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जिंस बाजार में माल एवं सेवा कर की बाधा, इंटीग्रेटेड टैक्स सिस्टम का प्रस्ताव : सेबी

चेयरमैन तुहिन कांत पाडेय ने कहा, नियामक एआई मॉडलों मसलन मिथोस से उभरने वाले जोखिमों पर जल्द एडवाइजरी जारी करेगा

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- May 04, 2026 | 10:48 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड जिंस बाजार की चुनौतियों के हल के लिए सरकार के साथ काम कर रहा है। इनमें माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी चुनौतियां भी शामिल हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियामक ने राजस्व विभाग को कुछ समस्याओं से अवगत कराया है और नियामक चाहता है कि जीएसटी परिषद कमोडिटी डेरिवेटिव में फिजिकल डिलिवरी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के तौर पर इस पर विचार करे। 

पांडेय ने आईएमसी कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रैंस से इतर कहा, हमने प्रस्ताव दिया है कि राज्य के जीएसटी के बजाय एक एकीकृत जीएसटी की व्यवस्था हो सकती है। डिलिवरी के लिए वेयरहाउस अलग-अलग जगहों पर हो सकते हैं औऱ इस कारण उन्हें डिलिवरी के मकसद से सभी राज्यों में पंजीकरण कराना पड़ सकता है। यह सचमुच बहुत मुश्किल काम है। 

बाजार के कई प्रतिभागियों और मध्यस्थों ने पहले भी नियामक के सामने जीएसटी से जुड़े मसलों पर अपनी बात रखी है। मौजूदा चलन के तहत एक्सचेंज से जुड़ी डिलिवरी के लिए मध्यस्थों को हर उस राज्य में अलग से जीएसटी पंजीकरण करवाना पड़ सकता है जहां डिलिवरी सेंटर है, भले ही यह लेनदेन एक्सचेंजों के केंद्रीकृत तंत्र के जरिये ही पूरा होता हो और निपटाया जाता हो।

विशेषज्ञों ने कहा कि इससे अलग-अलग राज्यों में फाइलिंग, कई पंजीकरण, मिलान में चुनौतियां और परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि आईजीएसटी के तहत ऐसी डिलिवरी को अंतरराज्यीय आपूर्ति मानने से टैक्स क्रेडिट बिना किसी रुकावट के हो सकेगा और मौजूदा व्यवस्था के जरिये गंतव्य राज्यों को कर का बंटवारा सुनिश्चित करते हुए केंद्रीयकृत अनुपालन संभव हो पाएगा। 

एसकेआई कैपिटल के प्रबंध निदेशक नरिंदर वाधवा ने कहा, इन बदलावों से संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। जिंस बाजार अब सोने की डोरस्टेप डिलिवरी जैसी सुविधाओं के जरिये तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में जीएसटी से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के उपाय इस बाजार को ज्यादा लोगों के लिए सुलभ बना देंगे। अभी अगर कोई बिचौलिया डिलिवरी वाले उस खास राज्य में पंजीकृत नहीं है तो इससे काफी परेशानी होती है। 

बैंकों और बीमा कंपनियों जैसे अन्य संस्थागत निवेशकों की भागीदारी से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए सेबी के चेयरमैन ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) उनके कमोडिटी डेरिवेटिव बाजार में हिस्सा लेने के पक्ष में नहीं हैं।

पांडेय ने कहा कि अन्य नियामकों के पास इस क्षेत्र के प्रति सकारात्मक रुख न रखने का वैध तर्क है और यह कि बाजार नियामक को अन्य नियामकों के साथ बातचीत के दौरान कुछ चिंताओं के चलते कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उन्होंने कहा, उनके पास अपना तर्क था कि इस समय उन्हें यह सही वक्त नहीं लग रहा है क्योंकि वे लंबी अवधि के होते हैं। बीमा लंबी अवधि का होता है तो ऐसे में कमोडिटी डेरिवेटिव्स किस तरह मदद करेंगे? कॉन्फ्रेंस में अपने भाषण के दौरान चेयरमैन ने उन चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला, जो मिथोस और इसी तरह के अन्य एआई मॉडलों के कारण आ रही हैं और जो बाजार के दम की परीक्षा लेती हैं। सेबी इस बारे में जल्द ही शुरुआती परामर्श जारी करेगा।

उन्होंने आगाह किया कि आपस में जुड़े हुए प्रतिभूति बाजार में एक भी कमजोर कड़ी बड़े जोखिम पैदा कर सकती है और इसलिए नियमन वाली संस्थाओं को मजबूत साइबर लचीलेपन और लगातार निगरानी के जरिये ऐसे जोखिमों से एक कदम आगे रहना होगा।

उन्होंने कहा, एल्गोरिदम मानवीय नियंत्रणों से कहीं अधिक तेजी से काम कर सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी के माध्यम बन सकते हैं। यह विशेष रूप से इसलिए प्रासंगिक है, क्योंकि अगली पीढ़ी के एआई मॉडल अधिक शक्तिशाली हो रहे हैं। ये टूल्स कमजोरियों की पहचान करने में तो मदद कर सकते हैं, लेकिन साथ ही साथ इनका फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर उनका दुरुपयोग भी कर सकते हैं।

सीकेवाईसी 2.0 को शुरू करने से जुड़े सवालों पर (पूरी वित्तीय प्रणाली में एक ही केवाईसी सुविधा) सेबी चेयरमैन ने कहा, सीकेवाईसी 2.0 पर अभी काम चल रहा है। सीईआरसीएआई इसे कर रहा है और हम सभी इसमें योगदान दे रहे हैं। पिछले हफ्ते हमने सीईआरएसआई के साथ मीटिंग की थी ताकि उन सभी अलग-अलग विंदुओं की पहचान की जा सके, जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। जुलाई के आखिर तक हमारे पास कुछ ठोस जानकारी हो सकती है।

सीईआरसीएआई भारत की प्रतिभूतिकरण, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण और प्रतिभूति हित की केंद्रीय रजिस्ट्री है। पांडेय ने सीकेवाईसी पूल में डेटा के प्रमाणीकरण को लेकर स्पष्टता की कमी से जुड़े मसलों को हल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

First Published : May 4, 2026 | 10:28 PM IST