दुनिया भर के शेयर बाजार शुक्रवार को फिर गिर गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की समय सीमा बढ़ाने के कदम से भी तेल की कीमतों या सरकारी बॉन्डों को कोई राहत नहीं मिली। ट्रंप ने इस समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है और कहा है कि इसके बाद ईरान को अपने ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का सामना करना पड़ेगा। यह घोषणा ठीक तब हुई, जब गुरुवार को वॉल स्ट्रीट के शेयरों में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट आई थी।
हालांकि, ईरान ने सीधे तौर पर ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि वह बातचीत के लिए तैयार है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दोहराया कि वह इस क्षेत्र में जहाजों के आवागमन को बाधित करने की कोशिश करेगी, जिससे तेल की कीमतों में उछाल में मदद मिलेगी। पूरे यूरोप का स्टॉक्स 600 इंडेक्स गुरुवार को 1.1 फीसदी गिरने के बाद शुक्रवार को 1 फीसदी और गिर गया। जर्मनी का डैक्स इंडेक्स भी 1.2 फीसदी नीचे रहा।
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एशियाई शेयरों का एमएससीआई इंडेक्स (जापान को छोड़कर) ओवरनाइट 0.8 फीसदी गिरा। अमेरिकी एसऐंडपी 500 के फ्यूचर्स ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी और पिछली गिरावट के बाद (जो पिछले सत्र में 1.7 फीसदी थी) अब वह 0.5 फीसदी नीचे हैं। तकनीक पर केंद्रित नैसडेक कम्पोजिट गुरुवार को 2.4 फीसदी गिर गया, जिससे यह इंडेक्स अक्टूबर के आखिर में अपने रिकॉर्ड उच्च बंद स्तर से करीब 11 फीसदी नीचे आ गया है।
गुरुवार को तेजी के बाद सरकारी बॉन्ड यील्ड में और बढ़ोतरी हुई क्योंकि निवेशक संभावित महंगाई के झटके से जूझ रहे हैं, जिसके कारण केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। कीमतें गिरने पर यील्ड बढ़ती है और इसके विपरीत कीमतें बढ़ने पर यील्ड घटती है।
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10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (जो दुनिया भर में उधार लेने की लागत का रुख तय करती है) करीब 4 आधार अंक बढ़कर 4.468 फीसदी पर पहुंच गई है। यह जुलाई के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर है। मनी मार्केट अब लगभग 60 फीसदी संभावना देख रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल दरों में बढ़ोतरी करेगा। यह फरवरी के आखिर की स्थिति से एक बड़ा बदलाव है, जब ट्रेडर 2026 में दो बार दरें घटने पर दांव लगा रहे थे। जर्मनी के 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 3.13 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो 2011 के बाद से उसका उच्चतम स्तर है।