फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) ने ऑप्शन अनुबंधों की स्ट्राइक प्राइस के लिए फ्रेमवर्क बनाने के बाजार नियामक सेबी के प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह एसोसिएशन ब्रोकरों और डेरिवेटिव बाजार से जुड़े लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली वैश्विक संस्था है। उसने ओपन इंटरेस्ट वाली पोजीशन को सुरक्षित रखने के उपाय और परिचालन संबंधित जटिलता कम करने के तरीके भी सुझाए हैं।
एफआईए ने सभी एक्सचेंजों में यह व्यवस्था लागू करने के लिए न्यूनतम कॉमन स्टैंडर्ड और न्यूनतम स्ट्राइक फ्लोर का भी सुझाव दिया है।
सेबी को सौंपे गए उसके अनुरोध में कहा गया है, ‘हालांकि एक्सचेंजों के पास सेगमेंट और प्रोडक्ट के हिसाब से स्ट्राइक इंटरवल तय करने की स्वायत्तता होनी चाहिए, लेकिन ‘इन-द-मनी’ और ‘आउट-ऑफ-द-मनी’ स्ट्राइक की संख्या के लिए स्पष्ट न्यूनतम जरूरतें तय होनी चाहिए।’
मई में, सेबी ने एक परामर्श पत्र जारी किया था। इसमें इक्विटी बाजार के सबसे ज्यादा कारोबार वाले सेगमेंट यानी ऑप्शन अनुबंधों के लिए स्ट्राइक प्राइस शुरू करने और उनके प्रबंधन के लिए एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
प्रस्तावित उपायों में ‘इन-द-मनी’ और ‘आउट-ऑफ-द-मनी’ (ओटीएम) अनुबंधों की कम से कम संख्या उपलब्ध कराने के लिए ऑप्शन अनुबंध शुरू करने के नियम शामिल हैं। साथ ही, ट्रेडिंग जारी रखने के लिए मौजूदा बाजार भाव के आसपास स्ट्राइक की उपलब्धता की रोजाना समीक्षा करना और मौजूदा बाजार स्तर से काफी दूर वाली स्ट्राइक कीमतों को समय-समय पर हटाना भी इन उपायों का हिस्सा है।
यह प्रस्ताव संबंधित संपत्तियों में तेज इंट्राडे उतार-चढ़ाव की चिंताओं के बाद आया है। इस उतार-चढ़ाव क कारण कीमतें सबसे दूर उपलब्ध स्ट्राइक मूल्य से आगे भी जा सकती हैं। ऐसे में कारोबारियों के पास हेज करने या पोजीशन लेने के लिए उपयुक्त ऑप्शन अनुबंध नहीं बचेंगे।
स्ट्राइक मूल्य पहले से निर्धारित ऐसा मूल्य होता है जिस पर एक ऑप्शन कारोबारी के पास संबंधित प्रतिभूति खरीदने या बेचने का अधिकार तो होता है, लेकिन कोई बाध्यता नहीं होती। स्ट्राइक इंटरवल का मतलब दो स्ट्राइक कीमतों के बीच का अंतर है और इसे प्रोडक्ट की उपलब्धता और बाजार में तरलता के बीच संतुलन के लिए बनाया गया है।
सेबी को दी अपनी प्रतिक्रिया में एसोसिएशन ने कीमत में बदलाव की दिशा में इंट्राडे में नई स्ट्राइक शुरू करने के प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन स्ट्राइक प्राइस हटाने को लेकर चिंता जताई है।
एफआईए ने असरदार मूल्य खोज और हेजिंग में मदद के लिए ‘एट-द-मनी’ स्तर के आस-पास स्ट्राइक की पर्याप्त संख्या बनाए रखने के महत्त्व पर जोर दिया। उसने आगाह किया कि बहुत ज्यादा पाबंदी वाले नियम ट्रेडिंग रणनीतियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और बाजार की क्षमता कम कर सकते हैं। साथ ही, उसने ऐसे उपायों का समर्थन किया जो कम तरलता वाली स्ट्राइक कीमतों की अत्यधिक संख्या रोकते हैं। उसने उपलब्धता और लिक्विडिटी के बीच संतुलित तरीका अपनाने का भी सुझाव दिया।
उद्योग निकाय ने नई स्ट्राइक शुरू करने में परिचालन संबंधित आसानी और ऑटोमेशन की जरूरत पर भी जोर दिया।