से संघर्ष विराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। इससे लंबे समय तक ऊर्जा संकट बने रहने की चिंता और बढ़ गई है। इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 47 फीसदी की तेजी आई है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है और रुपये पर भी दबाव पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 94.92 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन सहित कई वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय शेयरों की अपनी हालिया रेटिंग में कटौती के पीछे बढ़ती ईंधन लागत को एक मुख्य कारण बताया है।

इस महीने निफ्टी मिडकैप 13.6 फीसदी चढ़ा है जो नवंबर 2020 के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन है। निफ्टी स्मॉलकैप में 18.4 फीसदी की तेजी आई है जो माई 2014 के बाद किसी महीने में सबसे लंबी उछाल है।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘युद्ध विराम और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत के बाद किसी संभावित समाधान को लेकर काफी उम्मीदें थीं। लेकिन अब अमेरिका वास्तव में नए सैन्य विकल्प पर विचार कर रहा है तो वे उम्मीदें शायद पूरी न हों। हम युद्ध विराम से पहले वाली स्थितियों में वापस लौट सकते हैं, जिसका तेल और बाजार दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।’

सभी  क्षेत्रीय सूचकांक अप्रैल में बढ़त पर बंद हुए। निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा 22 फीसदी की तेजी आई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 50.9 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 463.3 लाख करोड़ रुपये रहा। इस महीने निफ्टी में अदाणी एंटरप्राइजेज में सबसे ज्यादा 36.9 फीसदी और अदाणी पोर्ट्स में 26.3 फीसदी की तेजी आई। इस महीने एचसीएल टेक में 10.6 फीसदी आई।

एसबीआई सिक्यो. में  तकनीकी और डेरिवेटिव शोध प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, ‘निफ्टी के लिए तत्काल प्रतिरोध 24,250–24,300 के दायरे में दिख रहा है। इससे ऊपर लगातार बढ़त होने पर यह 24,450 और 24,600 तक बढ़ सकता है।’

First Published : April 30, 2026 | 10:01 PM IST