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LT Foods Stocks: दावत (Daawat) और रॉयल (Royal) जैसे ब्रांड्स के दम पर कंज्यूमर सेगमेंट अपनी खास पहचान रखने वाली कंपनी एलटी फूड्स इस समय एक ऐसे मोड़ पर है, जहां कंपनी की मजबूत फाइनेंशियल स्थिति और बाहरी हालात मिलकर इसे निवेश के लिहाज से मजबूत बना रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) का कहना है कि कंपनी की करीब 46 फीसदी कमाई अमेरिका से आती है। वहां दावत और रॉयल जैसे ब्रांड्स की वजह से कंपनी ने पहले 50 फीसदी टैरिफ का असर काफी हद तक संभाल लिया था। अब नए 10% टैरिफ के बाद उम्मीद है कि बिक्री बढ़ेगी, मुनाफा सुधरेगा और कंपनी को बेहतर दाम मिलेंगे। पहले जो पिछले छह महीनों में दबाव था, वह अब धीरे-धीरे फायदे में बदल सकता है।
मोतीलाल ओसवाल ने LT Foods पर BUY रेटिंग दी है। साथ ही प्रति शेयर टारगेट प्राइस 500 रुपये प्रति शेयर रखा है। बीते ट्रेडिंग सेशन (13 अप्रैल) का शेयर 406 रुपये पर बंद हुआ था। इस तरह मौजूदा भाव से स्टॉक में आगे करीब 23 फीसदी तक तगड़ा रिटर्न देखने को मिल सकता है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY25 से FY28 के बीच LT Foods की कमाई हर साल करीब 17% की दर से बढ़ सकती है। वहीं, कंपनी का मुनाफा (EBITDA और PAT) भी लगभग 18% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी का मूल्यांकन FY28 की अर्निंग्स के आधार पर 17 गुना रखा है और इस आधार पर टारगेट प्राइस 500 रुपये तय किया है।
एलटी फूड्स के परफॉर्मेंस की बात करें, तो यह लॉन्ग टर्म में मल्टीबैगर स्टॉक रहा है। बीते दो साल में इसने निवेशकों को पैसा डबल किया है। निवेशकों को 100 फीसदी का रिटर्न मिला है। हालांकि, बीते एक साल में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच शेयर ने करीब 15 फीसदी का अपसाइड दिखाया है। वहीं, 3 साल में शेयर ने 330 फीसदी और 5 साल में करीब 500 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न निवेशकों को दिया है।
बुधवार को बीएसई पर स्टॉक में 2.7 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 417.10 पर कारोबर शुरू हुआ। सुबह 10:15 बजे तक के कारोबार में शेयर ने 420.80 रुपये का हाई और 410.40 का लो बनाया। बीएसई पर स्टॉक का मार्केट कैप 14,402 करोड़ रुपये से ज्यादा दर्ज किया गया।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि फिलहाल कंपनी पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का दबाव है। 2025 में बासमती धान की कीमतें करीब 12% बढ़ गई हैं, जिससे खासकर पंजाब के इलाकों में उत्पादन पर असर पड़ा है। इसका असर कंपनी के मुनाफे (ग्रॉस मार्जिन) पर भी पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद, LT Foods अपनी मजबूत इन्वेंट्री मैनेजमेंट, अच्छे एक्सपोर्ट दाम (करीब 144 रुपये प्रति किलो) और बेहतर कैश मैनेजमेंट की वजह से इस दबाव को काफी हद तक संभाल पा रही है। इससे पता चलता है कि कंपनी बढ़ती लागत के बावजूद अपने मुनाफे को बचाने में सक्षम है।
कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति भी पहले से मजबूत हुई है। LT Foods ने धीरे-धीरे अपना कर्ज कम किया है और पिछले कुछ सालों में इसकी कमाई और मुनाफा लगातार अच्छी रफ्तार से बढ़ा है। साथ ही, कंपनी के पास अच्छा कैश फ्लो भी है, जो इसे और मजबूत बनाता है। अच्छी बात यह है कि कंपनी के ऑर्गेनिक बिजनेस से जुड़ी बड़ी समस्या अब काफी हद तक खत्म हो गई है। फरवरी 2026 में अमेरिका के फैसले के बाद यूरोप पर लगने वाला टैक्स बहुत कम हो गया है। इससे कंपनी पर आने वाला बड़ा खर्च भी काफी घट गया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि US-इजराइल-ईरान संघर्ष ने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। करीब 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल रास्ते में है और शिपिंग खर्च 3-4 गुना तक बढ़ गया है। इससे कंपनियों के मुनाफे और नकदी पर दबाव बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता का असर LT Foods की कमाई पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कंपनी का बड़ा हिस्सा निर्यात से आता है। हालांकि, बासमती चावल की कीमतों में थोड़ी गिरावट से कुछ राहत मिल रही है, लेकिन कुल मिलाकर लागत का दबाव बना हुआ है।
फिर भी, हाल ही में हुए दो हफ्ते के युद्धविराम से स्थिति में थोड़ी राहत के संकेत मिले हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से सामान्य रूप से खुल जाता है और बाजार स्थिर होता है, तो एलटी फूड्स को फायदा मिल सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि उसका नॉर्थ अमेरिका बिजनेस मजबूत है और वह मध्य पूर्व पर कम निर्भर है।
(डिस्क्लेमर: यहां शेयर में खरीदारी की सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)