शेयर बाजार

कच्चे तेज की आंच से झुलसे ए​शियाई बाजार, ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर के पार

ईरान युद्ध के का असर जापान और एशियाई देशों में तेल की सप्लाई पर देखने को मिल रहा है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- March 30, 2026 | 9:54 AM IST

ईरान में जारी युद्ध और तेल कीमतों में तेज बढ़ोतरी की चिंता के बीच सोमवार सुबह एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। एशियाई बाजारों में यह गिरावट पिछले शुक्रवार वॉल स्ट्रीट में आई बड़ी गिरावट के बाद देखने को मिली, जहां लगातार पांचवें सप्ताह बाजार नुकसान में बंद हुआ, जो लगभग चार साल में सबसे लंबा गिरावट का सिलसिला है।

जापान का प्रमुख सूचकांक निक्केई 225 सुबह के कारोबार में 4.5 फीसदी गिरकर 50,979.54 पर आ गया। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 1.2 फीसदी गिरकर 8,417.00 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.2 फीसदी गिरकर 5,264.32 पर आ गया। हांगकांग का हैंग सेंग 1.7 फीसदी गिरकर 24,519.63 पर और शंघाई कम्पोजिट 0.7 फीसदी गिरकर 3,884.57 पर बंद हुआ।

जापान और एशिया के अन्य देशों में होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंच में बाधा को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह क्षेत्र कच्चे तेल आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है।

भारतीय बाजारों में भारी बिकवाली

सोमवार (30 मार्च) सुबह भारतीय बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर निफ्टी50 करीब 1.23 प्रतिशत यानी 303.30 अंक गिरकर 22,516.30 पर कारोबार करता दिखा। वहीं सेंसेक्स भी 1.38 प्रतिशत यानी 1,018.76 अंक टूटकर 72,560 के स्तर पर पहुंच गया।

ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप में लगभग 1.95 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 2.31 फीसदी की गिरावट देखी गई। सेक्टर की बात करें तो निफ्टी बैंक और निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे ज्यादा दबाव रहा। दूसरी ओर निफ्टी मेटल ने बेहतर प्रदर्शन किया।

कच्चा तेल 115 डॉलर के पार

एनर्जी मार्केट में अमेरिकी कच्चा तेल 2.28 डॉलर बढ़कर 101.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 2.88 डॉलर बढ़कर 115.45 डॉलर प्रति बैरल हो गया। युद्ध से पहले ब्रेंट की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी।

निवेशक अब इस आशंका से चिंतित हैं कि युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिससे वैश्विक बाजारों में महंगाई बढ़ेगी और एशिया की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

मॉर्निंगस्टार रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट (इक्विटी) जेवियर ली ने कहा, “हालांकि हमें नहीं लगता कि यह संघर्ष बहुत लंबा चलेगा, लेकिन निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।”

तेल की कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं, जबकि कुछ समय के लिए तब राहत मिली थी जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की समयसीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी थी।

अमेरिकी बाजारों का हाल

वॉल स्ट्रीट पर एसएंडपी 500 सूचकांक 1.7 फीसदी गिरकर बंद हुआ, जो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सबसे खराब सप्ताह रहा। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 793 अंक यानी 1.7 फीसदी गिर गया और अपने पिछले महीने के रिकॉर्ड स्तर से 10 फीसदी से अधिक नीचे आ गया। नैस्डैक कम्पोजिट 2.1 फीसदी गिरा।

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पिछले शुक्रवार एसएंडपी 500 108.31 अंक गिरकर 6,368.85 पर बंद हुआ। डाउ जोन्स 793.47 अंक गिरकर 45,166.64 पर और नैस्डैक 459.72 अंक गिरकर 20,948.36 पर पहुंच गया।

बॉन्ड की यील्ड बढ़ी

बॉन्ड बाजार की बात करें तो, 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.48 फीसदी तक पहुंच गई, लेकिन बाद में गिरकर सप्ताह के अंत में 4.43 फीसदी पर बंद हुई। यह गुरुवार के 4.42 फीसदी और युद्ध से पहले के 3.97 फीसदी से ज्यादा है।

मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर थोड़ा गिरकर 159.97 येन पर आ गया, जो पहले 160.32 येन था। यूरो 1.1505 डॉलर पर रहा, जो पहले 1.1510 डॉलर था। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अपने ऑल टाइम लो से करीब 128 पैसे की रिकवरी करते हुए 93.57 पर खुला।

-पीटीआई इनपुट के साथ

First Published : March 30, 2026 | 9:54 AM IST