भारत की शीर्ष सीमेंट कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही मजबूती के साथ समाप्त की। इस तिमाही में उन्हें मांग, कीमतों में सुधार और परिचालन लाभ से मदद मिली। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पादन लागत पर दबाव आया और अब उसका असर पड़ना शुरू हो गया है।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी के अनुसार इस क्षेत्र ने चौथी तिमाही में ऊंचे आधार के साथ पिछले साल के मुकाबले बिक्री में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिससे वित्त वर्ष 2026 में कुल बढ़त 7 प्रतिशत तक पहुंच गई। मांग को आवासीय क्षेत्र से समर्थन मिला। इस क्षेत्र की कुल सीमेंट खपत में 55-60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों से भी मांग को मदद मिली।
अल्ट्राटेक सीमेंट और श्री सीमेंट ने क्रमशः 9 प्रतिशत और 11 प्रतिशत की बिक्री वृद्धि के साथ उद्योग से बेहतर प्रदर्शन किया। विश्लेषकों ने अल्ट्राटेक के इस प्रदर्शन का श्रेय उसके प्रीमियम उत्पादों, बेहतर क्षेत्रीय प्रदर्शन और आपूर्ति के अनुकूल उपायों को दिया। श्री सीमेंट को पहले कीमत अनुशासन को प्राथमिकता देने के बाद अब बिक्री वृद्धि की ओर रणनीतिक बदलाव करने से फायदा मिला।
विश्लेषकों ने बताया कि डालमिया भारत और अंबुजा सीमेंट्स ने अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। डालमिया भारत की बिक्री पर पूर्वी क्षेत्र में अचानक हुई बंदी का असर पड़ा, जबकि अंबुजा के प्रदर्शन पर अधिग्रहीत संपत्तियों के धीमे विस्तार का प्रभाव पड़ा।
मिरे ऐसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अक्षय शेट्टी ने कहा, ‘चौथी तिमाही में प्राप्तियों के रुझान थोड़े सकारात्मक थे। लेकिन सभी कंपनियों में अलग-अलग थे। इससे संकेत मिलता है कि मांग में जो रिकवरी हुई है, वह अभी तक कीमतों में व्यापक बढ़ोतरी में नहीं बदली है।’
इक्विरस सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक राघव माहेश्वरी ने कहा कि इस क्षेत्र का सालाना मुनाफा थोड़ा कमजोर रहा। इसकी वजह प्राप्तियों का लगभग स्थिर रहना और पैकेजिंग की लागत में बढ़ोतरी थी। पिछले साल कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण ऊंचे आधार की वजह से कुल प्राप्तियों में सालाना आधार पर 1 प्रतिशत की गिरावट आई।
बेहतर प्राप्ति और कम परिचालन लागत की मदद से इस क्षेत्रत्र के मुनाफे में लगातार सुधार हुआ। कुलकर्णी ने बताया कि चौथी तिमाही में प्रति टन एबिटा लगभग 1,060 रुपये रहा। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग सपाट रहा। लेकिन वित्त वर्ष 2026 के लिए औसत प्राप्तियों में सुधार के कारण प्रति टन एबिटा में 150-175 रुपये का सुधार हुआ और यह 1,000 रुपये से ज्यादा हो गया।
विश्लेषकों ने कहा कि सीमेंट उद्योग की सबसे बड़ी चिंता उत्पादन लागत पर पश्चिम एशिया की जंग का असर है। माहेश्वरी ने कहा कि फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कोयले और पेटकोक की कीमतें वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के औसत स्तर से 30-35 प्रतिशत बढ़ गई हैं। हालांकि, ज्यादातर कंपनियों को अपनी परिचालन लागत में तुरंत कोई बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली, क्योंकि वे पहले से जमा किए गए कम लागत वाले ईंधन का इस्तेमाल कर रही थीं।
कुलकर्णी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इस क्षेत्र पर ज्यादा असर नहीं पड़ा क्योंकि कंपनियों ने कम लागत वाले स्टॉक का इस्तेमाल किया, जो आम तौर पर दो से तीन महीने तक चलता है। उन्होंने कहा कि सीमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए कुल उत्पादन लागत में ईंधन का हिस्सा 15-20 प्रतिशत होता है।