FY25 में रिकॉर्ड तेजी के बाद FY26 में नए डिमैट खातों के खुलने की रफ्तार धीमी पड़ गई, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव और कमजोर रिटर्न ने खुदरा निवेशकों की धारणा (sentiment) पर असर डाला।
FY26 में शुद्ध रूप से करीब 3.2 करोड़ नए डिमैट खाते जुड़े, जबकि कुल डिमैट खातों की संख्या 22.5 करोड़ के पार पहुंच गई। यह आंकड़े डिपॉजिटरी NSDL और CDSL के डेटा पर आधारित हैं। यह FY25 के मुकाबले करीब 22 फीसदी की गिरावट दर्शाता है, जब रिकॉर्ड 4.1 करोड़ खाते जुड़े थे। उस समय मजबूत बुल रन, तेज IPO गतिविधि और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने इस तेजी को बढ़ावा दिया था।
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यह सुस्ती शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच देखने को मिली। FY26 में भारत के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स का प्रदर्शन पिछले छह वर्षों में सबसे कमजोर रहा, जिसमें Nifty-50 में 5.1 फीसदी की गिरावट आई, जबकि BSE Sensex 7.1 फीसदी टूट गया। वहीं व्यापक बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nifty Midcap 100 में 1.9 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, जबकि Nifty Smallcap 100 लगभग 6 फीसदी गिर गया।
बढ़ी हुई अस्थिरता ने निवेशकों की रुचि को और कमजोर कर दिया। वैश्विक अनिश्चितताएं- जैसे अमेरिका के टैरिफ कदम, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार निकासी और भू-राजनीतिक तनाव– ने घरेलू शेयर बाजार में समय-समय पर गिरावट को बढ़ावा दिया।
प्राथमिक बाजार, जो FY25 में नए डिमैट खातों के खुलने का प्रमुख कारण था, उसमें भी रफ्तार धीमी पड़ी। हालांकि FY26 फंड जुटाने के लिहाज से रिकॉर्ड वर्ष रहा, जिसमें 112 IPO के जरिए करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए, लेकिन निवेशकों का उत्साह कम हुआ। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, औसत लिस्टिंग गेन घटकर 8 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 30 फीसदी था। वहीं रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी कमजोर पड़ी, जहां औसत IPO आवेदन घटकर 21.3 लाख से 13 लाख रह गए।
बाजार के जानकारों का मानना है कि बड़े शहरों में शुरुआती स्तर पर गिरावट (saturation) के संकेत दिखने लगे हैं, जहां वित्तीय रूप से एक्टिव निवेशकों का बड़ा हिस्सा पहले ही बाजार में प्रवेश कर चुका है। वहीं, डेरिवेटिव्स सेगमेंट में सख्त नियामकीय निगरानी और जोखिमों के प्रति बढ़ती जागरूकता ने सट्टेबाजी गतिविधियों को भी सीमित किया है।
ट्रेडिंग गतिविधि में भी यह ठंडापन साफ नजर आया। कैश सेगमेंट में औसत दैनिक कारोबार सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर 1.13 लाख करोड़ रुपये रह गया। हालांकि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कारोबार में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन NSE पर गतिविधियों में दबाव के संकेत दिखाई दिए।
FY27 में डिमैट खातों की वृद्धि स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन यह ज्यादा सामान्य (normalised) स्तर पर रहेगी। बचत के वित्तीयकरण (financialisation of savings), डिजिटल अपनाने (digital adoption) और निवेशकों में बढ़ती जागरूकता जैसे स्ट्रक्चलर फैक्टर्स नए खातों की वृद्धि को समर्थन देंगे। हालांकि, कमजोर रिटर्न और IPO गतिविधियों में नरमी के चलते यह रफ्तार FY25 के हाई स्तर से नीचे रह सकती है।