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CAFE 2027: EV को बढ़ावा, हाइब्रिड पर कटौती; पॉलिसी से किन Auto Stocks को हो सकता है फायदा?

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का मानना है कि ये नए नियम इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाएंगे, साथ ही अलग-अलग शेयरहोल्डर्स के बीच संतुलन बनाए रखेंगे।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- April 13, 2026 | 1:46 PM IST

Auto Stocks on CAFE Norms Change: सरकार ने 2027 के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानकों का मसौदा नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें अनुपालन मापने के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। नए ढांचे के तहत अनुपालन का आकलन अब सालाना आधार पर नहीं, बल्कि तीन साल के ब्लॉक जैसे वित्त वर्ष 2028-30 और 2030-32 में किया जाएगा। इससे वाहन निर्माताओं (OEMs) को इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से करने के लिए अधिक समय और लचीलापन मिलेगा। प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की उम्मीद है।

ड्राफ्ट के प्रमुख बदलाव

मजबूत हाइब्रिड वाहनों के लिए प्रोत्साहन कम कर दिया गया है, जहां सुपर-क्रेडिट को 2.0 गुना से घटाकर 1.6 गुना कर दिया गया है। छोटे वाहनों के लिए पहले प्रस्तावित 3 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर की छूट भी हटा दी गई है। साथ ही, मसौदे में ‘डेरोगेशन टेक्नोलॉजी’ की शुरुआत की गई है। इससे आवश्यक इलेक्ट्रिक वाहन हिस्सेदारी (EV मिक्स) को 2-4 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

यदि कोई कंपनी मानकों का पालन नहीं करती है, तो उसे ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी से क्रेडिट खरीदने का विकल्प मिलेगा। इसकी कीमत वित्त वर्ष 2028 में 2,500 रुपये प्रति ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर से शुरू होकर वित्त वर्ष 2032 तक 4,500 रुपये तक बढ़ जाएगी।

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पॉलिसी से किन कंपनियों को फायदा?

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का मानना है कि ये नए नियम इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाएंगे, साथ ही अलग-अलग शेयरहोल्डर्स के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। ब्रोकरेज की पसंद में महिंद्रा एंड महिंद्रा, हुंडई और सोना बीएलडब्ल्यू शामिल हैं। ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नीति की दिशा तेज इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर इशारा करती है।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि OEMs को अब ज्यादा लचीलापन मिलेगा। जैसे कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों की लॉन्चिंग को चरणबद्ध तरीके से कर सकते हैं और डेरोगेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

FY28 के लिए EV मिक्स अनुमान

ब्रोकरेज के अनुसार, मारुति को अपने पोर्टफोलियो में करीब 1-3 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों को मिक्स की जरूरत हो सकती है। जबकि हुंडई और टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल कारोबार के लिए यह 4 से 7 प्रतिशत रह सकता है। महिंद्रा एंड महिंद्रा को अपने पोर्टफोलियो के कारण 13-15 प्रतिशत तक का इलेक्ट्रिक वाहन मिक्स रखना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, ज्यादातर भारतीय वाहन कंपनियों के लिए यह लक्ष्य हासिल करना संभव दिखता है। हालांकि, निसान, रेनो और फॉक्सवैगन जैसी वैश्विक कंपनियों को अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को लॉन्च प्लान को तेज करना पड़ सकता है।

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Auto Stocks: किन शेयरों पर असर?

इन बदलावों को महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। अब CAFE मानकों को पूरा करना आसान और कम जोखिम वाला दिख रहा है। साथ ही, इन कंपनियों को अपने प्रोडक्ट स्ट्रेटजी में हाइब्रिड शामिल करने के लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं, मारुति और टोयोटा को अपनी हाइब्रिड रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है, खासकर हाइब्रिड प्रोत्साहन में कटौती और छोटे वाहनों के लिए छूट हटने के बाद।

First Published : April 13, 2026 | 1:46 PM IST